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Nitya Bole Jane Wale Shlok Pdf / नित्य बोले जाने वाले श्लोक Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Nitya Bole Jane Wale Shlok Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Nitya Bole Jane Wale Shlok Pdf Download र सकते हैं और आप यहां से  यदा यदा ही धर्मस्य मीनिंग हिंदी pdf   पढ़ सकते हैं।

 

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Nitya Bole Jane Wale Shlok Pdf / नित्य बोले जाने वाले श्लोक पीडीएफ

 

 

 

पुस्तक का नाम नित्य बोले जाने वाले श्लोक Pdf
पुस्तक की भाषा संस्कृत 
श्रेणी धार्मिक 
कुल पृष्ठ 382
साइज 15 MB 
फॉर्मेट Pdf

 

 

 

नित्य बोले जाने वाले श्लोक Pdf Download

 

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Nitya Bole Jane Wale Shlok Pdf
Nitya Bole Jane Wale Shlok Pdf
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मित्रों, इस पोस्ट में नित्य पढ़े जाने वाले श्लोक दिये गये हैं, इन्हे रोज पढ़ने से मनुष्य को बहुत ही लाभ होता है। उन्हें हम समस्यायों से छुटकारा मिलता है। 

 

 

 

घर में सुख – शान्ति रहती है। चित्त प्रसन्न रहता है। आमदनी बढ़ती है। रोग – दोष से मुक्ति मिलती है। घर के लोग स्वस्थ रहते है। हर तरह की परेशानियां ख़त्म होती है। 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

 

हनुमान जी वृक्ष के पत्तो में छिपकर विचार करने लगे कि हे भाई! क्या करूँ, इनका दुःख कैसे दूर करूँ? उसी समय बहुत सी स्त्रियो को साथ लिए सज-धज कर वहां रावण आया।

 

 

 

 

उसने सीता जी को बहुत प्रकार से समझाया साम, दाम, भय और भेद दिखलाया। रावण ने कहा – हे सुमुखि! हे सयानी! सुनो, मंदोदरी आदि सब रानियों को मैं तुम्हारी दासी बना दूंगा यह मेरा प्रण है।

 

 

 

 

तुम एक बार मेरी तरफ देखो तो सही। अपने परम सनेही कोशलाधीश श्री राम जी का स्मरण करके जानकी जी तिनके की ओट करके कहने लगी।

 

 

 

हे दशमुख! सुन, जुगनू के प्रकाश से क्या कभी कमलिनी खिल सकती है? जानकी जी फिर कहती है अपने लिए भी मन में ऐसा ही समझ ले। तुझे श्री रघुवीर की खबर नहीं है। तू मुझे सूने में हर लाया है। तुझे लज्जा नहीं आती?

 

 

 

 

9- दोहा का अर्थ-

 

 

 

अपने को जुगनू के समान और श्री राम जी को सूर्य के समान सुनकर और सीता जी के कठोर वचन को सुनकर रावण बहुत क्रोध भरकर खिसिआते हुए बोला।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

सीता तूने मेरा अपमान किया है। नहीं तो अब भी जल्दी से मेरी बात मान ले। सीता जी ने कहा – हे दशग्रीव! प्रभु की भुजा जो श्याम कमल की माला के समान सुंदर और हाथी के सूंड़ के समान पुष्ट तथा विशाल है। यो तो वह भुजा मेरे कंठ में पड़ेगी या तेरे द्वारा यहां से हटाया जाउंगी। रे शठ! सुन, यही मेरा सच्चा प्रण है।

 

 

 

 

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