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मैं मृत्यु सिखाता हूँ Pdf / Main Mrityu Sikhata hun Osho pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Main Mrityu Sikhata hun Osho pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Main Mrityu Sikhata hun Osho pdf download कर सकते हैं और आप यहां से Namami Shamishan Pdf Hindi कर सकते हैं।

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Main Mrityu Sikhata hun Osho pdf

 

 

पुस्तक का नाम  Main Mrityu Sikhata hun Osho pdf
पुस्तक के लेखक  ओशो 
फॉर्मेट  Pdf 
भाषा  हिंदी 
साइज  2 Mb 
पृष्ठ  294 
श्रेणी  Social

 

 

 

मैं मृत्यु सिखाता हूँ Pdf Download

 

 

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Main Mrityu Sikhata hun Osho pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

उस अत्यंत भयंकर शोर को सुनकर सभी देवता निर्भय ही बने रहे। वे एक साथ मिलकर तारकासुर से लोहा लेने के लिए डटकर खड़े हो गए। उस समय देवराज इंद्र कुमार को गजराज पर बैठाकर सबसे आगे खड़े हुए। वे लोकपालों से घिरे हुए थे और उनके साथ देवताओ की महती सेना थी।

 

 

 

तत्पश्चात कुमार ने गजराज को तो महेंद्र को ही दे दिया और वे स्वयं एक ऐसे विमान पर आरूढ़ हो गए जो परमाश्चर्यजनक तथा नाना प्रकार के रत्नो से सुशोभित था। उस समय वह विमान पर सवार होने से सर्वगुणसम्पन्न महायशस्वी शंकर पुत्र कुमार उत्कृष्ट शोभा से संयुक्त होकर सुशोभित हो रहे थे।

 

 

 

प्रकाशमान परम प्रकाशमान चंवर डुलाये जा रहे थे। इसी बीच बलाभिमानी एवं महावीर देवता और दैत्य क्रोध से विह्वल होकर परस्पर युद्ध करने लगे। उस समय देवताओ और दैत्यों में बड़ा घमासान युद्ध हुआ। क्षण भर में ही सारी रणभूमि रुण्ड मुंडो से व्याप्त हो गयी।

 

 

 

तब महाबली तारकासुर बहुत बड़ी सेना के साथ देवताओ से युद्ध करने के लिए वेगपूर्वक आगे बढ़ा। उस रणदुर्मद तारक को युद्ध की कामना से आगे बढ़ते देखकर इंद्र आदि देवता तुरंत ही उसके सामने आये। फिर तो दोनों सेनाओ में महान कोलाहल होने लगा।

 

 

 

तत्पश्चात देवो तथा असुरो का विनाश करने वाला ऐसा द्वंद्वयुद्ध प्रारंभ हुआ जिसे देखकर वीर लोग हर्षोत्फुल्ल हो गए और कायरो के मन में डर समा गया। इसी समय वीरभद्र कुपित होकर महाबली प्रमथगणो के साथ वीराभिमानी तारक के निकट आ पहुंचे।

 

 

 

वे बलवान गणनायक भगवान शिव के कोप से उत्पन्न हुए थे अतः समस्त देवताओ को पीछे करके युद्ध की अभिलाषा से तारक के सम्मुख डट गए। उस समय प्रमथगणो तथा सारे असुरो के मन में परमोल्लास था अतः वे उस महासमर में परस्पर गुत्थमगुत्थ होकर जूझने लगे।

 

 

 

तदनन्तर वीरभद्र से तारक का भयानक युद्ध हुआ। इसी बीच असुरो की सेना रण से विमुख हो भाग चली। इस प्रकार अपनी सेना को तितर बितर देख उसका नायक तारकासुर क्रोध से भर गया और दस हजार भुजाये  सिंह पर बैठकर देवगणो को मार डालने के लिए वेग पूर्वक उनकी ओर झपटा।

 

 

 

वह युद्ध के मुहाने पर देवो तथा प्रमथगणो को मार-मारकर गिराने लगा। तब प्रमथगणो के नेता महाबली वीरभद्र उसके उस कर्म को देखकर उसका वध करने के लिए अत्यंत कुपित हो उठे। फिर तो उन्होंने भगवान शिव के चरण कमल का ध्यान करके एक ऐसा श्रेष्ठ त्रिशूल हाथ में लिया जिसके तेज से सारी दिशाए और आकाश प्रकाशित हो उठे।

 

 

 

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