RatRating Nath Sampradaya Books Pdf in Hindi / श्री नाथ संप्रदाय बुक्स पीडीएफ फ्री

Nath Sampradaya Books Pdf in Hindi / श्री नाथ संप्रदाय बुक्स पीडीएफ फ्री

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Nath Sampradaya Books Pdf in Hindi

 

 

 

 

 

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नाथ सम्प्रदाय के बारे में 

 

 

 

भारत देश अपनी विविधता के लिए पूरे विश्व में विख्यात है। यहां ऋषि मुनियो के अनेक पंथ और सम्प्रदाय मिलते है। उन्ही में से एक नाथ सम्प्रदाय भी है जो भारतीय पंथ समुदाय में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उत्तर प्रदेश का गोरक्ष नाथ मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है जहां के महंथ बाबा गोरखनाथ है।

 

 

 

‘गोरक्ष नाथ’ के नाम पर ही उत्तर प्रदेश के एक जिला का नामकरण हुआ है। नाथ सम्प्रदाय के आदि गुरु भगवान (भोलेनाथ) हिन्दू धर्म के त्रिदेवो में से एक है और हिन्दू समाज में उन्हें अतिपूजनीय स्थान प्राप्त है। नाथ सम्प्रदाय में और भी कई महात्मा हुए है जिन्होंने समाज को जगाने का कार्य किया है।

 

 

 

इस पंथ का उद्गम मध्य युग माना जाता है इसमें बौद्ध, शैव, योग की परंपराओं का समन्वय है। यह हठ परंपरा की योग पद्धति है। इसके प्रथम गुरु शिव है जो सभी के आराध्य है। इस सम्प्रदाय में तो अनेको गुरु हुए है लेकिन प्रसिद्ध के मामले में गुरु मत्स्येन्द्र नाथ (मच्छेंद्र नाथ) गोरखनाथ (गोरक्ष नाथ) सभी से अग्रणी है। इनके शिष्य में मुसलमान, बौद्ध, सिख, जैन लोग भी थे। इन लोगो को शिव का वंशज माना जाता है।

 

 

1- आदि गुरु शिव इनके पहले गुरु है।

2- मत्स्येन्द्र नाथ।

3- गोरख नाथ।

4- जालंधर नाथ।

5- कानिफ नाथ।

6- चौरंगी नाथ।

7- भर्तृहरि नाथ इत्यादि है।

 

 

1- मच्छेंद्र नाथ (मत्स्येन्द्र नाथ) –  इनके विषय में मान्यता है कि 8 वी 9 वी शदी के सिद्ध पुरुष थे जो तंत्र परंपराओं के साथ ही अपरंपराओ का प्रयोग करते थे।

 

 

2- गोरख नाथ – गोरख नाथ निर्गुण विचारो के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने हठ योग के ग्रंथो की रचना की थी। इनका जन्म 10 वी या 11 वी शताब्दी में हुआ था और नाथ सम्प्रदाय के मठवादी संस्थापक थे।

 

 

 

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