Advertisements

Mool Vidhi Notes In Hindi Pdf Download / मूल विधि नोट्स Pdf

Advertisements

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Mool Vidhi Notes In Hindi Pdf Download देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Mool Vidhi Notes In Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Ved Prakash Sharma Hindi novel Vijay Vikas Pdf Download कर सकते हैं।

 

 

 

 

Mool Vidhi Notes In Hindi Pdf Download

 

 

 

Advertisements
Mool Vidhi Notes In Hindi Pdf Download
Mool Vidhi Notes In Hindi Pdf Download यहां से करे।
Advertisements

 

 

 

 

 

 

 

Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

इस तरह यह जगत शिव शक्ति स्वरुप ही है। नाद बिंदु का और बिंदु इस जगत का आधार है। ये बिंदु और नाद सम्पूर्ण जगत के आधार स्वरुप से स्थित है। बिंदु और नाद से एक्ट सब कुछ विश्व स्वरूप है। आधार में ही आधेय का समावेश अथवा लय होता है। यही सकलीकरण है।

 

 

 

इस सकलीकरण की स्थिति से ही सृष्टिकाल में जगत का प्रादुर्भाव होता है इसमें संशय नहीं है। शिव लिंग बिंदु नाद स्वरुप है। अतः उसे जगत का कारण बताया जाता है। बिंदु देव है और नाद शिव। इन दोनों का संयुक्तरूप ही शिव लिंग कहलाता है।

 

 

 

 

अतः जन्म के संकट से छुटकारा पाने के लिए शिव लिंग की पूजा करनी चाहिए। बिन्दुरूपा देवी उमा माता है और नाद स्वरुप भगवान शिव पिता। इन माता-पिता के पूजित होने से परमानंद की ही प्राप्ति होती है। अतः परमानंद का लाभ लेने के लिए शिव लिंग का विशेष रूप से पूजन करे।

 

 

 

 

देवी उमा जगत की माता है और भगवान शंकर जगत के पिता। जो इनकी सेवा करता है उस पुत्र पर इन दोनों माता-पिता की कृपा नित्य अधिकाधिक बढ़ती रहती है। वह पूजक पर कृपा करके उसे अपना आतंरिक ऐश्वर्य प्रदान करते है। अतः मुनीश्वरो! आतंरिक आनंद की प्राप्ति के लिए शिव लिंग को माता-पिता का स्वरुप मानकर उसकी पूजा करनी चाहिए।

 

 

 

 

भर्ग पुरुषरूप है और भर्गा प्रकृति कहलाती है। अव्यक्त आतंरिक अधिष्ठान रूप गर्भ को पुरुष कहते है और सुव्यक्त आतंरिक अधिष्ठान भूत गर्भ को प्रकृति। पुरुष आदिगर्भ है वह प्रकृतिरुप गर्भ से युक्त होने के कारण गर्भवान है क्योंकि वही प्रकृति का जनक है।

 

 

 

 

प्रकृति में जो पुरुष का संयोग होता है यही पुरुष से उसका प्रथम जन्म कहलाता है। अव्यक्त प्रकृति से महत्तत्त्वादि के क्रम से जो जगत का व्यक्त होना है यही उस प्रकृति का द्वितीय जन्म कहलाता है। जीव पुरुष से ही बारंबार जन्म और मृत्यु को प्राप्त होता है।

 

 

 

 

माया द्वारा अन्य रूप से प्रकट किया जाना ही उसका जन्म कहलाता है। जीव का शरीर जन्म काल से ही जीर्ण होने लगता है इसीलिए उसे जीव संज्ञा दी गयी है। जो जन्म लेता और विविध पाशो द्वारा तनाव में पड़ता है उसका नाम जीव है। जन्म और बंधन जीव शब्द का अर्थ ही है।

 

 

 

 

अतः जन्म मृत्यु रूपी बंधन की के लिए जन्म के अधिष्ठान भूत मातृ पितृ स्वरुप शिव लिंग का पूजन करना चाहिए। गाय का दही, गाय का दूध और गाय का घी इन तीनो को पूजन के लिए शहद और शक्कर के साथ पृथक-पृथक भी रखे और इन सबको मिलाकर सम्मिलित रूप से पंचामृत भी तैयार कर ले।

 

 

 

 

मित्रों यह पोस्ट Mool Vidhi Notes In Hindi Pdf Download आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें और Mool Vidhi Notes In Hindi Pdf Download की तरह की पोस्ट के लिये इस ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें और इसे शेयर भी करें।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!