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Nirmala Novel Premchand Pdf / निर्मला उपन्यास Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Nirmala Novel Premchand Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Nirmala Novel Premchand Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Fifty Shades Of Gray in Hindi Pdf Download कर सकते हैं।

 

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Nirmala Novel Premchand Pdf Download

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

विवेक ने उसे उठाकर देखा तो हैरान रह गया उसके जितना तो प्रतिशत 6वी से लेकर 9वी तक कभी भी विवेक और नरेश का भी नहीं था। विवेक ने उसे समझाते हुए कहा – सुधीर जैसे रजनी तुम्हे करीब से जानती है उसी तरह मैं भी नरेश को बहुत करीब से जानता हूँ। वह किसी बात की उधेड़ बुन में लगा रहा होगा इसी कारण से उसने तुम्हे मीठी सी झिड़की दे दिया अन्यथा वह बहुत ही बुद्धिमान और अच्छा लड़का है।

 

 

 

 

सुधीर अपनी कक्षा में दूसरे नंबर पर ही आया था तथा रजनी भी कक्षा 6 में दूसरे नंबर पर थी इन दोनों ने तो जैसे नंबर दो पर अपना ही एक छत्र अधिकार कर रखा था। अगर कोई कहता कि तुम लोग थोड़ा सा और मेहनत करो तो नंबर एक पर आ सकते हो।

 

 

 

 

तो सुधीर कहता कि नंबर एक पर और नंबर तीन हम लोगो ने दूसरे के लिए छोड़ रखा है आखिर दूसरे छात्र भी पढ़ते है उन्हें भी नंबर एक औरर नंबर तीन बनना चाहिए की नहीं क्यों दीदी मैं ठीक कह रहा हूँ ना। रजनी भी सुधीर की हां में हां मिलाने लगती। सभी लोग हँसते हुए चले जाते।

 

 

 

 

अगर किसी दिन हमे लगा कि नंबर एक पोजीशन लेनी है तो उसके लिए हम लोग किसी से याचना नहीं करेंगे। छीन लेंगे और नंबर एक अवश्य बन जायेंगे। दसवीं कक्षा का परिणाम आ गया था। जैसी सबको आशा थी विवेक और नरेश दोनों ही संयुक्त रूप से नंबर एक पर ही थे।

 

 

 

 

इन दोनों के बाद ही सभी का नंबर था। अभी तो परीक्षा पास करने की खुशी सबके ऊपर सवार थी लेकिन नरेश के मन में कही टीस अवश्य थी जिसे वह अपने दोस्त विवेक से कहना चाहता था इस कारण वह अंदर से कुछ टुटा हुआ लग रहा था।

 

 

 

 

नरेश घर आ गया था। उसके मन में कई तरह के विचार चल रहे थे। इस कारण से ही उसके चेहरे पर परीक्षा पास करने की खुशी की चमक कुछ फीकी हो गयी थी। कुछ लोग सिर्फ और सिर्फ वर्तमान में ही जीना चाहते है उन्हें भविष्य से कोई सरोकार नहीं रहता है।

 

 

 

 

जबकि सच्चाई यही है वर्तमान से ही भविष्य की रूप रेखा तैयार होती है और वर्तमान में ही आने वाला भविष्य छुपा हुआ रहता है और जो अपने भविष्य का आकलन करते हुए आगे बढ़ते है वह सदैव ही सफल रहते है और भविष्य की कुछ निराशा पूर्ण तस्वीर नरेश भी देख रहा था।

 

 

 

 

परन्तु एक आशा की किरण हल्की सी दिख रही थी और इसी विषय पर वह विवेक सोनकर से बात करना चाह रहा था। राजीव प्रजापति अपने बनाये हुए मिट्टी के बर्तन को पकाने के लिए आवां लगा रहे थे और उनका साथ दे रही थी उनकी धर्मपत्नी मालती प्रजापति।

 

 

 

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