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मंत्र महोदधि Pdf / Mantra mahodadhi pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Mantra mahodadhi pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Mantra mahodadhi pdf download कर सकते हैं और आप यहां से Aalha Khand Pdf Free कर सकते हैं।

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Mantra mahodadhi pdf

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

लाल कृष्ण आडवाणी, भारतीय जनता पार्टी की नीव के पत्थर मे से एक है अर्थात भारतीय जनता पार्टी(BJP) की शुरुआत मे इनका महत्वपूर्ण योगदान है. ये सन् 1991 से बीजेपी से जुड़े तथा आज वरिष्ट नेता मे सबसे पहले इनकी गिनती होती है इनके परामर्श के बिना कोई कार्य नही होता।

 

 

 

इन्होंने पार्टी के हित मे बहुत कार्य किये तथा बहुत से नये कामों की शुरुवात करी. राजनीति मे बहुत उम्दा कार्य करने के लिये सन् 2015 मे इनको पद्म विभूषण से नवाजा गया था. इनका जन्म सिंधी हिन्दू समाज मे, 8 सन् 1927 को कराची (वर्तमान मे पाकिस्तान का एक बड़ा शहर) मे हुआ था।

 

 

 

इनके परिवार मे सभी शिक्षित होने की वजह से बचपन से इनको वैसा ही माहोल मिला. यह शुरू से एक मेधावी छात्र रहे थे. इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट पैट्रिक हाई स्कूल, कराची से की थी यह एक नामी-ग्रामी स्कूल था. बाद मे इन्होने हैदराबाद (सिंध) नेशनल कोलीजीऐट बोर्ड तथा गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, बॉम्बे से अपनी वकालत की शिक्षा हासिल करी। आडवाणी जी  एक बहुत ही संपन्न परिवार से थे।

 

 

 

इनका बड़ा संयुक्त परिवार था जिसमे इनके दादा-दादी, माता-पिता तथा पिता के भाई और उनके बच्चे साथ रहते थे. इनके दादा जी उस समय मे संस्कृत के विद्वान तथा सरकारी स्कूल के प्राचार्य थे. परिवार का हर एक सदस्य किसी ना किसी पद या व्यापार मे कार्यरत थे। एक इंटरव्यू के दौरान इन्होंने कहा था इनके कुल काका-ताऊ के मिलाकर 24 भाई-बहन है जिनके साथ रह कर यह बड़े हुए है।

 

 

 

इनके बचपन की बहुत सारी यादे है क्यों कि इनके जन्म के समय देश का विभाजन नही हुआ था पर जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो इनके परिवार के दो हिस्से हो गये जिनमे कुछ पाकिस्तान मे रह गये तथा कुछ भारत मे विभाजन के कारण इनको अपने परिवार से बिछड़ना पड़ा जों इनके लिए एक क्षति के सामान ही था. परिवार जरुर विभाजित हुआ था।

 

 

 

पर इनके दिल से अपने परिवार की यादें नही गई थी. इनका पच्चीस फरवरी सन् उन्नीस सौ पैसठ में विवाह हुआ था, इस विवाह से इनके दो बच्चे है. इन्होंने मात्र पन्द्रह वर्ष की उम्र मे सबसे पहली बार सन् 1942 मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य के रूप मे कार्य शुरू किया।

 

 

 

इन्होंने पूरे जोश के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मे अपना योगदान दिया तथा जगह-जगह इसके केन्द्र खुले तथा लोगों को इससे जोड़ा. इन्होंने शुरुवाती दौर से ही बहुत अच्छा कार्य किया जिससे राजनीति मे भी इनकी छवि बहुत अच्छी बनी तथा साल दर साल इन्होंने राजनीति जैसे क्षेत्र मे काम कर एक अलग मुकाम हासिल किया. इनके राजनीतिक जीवन का संक्षिप्त ब्यौरा इस प्रकार है।

 

 

 

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