Advertisements

Kriya Yoga Pdf Hindi Free Download / क्रिया योग Pdf Hindi Free

Advertisements

मित्रों इस पोस्ट में Kriya Yoga Pdf Hindi Free दिया जा रहा है। आप नीचे की लिंक से क्रिया योग Pdf Hindi Free Download कर सकते हैं और आप यहाँ से  विषकन्या उपन्यास Pdf Download कर सकते हैं।

 

Advertisements

 

 

Kriya Yoga Pdf Hindi Free क्रिया योग Pdf Hindi Free

 

 

 

Advertisements
Kriya Yoga Pdf Hindi Free
क्रिया योग पीडीएफ यहाँ से डाउनलोड करें। 
Advertisements

 

 

 

Fantasy Novels In Hindi Pdf
मैं कौन हूँ उपन्यास Pdf Download
Advertisements

 

 

Fantasy Novels In Hindi Pdf
Mere Haath Mere Hathiyar Novel यहां से डाउनलोड करे।
Advertisements

 

 

 

 

 

 

 

क्रिया योग के बारे में 

 

 

 

क्रिया योग की पद्धति में प्राणायाम के कई स्तर होते है। जिनका उद्देश्य आध्यात्मिक प्रक्रिया को तेज करना होता है। जिससे मानव अध्यात्म के विकास में उन्नत हो सके। यह क्रिया योग ईश्वर को जानने में सहायक होती है। यह क्रिया योग यथार्थ ज्ञान और आत्म साक्षात्कार करने की एक वैज्ञानिक पद्धति है।

 

 

 

परमहंस योगानंद के शब्दों में क्रिया योग एक सरल मनः कायिक पद्धति है जिसके द्वारा मानव का रक्त शुद्ध होकर ऑक्सीजन युक्त हो जाता है और रक्त में व्याप्त कार्बन विसर्जित हो जाता है। प्राण शक्ति के द्वारा मन को नियंत्रित करने वाला क्रिया योग अनंत तक पहुंचने का सबसे सुगम मार्ग है।

 

 

 

क्रिया योग की साधना करने वाला इसे सबसे प्रचीन पद्धति मानता है। जिसे आधुनिक समय में महावतार बाबा ने लाहिडी महाशय को प्रदान किया था। लाहिडी महाशय ने क्रिया योग विद्या को 1861 के आस-पास पुनर्जीवित किया था और एक योगी की आत्मकथा के माध्यम से जन सामान्य के बीच प्रसारित हो गया।

 

 

 

इस क्रिया योग में मन की स्थिति को धीमे श्वसन के विषय मे समझाया गया है। श्वास की विषम परिस्थिति या श्वास का तीव्र वेगवान प्रवाह काम और क्रोध की अधिकता को वर्णित करता है। इसलिए इस क्रिया में मन की धीमी श्वसन क्रिया पर विशेष प्रकाश डाला गया है।

 

 

 

अन्य मार्गो के द्वारा क्रिया योग ईश्वर तक पहुंचने का सबसे सरल और सुगम मार्ग है। इसे अन्य मार्ग की तुलना में ईश्वर का सानिध्य प्राप्त करने के लिए वायुयान मार्ग कहना अतिश्योक्ति न होगी।

 

 

 

हमारे जीवन के चार आयाम है – भाव, बुद्धि, शरीर और ऊर्जा और योग में जीवन के हर आयाम से जुड़ा एक मार्ग है जैसे भाव से जुड़ा भक्तियोग, बुद्धि से जुड़ा ज्ञानयोग, शरीर से जुड़ा कर्मयोग और जीवन से जुड़ा क्रियायोग होता है।

 

 

 

क्रिया योग आज के आधुनिक समाज में बहुत ही कठिन है लेकिन नामुमकिन नहीं है। क्रियायोग ईश्वर बोध यथार्थ-ज्ञान और आत्मसाक्षात्कार की एक वैज्ञानिक प्रणाली है।

 

 

 

गीता सार सिर्फ पढ़ने 

 

 

 

श्री कृष्ण कहते है – इस भौतिक जगत में जो व्यक्ति न तो हर्षित होता है न अशुभ के प्राप होने पर घृणा करता है वही व्यक्ति पूर्ण ज्ञान में स्थिर रहता है।

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – जब तक मनुष्य इस भौतिक संसार में रहता है तब तक अच्छाई और बुराई की संभावना रहती ही है क्योंकि यह संसार द्वैत (द्वंदों) से परिपूर्ण है। किन्तु जो व्यक्ति कृष्ण भावनामृत में स्थिर रहता है वह अच्छाई या बुराई से पृथक होता है क्योंकि उसका सरोकार कृष्ण से रहता है जो सदा ही सर्वमङ्गलमय रहते है। ऐसे कृष्ण भावनामृत में मनुष्य पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति कर लेता है जिसे समाधि कहते है।

 

 

 

भौतिक जगत में सदैव ही कुछ न कुछ उथल-पुथल होती रहती है उसका परिणाम अच्छा हो चाहे बुरा। जो ऐसे उथल-पुथल से प्रभावित नहीं होता जो अच्छे (शुभ) या बुरा (अशुभ) विचलित नहीं होता है उस व्यक्ति को कृष्ण भावनामृत में स्थिर समझना चाहिए यही समाधि की स्थिति होती है।

 

 

 

 

मित्रों यह पोस्ट Kriya Yoga Pdf Hindi Free आपको कैसी लगी जरूर बताएं और इस तरह की दूसरी बुक्स के लिए इस ब्लॉग को सब्स्क्राइब जरूर करें और इसे शेयर भी करें।

 

 

 

इसे भी पढ़ें —->पतंजलि योग सूत्र PDF

 

 

 

Leave a Comment

error: Content is protected !!