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Narayan Dutt Shrimali Books Pdf Free Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Narayan Dutt Shrimali Books Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Narayan Dutt Shrimali Books Pdf free Download कर सकते हैं और आप यहां से  फाइव पॉइंट समवन pdf download कर सकते हैं।

 

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Narayan Dutt Shrimali Books Pdf Free

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

अगर उन्हें यहां पर सहूलियत नहीं रहती तब वह यहां पर क्यों कार्य करती? इतना तो आपको अवश्य समझना चाहिए था अब मैं आपको कार्य के लिए बाध्य नहीं करूँगा आप जा सकती है। इतना कहकर कार्तिक फिर कम्पनी और दुकान की फाइलों में उलझ गया।

 

 

 

कार्तिक की साफगोई से रचना और प्रिया दोनों संतुष्ट थी। कार्तिक ने उन दोनों को जाने के लिए कह दिया था। इसलिए अब बात को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी प्रिया मोहंथी के ऊपर आ गयी थी। प्रिया ने बात करने की गरज से गला साफ करते हुए कहा कार्तिक जी हम लोग जा रहे है। किसने आपको रोका है कार्तिक ने कहा।

 

 

 

प्रिया बोली आपकी स्पष्ट बात करने की आदत ने हमे रोक रखा है। कार्तिक बोला तो मैं क्या समझूं आप लोग कल से यहां कार्य करने के लिए आएंगी। प्रिया बोली यही आश्वासन तो हम भी आप से चाहते है। कार्तिक ने कहा ठीक है आप कल से आइये।

 

 

 

रचना ने कहा प्रिया कार्तिक जी से अपनी पगार के बारे में भी बात कर ले नहीं तो वह अपने नियम के पक्के आदमी कही यह न कह दे कि पगार के लिए बात नहीं हुई है। कार्तिक कहने लगा रचना जी नियम तोडा नहीं जा सकता है लेकिन उसमे ढील अवश्य दी जाती है।

 

 

 

आप दोनों की पगार पहले महीने में तीस हजार फिर आपके कार्य को देखकर दूसरे महीने से चालीस हजार हो सकती है और आप दोनों को शाम पांच बजे से आठ बजे तक यहां कार्य करना पड़ेगा क्योंकि आप दोनों ही बैंक से संबंधित है इसलिए आप दोनों को कम्पनी की तरफ से यह छूट मिल रही है।

 

 

 

रचना जी आपको दुकान और कम्पनी से संबद्ध सभी फाइलों का निस्तारण करना होगा और प्रिया जी आप कम्पनी और दुकान के सभी कर्मचारियों के कार्य का सदैव आकलन करती रहेंगी इसके लिए आपको जो भी सुविधा चाहिए कम्पनी उपलब्ध करा देगी।

 

 

 

रचना और प्रिया दोनों कार्तिक को धन्यवाद कहते हुए चली गयी। दूसरे दिन ठीक पांच बजे आकर रचना और प्रिया ने अपना कार्य संभाल लिया था दोनों को इस प्रकार के कार्य का पूर्ण अनुभव था इसलिए कम्पनी और दुकान का सभी कार्य पूर्ण रूप और सुचारु ढंग से हो रहा था।

 

 

 

कार्तिक की ऑफिस में वह सारी सुविधाये थी जो एक आधुनिक ऑफिस में होती है। कम्पनी और दुकान के सभी कर्मचारियों के ऊपर निगाह रखने के लिए दुकान और कम्पनी में कैमरे लगे हुए थे जो ऑफिस मे कम्प्यूटर से संबद्ध थे जिससे सभी कर्मचारियों की जानकारी आसानी से प्राप्त हो रही थी।

 

 

 

रचना और प्रिय दोनों ही कार्तिक से बहुत घुल-मिल गयी थी। एक बातो में ही प्रिया और रचना ने कार्तिक से पूछ ही लिया कार्तिक जी आपके माता और पिताजी कहाँ गए हुए है। कार्तिक ने उत्तर दिया वह लोग घर के लिए मालकिन ढूढ़ने गए है जो घर और दुकान तथा कम्पनी के बीच में सामंजस्य स्थापित करते हुए सुचारु रूप से देखभाल कर सके।

 

 

 

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