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Karnal Ranjeet Novel Hindi Pdf / कर्नल रणजीत उपन्यास Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Karnal Ranjeet Novel Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Karnal Ranjeet Novel Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Anil Mohan Novels Devraj Chauhan Series Pdf कर सकते हैं।

 

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Karnal Ranjeet Novel Hindi Pdf Download

 

 

 

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Karnal Ranjeet Novel Hindi Pdf
Karnal Ranjeet Novel Hindi Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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Kalchakra ke Rakshak Pdf
कालचक्र के रक्षक Pdf Download
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Karnal Ranjeet Novel Hindi Pdf
मुजरिम की तलाश नॉवेल Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

विनीत भी कार्तिक का हमउम्र था और एक व्यापारी भी था। इसलिए उसकी और कार्तिक के मध्य अच्छी तरह से सामंजस्य बैठ गया था। आभा ने आकर केशरी को प्रणाम किया फिर कार्तिक से बोली – नमस्कार कार्तिक जी! कार्तिक ने आभा की नमस्कार का उत्तर दिया लेकिन कुछ क्षण के लिए सोच में पड़ गया।

 

 

 

 

तभी सूरज उससे पूछ बैठे क्या बात है बेटा? कार्तिक बोला – क्या दो व्यक्तियों में एक समान शक्ल सूरत के साथ ही उनकी आवाज में भी समानता हो सकती है? सूरज बोले – यह सब पकृति प्रदत्त होता है और सम्भव है। आभा को कार्तिक आज पहली बार देख रहा था।

 

 

 

 

लेकिन उसे लगा जैसे रचना ही उसके सामने आकर खड़ी हो गयी है। कार्तिक और विनीत दोनों आपस में बातें करने लगे उनकी सभी बातें अपने-अपने व्यापार से ही संबंधित होती थी। सूरज ध्यान पूर्वक कार्तिक को देखते हुए बोले – बेटा! आपको यहां शहर की अपेक्षा क्या परिवर्तन दिखाई दे रहा है?

 

 

 

 

कार्तिक बोला – चाचाजी! गांव में और शहर की अपेक्षा बहुत सारी प्राकृतिक स्थान है जिन्हे देखकर दिल को शांति मिलती है। यहां तो कई तरह के बगीचे और बहुत से खेत जो फसलों की हरियाली से लहलहाते रहते है। उनकी तरफ देखकर बहुत ही आनंद प्राप्त होता है।

 

 

 

 

वहां से लौटने का मन करता ही नहीं। इस समय तो सरकार की तरफ से खेतो के किनारे से रास्ता भी चौड़ा कर दिया गया है जिससे आने-जाने में बहुत सुविधा हो गयी है जबकि शहर में इतनी सुंदरता देखने के लिए आँखे तरस जाती है। सूरज बोले – आप लोगो को भी गांव में रहने का प्रयास अवश्य करना चाहिए क्योंकि अपने गांव से संबंध विच्छेद करना ठीक नहीं है?

 

 

 

 

कार्तिक कुछ बोलता उसके पहले ही केशरी बोल उठे इसलिए तो पराग भाई अपने गांव में दो मकान का निर्माण कर रहे है ताकी अपने गांव से सदैव ही सम्पर्क बना रहे। सूरज केशरी की बात सुनकर चौंक गए और बोले – पराग भाई को दो मकान का निर्माण करने की क्या आवश्यकता आ गयी?

 

 

 

 

सूरज से केशरी बोले – पराग भाई के लिए एक मकान ही बहुत है लेकिन वह अपने पड़ोस में रहने वाले विरजू के लिए भी एक मकान का निर्माण करवा रहे है और वही सब देखने के लिए कार्तिक इस समय गांव आया हुआ है। केशरी की बात सुनकर सूरज हैरान हो गए।

 

 

 

 

उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि इस मतलब परस्त दुनिया में ऐसे लोग भी है जो दूसरे की सहायता करते रहते है। केशरी बोले – अपनी इस अच्छाई के कारण ही पराग इस दुनियां की भीड़ में सबसे अलग दिखते है और हम यहां जिस उद्देश्य से आये है आप उसपर ध्यान दीजिए।

 

 

 

 

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