Meditation Book in Hindi Pdf / मेडिटेशन बुक इन हिंदी Pdf

नमस्कार मित्रों, आज हम इस पोस्ट में आपको Meditation Book in Hindi Pdf देने जा रहे हैं। आप नीचे की लिंक से Meditation Book in Hindi Pdf Download कर सकते हैं।

 

 

 

Osho Meditation Book in Hindi Pdf / मेडिटेशन बुक इन हिंदी Pdf Download

 

 

 

1- Vipassana Meditation Book in Hindi Pdf 

 

2- Osho meditation Book in Hindi Pdf

 

3- Meditation and its Methods book Pdf in Hindi

 

4- मेडिटेशन बुक इन हिंदी Pdf

 

 

 

 

 

 

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कृष्ण को समझना (केवल भक्ति मार्ग) – भगवान कह रहे है – हे अर्जुन ! तुम अपने दिव्य नेत्रों से जिस रूप का दर्शन कर रहे हो उसे न तो वेदाध्ययन, न कठिन तपस्या से, न पूजा से ही जाना जा सकता है। कोई भी इन सब साधनो के द्वारा मुझे मेरे इस रूप में नहीं देख सकता है।

 

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – कृष्ण पहले अपनी माता देवकी तथा पिता वसुदेव के समक्ष चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए थे और तब उन्होंने अपना द्विभुज रूप धारण किया था।

 

 

 

 

जिन विद्वानों ने केवल व्याकरण विधि से या कोरी शैक्षिक योग्यताओ के आधार पर वैदिक साहित्य का अध्ययन किया है वह लोग कृष्ण को नहीं समझ सकते है।

 

 

 

 

जो लोग नास्तिक है या भक्ति विहीन है उनके लिए तो इस रहस्य को समझ पाना एकदम अत्यंत ही कठिन है। जो लोग औपचारिक पूजा करने के लिए मंदिर जाते है उन्हें भी कृष्ण को समझना दुष्कर कार्य है।

 

 

 

 

भले ही वह लोग मंदिर जाते रहे, वह कृष्ण के असली रूप को कभी नहीं समझ सकेंगे। कृष्ण को तो केवल भक्ति मार्ग से ही समझा जा सकता है। जैसा कि कृष्ण ने स्वयं अगले श्लोक में बताया है।

 

 

 

 

अर्जुन का शांत चित्त से अपना इच्छित रूप देखना – भगवान कह रहे है – तुम मेरे इस भयानक रूप को देखकर विचलित एवं मोहित हो गए हो।

 

 

 

 

अब इसे समाप्त करता हूँ। हे मेरे भक्त ! तुम समस्त चिंताओं से पुनः मुक्त हो जाओ। तुम शांत चित्त से अब अपना इच्छित रूप देख सकते हो।

 

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – भगवद्गीता के आरम्भ में अर्जुन अपने पूज्य पितामह भीष्म, गुरु द्रोण के वध के विषय में चिंतित था।

 

 

 

 

 

किन्तु कृष्ण ने कहा उसे अपने पितामह का वध करने से डरना नहीं चाहिए। कृष्ण ने अर्जुन को अपने विश्व रूप का दर्शन यह दिखाने के लिए कराया था कि अपने कुकृत्यों के कारण यह लोग पहले ही मारे जा चुके है।

 

 

 

 

क्योंकि जब कौरवो की सभा में धृतराष्ट्र के पुत्र द्रोपदी को विवस्त्र करना चाह रहे थे तो भीष्म तथा द्रोण मौन थे। अतः किंकर्तव्य मूढ़ होने के कारण ही इनका वध होना चाहिए।

 

 

 

 

विश्व रूप दिखलाने का अभिप्राय स्पष्ट हो चुका था। यह दृश्य अर्जुन को इसलिए दिखलाया गया क्योंकि भक्त शांत होते है और जघन्य कर्म नहीं कर सकते है।

 

 

 

 

अब अर्जुंन कृष्ण के चतुर्भुज रूप को देखना चाह रहा था। अतः कृष्ण ने अपने भक्त अर्जुन को यह रूप दिखलाया। भक्त कभी भी विश्व रूप देख़ने में रूचि नहीं लेता है क्योंकि इससे प्रेमानुभूति का आदान-प्रदान नहीं हो सकता है।

 

 

 

 

भक्त या तो अपना पूजा भाव अर्पित करना चाहता है या दो भुजाओ वाले कृष्ण का दर्शन करना चाहता है। जिससे वह भगवान के साथ अपनी प्रेमाभक्ति का आदान-प्रदान कर सके।

 

 

 

 

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