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Kundilini Tantra Pdf Hindi / कुण्डिलिनी तंत्र Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Kundilini Tantra Pdf Hindi दे रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Kundilini Tantra Pdf Hindi कर सकते हैं और आप यहां से Indian river map in Hindi Pdf कर सकते हैं।

 

 

 

Kundilini Tantra Pdf Hindi Download

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

परियो का समूह बिना विलम्ब किए स्नान करने के लिए स्वर्ण में उतर गया। परियो का समूह स्नान के पश्चात स्वर्ण सरोवर के बाहर निकल आया था। अकस्मात फिर वही पहले वाली स्थिति उत्पन्न हो उठी। सुगंधित महक चारो तरफ फ़ैल गयी और वातावरण संगीतमय हो उठा।

 

 

 

उसी क्षण पैरो में पायल की आवाज सुनाई पड़ने लगी ऐसा लग रहा था कोई आ रहा है। स्वर्ण सरोवर के किनारे सघन वृक्षों की बीच दो हल्के प्रकाश पुंज उतर आये। उनमे से एक सुमन परी थी और दूसरी परियो की रानी सुलेखा थी। मिलन भ्रमित नहीं हुआ उसने तुरंत ही सुलेखा को पहचान लिया।

 

 

 

 

परियो के बीच रहने से उसकी आभा बहुत बढ़ गयी थी। सभी परियां स्नान के पश्चात् स्वर्ण सरोवर के एक किनारे पर खड़ा हो गया। अब स्नान करने की बारी सुलेखा और सुमन की थी। सुमन परी ने रानी परी सुलेखा से कहा – चलिए स्नान का समय हो गया है।

 

 

 

 

सुलेखा बोली – सुमन आज नहाने से पहले ही मन में हिचकिचाहट पैदा हो रही है। सुमन परी सुलेखा को जबरन पानी के अंदर खीचने का प्रयास करने लगी। कच्छप उसी क्षण मिलन से बोला – स्वामी! आप खुद प्रयास करे या फिर हमे आज्ञा प्रदान करे अन्यथा आया हुआ समय हाथ से निकल जाने पर फिर प्रतीक्षा करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

 

 

 

 

मिलन कच्छप से बोला – ठीक है तुम ही प्रयास करो मैं तब तक बैठकर इस क्षण का अवलोकन करता रहूंगा। मिलन से आज्ञा प्राप्त करने के पश्चात् वह पत्थर का कच्छप अपना आकार ग्रहण करते हुए अदृश्य रूप से स्वर्ण सरोवर के स्वर्ण जल के अंदर प्रविष्ट हो गया।

 

 

 

 

उस अभिमंत्रित कच्छप के स्वर्ण जल में प्रवेश करते ही बाहर खड़ी सभी परियां शोर मचाते हुए सुलेखा और सुमन को उस स्वर्ण जल से बाहर आने के लिए कहने लगी लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वह दोनों स्नान करने में इतनी व्यस्त थी कि उन्हें पता ही नहीं लगा कि स्वर्ण सरोवर का जल सामान्य जल में परिवर्तित हो चुका है।

 

 

 

 

जल के साथ ही सुवर्ण सरोवर की प्रत्येक वस्तु अपनी सामान्य अवस्था में आ गयी थी। सुलेखा और सुमन को मालूम था कि स्वर्ण के सामान्य अवस्था में आने पर उसके भीतर स्नान करने वाला शक्तिहीन हो जाता है। सभी परियां समवेत स्वर में कह रही थी जिसने भी यह स्थिति पैदा किया है उसे ढूंढने का प्रयास करो हम उसे अवश्य ही दण्डित करेंगे।

 

 

 

 

सुमन और सुलेखा जल के बाहर निकलते हुए बोली – क्या तुम लोग इतना भी नहीं समझ सकती हो जो सुवर्ण जल को सामान्य जल में परिवर्तित कर सकता है वह इतना निरीह होगा कि तुम लोग उसे दण्डित कर सकती हो? सभी परी एक साथ बोली – क्षमा करे रानी?

 

 

 

 

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