Kunjika Stotram Pdf Hindi / कुंजिका स्तोत्र हिंदी Pdf

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Kunjika Stotram Hindi Pdf / सिद्ध कुंजिका स्तोत्र pdf hindi

 

 

 

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र Pdf Hindi Download

 

 

 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

सूर्य का प्रकाश परमेश्वर के आध्यात्मिक तेज का कारण – भगवान कह रहे है कि सूर्य का तेज जो सारे विश्व के अंधकार को दूर करता है। मुझसे ही निकलता है। चन्द्रमा तथा अग्नि के तेज भी मुझसे उत्पन्न है।

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – भगवद्गीता में (10,21) कहा गया है कि चन्द्रमा भी एक नक्षत्र है। सूर्योदय के साथ ही मनुष्य के सारे कार्य कलाप प्रारंभ हो जाते है।

 

 

 

 

अग्नि की सहायता से अनेको कार्य आरंभ होता है। जिसका उपयोग भोजन पकाने से लेकर कई तरह की फैक्ट्रियां चलाने में किया जाता है और सूर्य का प्रकाश तो परमेश्वर के आध्यात्मिक आकाश में आध्यात्मिक तेज के कारण है।

 

 

 

 

अज्ञानी मनुष्य यह नहीं समझ पाता है कि यह सब कैसे घटित होता है। लेकिन भगवान ने यहां पर जो कुछ भी बतलाया है उसे समझकर ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

 

 

 

 

कृष्ण भावनामृत का प्रारंभ इस भौतिक जगत में बद्ध जीव को उन्नति करने के लिए काफी अवसर प्रदान करता है ,जीव मूलतः परमेश्वर का अंश है और भगवान यहां पर इंगित कर रहे है कि जीव किस प्रकार से भगवद्धाम को प्राप्त कर सकते है।

 

 

 

 

अतएव व्यक्ति को यह ज्ञात हो जाये कि सूर्य, चन्द्रमा तथा अग्नि का प्रकाश तथा तेज भगवान कृष्ण से ही उद्भूत हो रहा है तब उसमे कृष्ण भावनामृत का सूत्रपात हो जाता है।

 

 

 

 

प्रत्येक व्यक्ति सूर्य, चन्द्रमा, अग्नि तथा बिजली देखता है। उसे यह अवश्य ही समझने का प्रयास करना चाहिए कि चाहे सूर्य का प्रखर तेज हो, या चन्द्रमा, अग्नि अथवा बिजली का तेज वह सब भगवान से ही उद्भूत होते है।

 

 

 

 

चन्द्रमा का प्रकाश इतना आनंदित करने वाला होता है कि सभी लोग सरलता से समझ सकते है कि वह भगवान की कृपा से ही जीवन-यापन कर रहे है।

 

 

 

 

चन्द्रमा के प्रकाश से ही सारी वनस्पतियो को पोषण प्राप्त होता है। अतः भगवान की कृपा के बिना न तो सूर्य होगा, न चन्द्रमा, न अग्नि और सूर्य, चन्द्रमा तथा अग्नि के न रहने पर जीवन की कल्पना करना ही अनुचित है। बद्ध जीव में कृष्ण भावनामृत जगाने वाले यह विचार ही महत्वपूर्ण है।

 

 

 

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