Advertisements

Mantra Sagar Pdf / मंत्र सागर Pdf

Advertisements

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Mantra Sagar Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Mantra Sagar Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Vrat Katha Book In Hindi Pdf कर सकते हैं।

 

 

 

Mantra Sagar Pdf Download

 

 

 

Advertisements
Mantra Sagar Pdf
Mantra Sagar Pdf यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

Advertisements
Mantra Sagar Pdf
Hanuman Vadvanal Stotra Pdf यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

 

 

 

 

Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

अपने सेवक को दिया हुआ दान एक चौथाई फल देने वाला होता है। विप्रवरो! जो जातिमात्र से ब्राह्मण है और दीनतापूर्ण वृत्ति से जीवन बिताता है उसे दिया हुआ धन का दान दाता को इस धरती पर दस वर्षो तक भोग प्रदान करने वाला होता है।

 

 

 

 

वही दान अगर वेदवेत्ता ब्राह्मणो को दिया जाय तो वह स्वर्गलोक में देवताओ के वर्ष से दस वर्षो तक दिव्य भोग देने वाला होता है। शिल और उच्छ वृत्ति से लाया हुआ और गुरु दक्षिणा में प्राप्त हुआ अन्न धन शुद्ध द्रव्य कहलाता है। उसका दान दाता को पूर्ण फल देने वाला बताया गया है।

 

 

 

 

क्षत्रियो का शौर्य कमाया हुआ, वैश्यों का व्यापार से आया हुआ धन भी उत्तम द्रव्य कहलाता है। धर्म की इच्छा रखने वाली स्त्रियों को जो धन पिता एवं पति से मिला हुआ हो उनके लिए वह उत्तम द्रव्य है। गौ आदि बारह वस्तुओ का आदि बारह महीनो में क्रमशः दान करना चाहिए।

 

 

 

 

गौ, तिल, वस्त्र, भूमि, सुवर्ण, घी, धान्य, नमक, गुड़, कोहड़ा, चांदी और कन्या ये ही बारह वस्तुए है। इनमे गोदान से कायिक, मानसिक और वाचिक पापो का निवारण तथा कायिक आदि पुण्य कर्मो की पुष्टि होती है। ब्राह्मणो! भूमि का दान परलोक और इहलोक में प्रतिष्ठा की प्राप्ति कराने वाला है।

 

 

 

 

तिल का दान मृत्यु का निवारक होता है। सुवर्ण का दान जठराग्नि को बढ़ाने वाला है। घी का दान पुष्टि कारक होता है। वस्त्र का दान आयु की वृद्धि कराने वाला होता है ऐसा जानना चाहिए। धान्य का दान अन्न धन की समृद्धि में कारण होता है।

 

 

 

 

गुड़ का दान मधुर भोजन की प्राप्ति कराने वाला होता है। सब प्रकार का दान सारी समृद्धि की सिद्धि के लिए होता है। विज्ञ पुरुष कुष्मांड के दान को पुष्टिदायक मानते है। कन्या का दान आजीवन भोग देने वाला कहा गया है। ब्राह्मणो! वह लोक और परलोक में भी सम्पूर्ण भोगो की प्राप्ति कराने वाला है।

 

 

 

 

विद्वान पुरुष को चाहिए कि जिन वस्तुओ से श्रवण आदि इन्द्रियों की तृप्ति होती है उनका हमेशा दान करे। श्रोत्र आदि दस इन्द्रियों के जो शब्द आदि दस विषय है उनका दान किया जाय तो वे भोगो की प्राप्ति कराते है तथा दिशा आदि इन्द्रिय देवताओ को संतुष्ट करते है।

 

 

 

 

वेद और शास्त्र को गुरुमुख से ग्रहण करके गुरु के उपदेश से अथवा स्वयं ही बोध प्राप्त करने के पश्चात जो बुद्धि का यह निश्चय होता है कि कर्मो का फल अवश्य मिलता है इसी को उच्चकोटि की आस्तिकता कहते है। भाई बंधु अथवा राजा के भय से जो आस्तिकता श्रद्धा या बुद्धि होती है वह कनिष्ठ श्रेणी की आस्तिकता है।

 

 

 

 

जो सर्वथा दरिद्र है इसलिए जिसके पास सभी वस्तुओ का अभाव है वह वाणी अथवा कर्म द्वारा यजन करे। स्तोत्र, मंत्र और जप आदि को वाणी द्वारा किया गया यजन समझना चाहिए तथा तीर्थ यात्रा और व्रत आदि को विद्वान पुरुष शारीरिक यजन मानते है।

 

 

 

 

मित्रों यह पोस्ट Mantra Sagar Pdf आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें और Mantra Sagar Pdf की तरह की पोस्ट के लिये इस ब्लॉग को सब्सक्राइब जरूर करें और इसे शेयर भी करें।

 

 

 

Leave a Comment

error: Content is protected !!