Mahalaxmi calendar 2022 Pdf Hindi / महालक्ष्मी कैलेंडर 2022 Pdf

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Mahalaxmi calendar 2022 Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Mahalaxmi calendar 2022 Pdf Free Download कर सकते हैं और आप यहां से  दुर्गा चालीसा पाठ हिंदी में Pdf भी पढ़ सकते हैं।

 

 

 

Mahalaxmi calendar 2022 Pdf / महालक्ष्मी कैलेंडर 2022 पीडीएफ 

 

 

 

महालक्ष्मी कैलेंडर 2022 Pdf Download

 

 

 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

श्री गणेश जी और त्रिपुरारी शिव जी का पूजन करके उन्होंने सभी ब्राह्मणो को बहुत सा दान दिया, वह ऐसे खुश हो रही थी जैसे जन्म भर का दरिद्र चारो पदार्थ पा लिया हो।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

 

1- सुख और महान आनंद के वशीभूत होने के कारण सभी माताओ के शरीर शिथिल हो गए है। उनके चरण तो चलते ही नहीं है। श्री राम जी के परछन के लिए वह अनुराग सहित सब सामान सजाने लगी।

 

 

 

 

2- अनेको प्रकार के सब बाजे बज रहे थे। बहुत आनंद पूर्वक सुमित्रा जी ने सब मंगल साज सजाये। हल्दी, दूध, दही, पत्ते, फूल, पान और सुपारी आदि मंगल मूल की वस्तुए।

 

 

 

 

3- तथा अक्षत, चावल, अंखुए, गोरोचन, लावा तथा सुंदर तुलसी की मंजरी सुशोभित हो रही है। नाना वरण के रंगो से चित्र युक्त सुवर्ण और सहज सुहावने कलश तो ऐसे मालूम हो रहे है मानो कामदेव के पक्षियों ने घोसला बना रखा हो।

 

 

 

 

4- सुगंध की सभी वस्तुए की बड़ाई नहीं की जा सकती है। सब रानियां संपूर्ण मंगल साज सजा रही है। बहुत प्रकार की आरती बनाकर वह आनंदित होकर सुंदर मंगल गान कर रही है।

 

 

 

 

346- दोहा का अर्थ-

 

 

 

 

परछन करने के लिए सभी माताए सोने के थाल में मांगलिक वस्तुओ को रखकर अपने कमल के समान कोमल हाथो में लेकर चली, उनका शरीर बहुत ही पुलकित हो रहा है।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

 

1- धूप के धुए से सारा आकाश सावन के बादलो की भांति काला हो गया। मानो काले बादल घुमड़ते हुए छा गए हो। सभी देवता कल्पवृक्ष की मालाये बरसा रहे है। वह ऐसी शोभायमान हो रही है मानो बगुलों की पक्तियां उन्हें अपनी ओर खींच ले रही है।

 

 

 

 

2- सुंदर मणियों से बने बंदनवार इंद्रधनु की भांति ही सुशोभित हो रहे है। अटारियों पर से श्री राम जी को देखने के लिए सुंदर और चपल स्त्रियां प्रकट होकर इस प्रकार छिप जाती है जैसे बिजली चमकते हुए छिप जाती है।

 

 

 

3- बादलो की गर्जना की भांति ही नगाड़ो की ध्वनि है। पपीहे और मोर की भांति याचक गणो का शोर है। देवता पवित्र सुगंध रूपी जल बरसा रहे है। जिससे खेती के समान नगर के सब स्त्री-पुरुष सुखी हो रहे है।

 

 

 

4- प्रवेश का समय जानकर गुरु वशिष्ठ जी ने आज्ञा दिया। तब रघुकुल मणि महाराज दशरथ जी ने शिव जी, पार्वती जी, गणेश जी का स्मरण करते हुए अपने समाज के साथ आनंदित होकर नगर में प्रवेश किया।

 

 

 

 

347- दोहा का अर्थ-

 

 

 

सुंदर शकुन हो रहे है, सभी देवता दुंदुभि बजाते हुए फूल बरसा रहे है। देवताओ की स्त्रियां आनंद के साथ सुंदर मांगलिक गीत गाते हुए नाच रही है।

 

 

 

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