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10 + Nagraj Comics Pdf Hindi / नागराज कॉमिक्स Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Nagraj Comics Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Nagraj Comics Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  एल्गा – गोरस उपन्यास Pdf Download कर सकते हैं।

 

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Nagraj Comics Pdf Hindi Free Download

 

 

 

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First-Comics-of-Nagraj-Series-Book-Hindi-PDF
नागराज कॉमिक्स Pdf Download
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नागराज की कब्र Pdf Download
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नागराज की हॉन्ग - कॉन्ग यात्रा Pdf Download
नागराज की हॉन्ग – कॉन्ग यात्रा Pdf Download
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नागराज का बदला Pdf Download
नागराज का बदला Pdf Download
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नागराज और शांगो कॉमिक्स फ्री डाउनलोड 
नागराज और शांगो कॉमिक्स फ्री डाउनलोड 
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प्रलयंकारी नागराज Pdf Download
प्रलयंकारी नागराज Pdf Download
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कोबरा घाटी Pdf Download
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मैं हूँ डोगा कॉमिक्स Pdf Download
मैं हूँ डोगा कॉमिक्स Pdf Download
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 न्यूमेरो ऊनो राज कॉमिक्स pdf
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Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

हे नाथ! मैंने श्री हरि का चरित्र अपनी बुद्धि के अनुसार कही विस्तार से कही संक्षेप से कहा। हे सर्पो के शत्रु गरुण जी! श्रुतियो का यही सिद्धांत है कि सब काम भुलाकर श्री राम जी का भजन करना चाहिए। प्रभु श्री रघुनाथ जी को छोड़कर और जिसका भजन किया जाय जिनका मुझ जैसे मुर्ख पर भी स्नेह है।

 

 

 

हे नाथ! आप विज्ञान स्वरुप है, आपको मोह नहीं है। आपने तो मुझपर ही बड़ी कृपा किया है। जो आपने मुझसे शुकदेव जी, सनकादि और शिव जी के मन को प्रिय लगने वाली अति पवित्र राम कथा पूछी। संसार में घड़ी भर का पल भर का एक बार भी सत्संग दुर्लभ है।

 

 

 

हे गरुण जी! अपने हृदय में विचारकर देखिए क्या मैं श्री राम जी के भजन का अधिकारी हूँ? पक्षियों में सबसे नीच और सब प्रकार से अपवित्र हूँ। परन्तु ऐसा होने पर भी प्रभु ने मुझे सारे संसार में प्रसिद्ध करके पवित्र कर दिया यद्यपि मैं सब प्रकार से हीन और नीच हूँ तो भी मैं आज धन्य हूँ।

 

 

 

अत्यंत धन्य हूँ जो श्री राम जी ने मुझे अपना निज जन जानकर संत समागम दिया और आपसे मेरी भेट हो गयी। हे नाथ! मैंने अपनी बड़ी के अनुसार ही कहा कुछ भी छिपाया नहीं। फिर भी रघुवीर के चरित्र सागर में समान है क्या कोई उनकी थाह प्राप्त कर सकता है?

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

श्री राम जी के बहुत से गुणों का स्मरण करके सुजान भुशुण्डि जी बार-बार हर्षित होते है। जिनकी महिमा वेदो ने ‘नेति-नई’ कहकर गाया है।

 

 

 

जिनका बल, प्रताप और प्रभुत्व तथा सामर्थ्य अतुलनीय है। जिन श्री रघुनाथ जी के चरण शिव जी और ब्रह्मा जी के द्वारा पूज्य है उनकी मुझपर कृपा करना उनकी परम कोमलता है।

 

 

 

किसी का स्वभाव कही ऐसा नहीं देखता हूँ और न सुनता हूँ। अतः हे पक्षीराज गरुण जी! मैं श्री रघुनाथ जी के समान किसे समझूं? साधक, सिद्ध, जीवनमुक्त, उदासीन, विरक्त, कवि, विद्वान, रहस्य के ज्ञाता, सन्यासी, योगी, शूरवीर, बड़े तपस्वी, ज्ञानी, धर्म परायण, पंडित और विज्ञानी।

 

 

 

वह कोई भी मेरे स्वामी श्री राम जी का भजन किए बिना नहीं तर सकते। मैं उन्ही श्री राम जी को बार-बार नमस्कार करता हूँ। जिनकी शरण में जाने पर मुझ जैसे पाप राशि भी शुद्ध और पाप रहित हो जाते है। उन अविनाशी श्री राम जी को मैं नमस्कार करता हूँ।

 

 

 

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