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निर्मल वर्मा की कहानियां Pdf / Nirmal verma ki kahaniyan Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Nirmal verma ki kahaniyan Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Nirmal verma ki kahaniyan Pdf download कर सकते हैं और आप यहां से Kafan Premchand pdf Hindi कर सकते हैं।

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Nirmal verma ki kahaniyan Pdf

 

 

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अंतिम अरण्य Pdf Download यहां से करे।
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मेरी प्रेम कहानियां Pdf Download यहां से करे।
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एक चिथड़ा सुख Pdf Download यहां से करे।
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कौव्वे और काला पानी Pdf Download यहां से करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये

 

 

इस प्रकार इन्होंने अपने राजनीतिक जीवन मे कई परेशानियां भी झेली. सन् 2009 के चुनाव मे न्यूज़ चेनल पर इनको प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित किया पर उस समय सत्ता मे काँग्रेस की सरकार आई और इन्हे इस मौके से हाथ धोना पढ़ा. यह राजनीति मे इनका बुरा दौर था।

 

 

 

जिसका फायदा अन्य नेताओं ने उठाया अब धीरे-धीरे पार्टी मे इनकी जगह पीछे हो रही थी. इसका असर सन् 2014 के चुनावों पर हुआ जब हर जगह नरेन्द्र मोदी आगे आये तब इन्होंने पहली बार कहा की अब पार्टी मे पहले जैसी बात नही रही।

 

 

 

तथा इन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया पर फिर एक बार राजनाथसिंह ने इनको आश्वासन दिया तथा कहा पार्टी मे आप जैसे अनुभवी लोगों की जरुरत है और इस्तीफा वापस लेने को कहा. इस प्रकार एक दौर का सामना करते हुए उन्होंने आज भी आम जनता मे अपनी बहुत अच्छी छाप छोड़ी है।

 

 

 

अटलजी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में हुआ था. उनके पिता का नाम कृष्णा बिहारी वाजपेयी और माता का नाम कृष्णा देवी था. परिवार में कुल 10 सदस्य थे जिनमे उनके 7 भाई बहन थे. अटल जी जीवनभर अविवाहित रहे।

 

 

 

अटलजी की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती स्कूल से हुई. लक्ष्मीबाई कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया इसके बाद कानपूर के के.डी.ऐ.वी (KDAV) कॉलेज से इकोनॉमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. फिर वे आर.एस.एस. द्वारा प्रकाशित पत्रिका में बतौर संपादक का कार्य करने लगे और पूर्ण रूप से संघकार्य में जुट गए।

 

 

 

अटलजी एक प्रखर वक्ता और कवि भी थे. उन्होंने पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, वीर अर्जुन और दैनिक स्वदेश जैसी पत्रिकाओं में अपनी सेवाएं प्रदान की. अटल जी ने आजादी से पहले स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की।

 

 

 

इसी दौरान उनकी मुलाकात श्यामाप्रसाद मुखर्जी से हुई जो कि भारतीय जनसंघ के लीडर थे. मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय को अटल जी का राजनीतिक गुरु भी कहा जाता है। 1977 में अटल जी को जनता पार्टी की सरकार में विदेश मंत्री बनाया।

 

 

 

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु के बाद अटल जी जनसंघ के लीडर बने और पूरे भारत में पार्टी का कार्य विस्तार किया. वे 1968 से लेकर 1973 तक जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे. अटलजी ने वर्ष 1980 में लालकृष्ण आडवाणी और भैरवसिंह शेखावत के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की स्थापना की और पार्टी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. पार्टी के विस्तार के लिए पूरे भारत में संपर्क साधने का काम किया।

 

 

 

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