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Mirza Ghalib Shayari Pdf Free Download / मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी Pdf

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मित्रों इस पोस्ट में Mirza Ghalib Shayari Pdf Free दिया जा रहा है। आप नीचे की लिंक मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी Pdf फ्री डाउनलोड कर सकते हैं।

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Mirza Ghalib Shayari Pdf Free 

 

 

 

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Mirza Ghalib Shayari Pdf Free Download
मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी Pdf यहाँ से डाउनलोड करें। 
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Mirza Ghalib Books in Hindi Pdf Download
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Hindi Kahani 

 

 

रामू के पास एक बैल और एक गाय थी। बैल का नाम रामू ने शेरा रखा था क्योंकि वह बैल बहुत विशालकाय और वलिष्ट था। गाय का नाम रामू ने लक्ष्मी रखा था।

 

 

 

 

वह लक्ष्मी की तरह ही अपने दूध से रामू की अर्थव्यवस्था को संवार रही थी। लेकिन इस समय लक्ष्मी गर्भवती थी। एक दिन रामू के पास रमेश नाम का आदमी आया और उसके बैल शेरा को रामू से मांगने लगा।

 

 

 

रमेश कहने लगा, “तुम अपने बैल को हमारे साथ कर दो या तुम अपने बैल को लेकर हमारे साथ चलो। बगल वाले गांव में एक प्रतियोगिता होने वाली है। वह प्रतियोगिता मंगल का बैल हर बार जीतता है। लेकिन इस बार मैं उसे हरा कर सबक सीखना चाहता हूँ। हर बार विजेता होने के कारण मंगल को घमंड हो गया है और इस बार मैं उसका घमंड अवश्य ही तोडूंगा। इसके लिए हमे तुम्हारी और शेरा की सहायता चाहिए।”

 

 

 

 

रामू ने कहा, “लेकिन हमारा बैल तो प्रशिक्षित नहीं है। ऊपर से उसके ऊपर वजन रखकर दौड़ना पड़ेगा।”

 

 

 

रमेश ने कहा, “तुम इसकी चिंता मत करो, यह काम मैं कर लूंगा।”

 

 

 

रमेश के पास चार दिन का समय था। रमेश ने रामू के बैल शेरा को अपनी देख-रेख में अच्छी तरह से प्रशिक्षित कर दिया था। तय समय पर सभी प्रतियोगी बैल एक स्थान पर लाए गए। उनकी पीठ पर वजन बांधकर रखा हुआ था।

 

 

 

 

बैल को रेलगाड़ी के साथ तीन किलोमीटर तक दौड़ना था। मंगल को विश्वास था कि हर बार की तरह उसका ही बैल जीतने वाला है। बैलो की दौड़ शुरू हो गई रेलगाड़ी की रफ्तार भी बढ़ गई। थोड़ा सा पीछे रहने पर भीमा का बैल मंगल के बैल की बराबरी पर आ गया था।

 

 

 

फैसला नहीं हो सका था। पुनः दूसरे दिन दौड़ शुरू हुई। इस बार रामू का बैल मंगल के बैल पर भारी पड़ गया, वह मंगल के बैल को पछाड़ते हुए कई मील आगे बढ़ गया था। रामू का बैल विजेता घोषित हो गया था। रामू को दस हजार रुपये का इनाम मिला था।

 

 

 

 

अगले वर्ष फिर दौड़ शुरू होने वाली थी। दौड़ शुरू होने के एक दिन पहले ही रामू का बैल मर गया था। रामू बहुत दुखी था। तभी उसकी गाय लक्ष्मी ने उसे बताया कि रात के समय कोई शेरा को कुछ खिलाकर चला गया। कुछ देर बाद शेरा ने दम तोड़ दिया।

 

 

 

मैं रभाती रह गई। अगर तुम हमारी आवाज सुनकर बाहर आ जाते तब शेरा की जान अवश्य बच जाती। लक्ष्मी बोली, “मैं शेरा की मौत का बदला अवश्य ही लूंगी तुम हमे बैल की दौड़ में ले चलो।”

 

 

 

रामू अपनी गर्भवती गाय को बैल की दौड़ में ले गया तो यह देखकर मंगल का बैल कालिया हसने लगा और बोला, “तुम हमारे सामने कैसे दौड़ोगी ? हमारे सामने तो कई धुरंधर बैल हार जाते है।”

 

 

 

तब लक्ष्मी ने उसे सारी कहानी बता दिया किस तरह से शेरा की मौत हुई है। तब कालिया ने लक्ष्मी की सहायता का वचन दिया। दौड़ शुरू हुई, कालिया एकदम धीरे-धीरे दौड़ते हुए लक्ष्मी को आगे निकलने का मार्ग दिया।

 

 

 

दौड़ समाप्त होने पर लक्ष्मी गाय विजेता घोषित हुई। मंगल हैरान था। उसने कालिया से पूछा, “तुम एक गाय से कैसे हार गए ?”

 

 

 

कालिया ने कहा, “मैं हारा नहीं हूँ मैंने तुम्हे सबक सिखाया है। तुमने शेरा नामक हमारे साथी को अपने स्वार्थ के लिए मार डाला इसलिए मैंने तुम्हे पराजय के रूप में सबक सिखाया है।”

 

 

 

सभी की निगाहो में मंगल नीचे गिर गया था। उसने प्रायश्चित के तौर पर अपने बैल कालिया को रामू के हवाले कर दिया और वहां से चला गया। रामू लक्ष्मी और कालिया के साथ दस हजार का नगद पुरस्कार लेकर घर आ गया।

 

 

 

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