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Mirza Galib Shayari in Hindi Pdf Free / मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी पीडीएफ फ्री

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मित्रों इस पोस्ट में Mirza Galib Shayari in Hindi Pdf दिया गया है। आप नीचे की लिंक से मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी इन हिंदी पीडीएफ फ्री डाउनलोड  कर सकते हैं और आप यहां से अरुंधति रॉय बुक्स हिंदी पीडीएफ फ्री पढ़ सकते हैं।

 

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Mirza Galib Shayari in Hindi Pdf

 

 

 

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Mirza Ghalib Books in Hindi Pdf Download
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Mirza Galib Apani Shayari Ke Liye Bahut Hi Vikhyat The. Unhe Apani Shayari Ke Karan Bahut Pahchan Mili Thi. Unhe “Nazm-Ud-Daula” Ke Khitab Se Nawaza Gaya Tha. 

 

 

 

Mirza Galib Ka Adhikansh Samay Aagara, Dilli, Kalkatta (kolakata) Me Bita Tha. Mirza Galib Ka Poora Naam Mirza Asdullah Beg Khan Tha. We Urdu Ke Mahan Shayar The Aur Farasi Bhasha Par Bhi Inki Pakad Adwitiy Thi. 

 

 

 

ज्यादा चालाकी नुकसानदेह होती है हिंदी कहानी 

 

 

 

 

किसनपुर गांव में रामू किसान अपनी पत्नी प्रिया और पुत्र गोपी के साथ आनंद पूर्वक रहता था। खेती बारी से उत्पन्न आमदनी से रामू का जीवन आनंद  बीत रहा था। रामू का लड़का बहुत ही नटखट स्वभाव का था और चतुर भी था।

 

 

 

रामू के पास आम का एक छोटा सा बागीचा भी था। एक दिन गोपी आम के पेड़ पर चढ़कर पके हुए आमों को तोड़ रहा था। गोपी की माँ ने पूछा, “तुम इतने आम का क्या करोगे ?”

 

 

गोपी ने कहा, “मैं इन्हे जंगल के रास्ते से जल्दी से जाकर बाजार में बेच आऊंगा।” यह कहते हुए उसने आम को एक टोकरी में भरा और जंगल के रास्ते चल दिया। गोपी को उसकी माँ ने समझाया कि जंगल में चोर लुटेरे रहते है, लेकिन गोपी को अपने ऊपर भरोसा था।

 

 

 

 

वह जंगल में पहुंचा ही था सामने देखा तो दो मोटे – मोटे आदमी बैठे थे। उनका नाम छोटू और शेरा था। रामू को अपनी ओर आता देख छोटू ने  शेरा से कहा, “वो सामने देखो सरदार, आपका शिकार आ रहा है और उसके हाथ में आम से भरी हुई टोकरी भी है।”

 

 

 

 

” ठीक है आज आम खाने को मिलेगें। ”  गोपी को सामने देखकर  शेरा ने कहा। गोपी के नजदीक आने पर वह रोने का नाटक करते हुए बोला, “हम लोग दो दिन से भूखे है खाने को कुछ नहीं मिला है।  ” इसपर गोपी ने शेरा से कहा, “क्या मैं आपकी कोई सहायता कर सकता हूँ ?”

 

 

 

 

शेरा ने गोपी से पूछा, “तुम आम लेकर कहाँ जा रहे हो ? ”

 

 

 

गोपी ने शेरा से कहा, “मैं यह आम बाजार में बेचने जा रहा हूँ अगर तुम हमारी सहायता करो तो आम का पूरा  पैसा हम दोनों आपस में बाँट लेंगे।” यह कहकर गोपी ने दो आम छोटू और शेरा को भी दिए। उन दोनों ने आम को खाया तो उन्हें वह आम बहुत मीठा लगा।

 

 

फिर शेरा ने गुस्से से छोटू से कहा, “आम की टोकरी सर पे उठाकर बाजार की तरफ चल। ”  छोटू शेरा में आये इस अचानक परिवर्तन से हैरान था, लेकिन डर के मारे आम की टोकरी अपने सर पर रख ली और बाज़ार की तरफ चल पड़ा। ”

 

 

 

 

बाजार पहुंचने पर आम बेचने की जिम्मेदारी गोपी की थी। ” जादुई आम ले लो -जादुई आम ले लो ” गोपी हाँक लगाने लगा। उस पके आम को राजा का मंत्री देख रहा था, उससे रहा नहीं गया। उसने नजदीक आकर गोपी से पूछा, “आम के पूरी टोकरी की कितनी कीमत है?”

 

 

 

गोपी ने कहा, “तीस स्वर्ण मुंद्रा ”

 

 

 

इसपर मंत्री ने गोपी से पूछा, ” इतना महंगा आम इसमें क्या विशेषता है ?”

 

 

 

फिर गोपी ने मंत्री से कहा, “इसमें तीन आम में स्वर्ण  है सभी आम एक ही रंग के होने से पहचाचना मुश्किल है इसलिए आपको पूरी टोकरी लेनी होगी। आप घर ले जाकर उन तीनो आम की पहचान कर सकते है।”

 

 

 

 

 

मंत्री खुश हो गया और गोपी को तीस स्वर्ण मुद्रा देकर पूरी टोकरी का आम खरीद लिया। गोपी की चतुराई को देखकर शेरा और छोटू चकित रह गए।

 

 

 

 

गोपी को लेकर शेरा और छोटू जंगल में आ गए। शेरा ने गोपी से पूरा पैसा लेकर बराबर – बराबर बटवारा कर दिया। गोपी छोटा होने के कारण कुछ बोल न सका, लेकिन छोटू से रहा नही गया।

 

 

 

 

छोटू ने शेरा से कहा, “मैं आम की टोकरी भी सर पे उठाकर बाजार ले गया और मेहनत भी सबसे ज्यादा मैंने ही किया, इसलिए हमें पंद्रह स्वर्ण मुद्रा चाहिए।” इसी बात को लेकर दोनों आपस में उलझ गए और गोपी तो जैसे इसी अवसर की प्रतीक्षा कर रहा था। उसने तीस स्वर्ण मुद्रा उठाई और वहां से नौ दो ग्यारह हो गया।

 

 

 

 

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