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कर्मभूमि उपन्यास pdf / Karmbhumi Upanyas Pdf

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Karmbhumi Upanyas Pdf

 

 

पुस्तक का नाम  Karmbhumi Upanyas Pdf
पुस्तक के लेखक  प्रेमचंद 
फॉर्मेट  Pdf 
साइज  1 Mb 
पृष्ठ  279 
भाषा  हिंदी 
श्रेणी  उपन्यास 

 

 

कर्मभूमि उपन्यास pdf Download

 

 

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Karmbhumi Upanyas Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

ब्रह्मा जी कहते है – नारद! ऐसा कहकर वह ब्राह्मण पत्नी शिवा देवी को मस्तक झुका चुप हो गयी। इस उपदेश को सुनकर शंकर प्रिया पार्वती देवी को बड़ा हर्ष हुआ। ब्रह्मा जी कहते है – नारद! ब्राह्मणी ने देवी पार्वती को पतिव्रत धर्म की शिक्षा देने के पश्चात मेना को बुलाकर कहा – महारानी जी! अब अपनी पुत्री की यात्रा कराइये। इसे विदा कीजिए।

 

 

 

तब बहुत अच्छा कहकर वे प्रेम के वशीभूत हो गयी। फिर धैर्य धारण करके उन्होंने काली को बुलाया और उसके वियोग के भय से व्याकुल हो वे बेटी को बारंबार गले से लगाकर अत्यंत उच्चस्वर से रोने लगी। फिर पार्वती भी करुणाजनक बात कहती हुई जोर-जोर से रो पड़ी।

 

 

 

मेना और शिवा दोनों ही विरह शोक से पीड़ित हो मूर्छित हो गयी। पार्वती के रोने से देव पत्नियां भी अपनी सुध-बुध खो बैठी। सारी स्त्रियां वहां रोने लगी। वे सब की सब अचेत सी हो गयी। उस यात्रा के समय परम प्रभु साक्षात योगीश्वर शिव भी रो पड़े।

 

 

 

फिर दूसरा कौन चुप रह सकता था? इसी समय अपने समस्त पुत्रो मंत्रियों और उत्तम ब्राह्मणो के साथ हिमालय शीघ्र वहां आ पहुंचे और मोहवश अपनी बच्ची को हृदय से लगाकर रोने लगे। बेटी! तुम मुझे छोड़कर कहां चली जा रही हो? ऐसा जानकर सारे जगत को सूना मानते हुए वे बारंबार विलाप करने लगे।

 

 

 

तब ज्ञानियों में श्रेष्ठ पुरोहित ने अन्य ब्राह्मणो के सहयोग से कृपा पूर्वक अध्यात्मविद्या का उपदेश देते हुए सबको सुखद रीति से समझाया। पार्वती ने भक्ति भाव से माता-पिता तथा गुरु को प्रणाम किया। वे महामाया होकर भी लोकाचार वश बार-बार रो उठती थी।

 

 

 

पार्वती के रोने से ही सब स्त्रियां रोने लगती थी। माता मेना तो बहुत रोई। भौजाइयां भी रोने लगी। यही दशा भाइयो की थी। शिवा की मां, भाभियाँ तथा अन्य युवतियां बार-बार रोदन करने लगी। भाई और पिता भी प्रेम और सौहार्दवश रोये बिना न रह सके।

 

 

 

उस समय ब्राह्मणो ने मिलकर सबको आदर पूर्वक समझाया और यह सूचित किया कि यात्रा के लिए यही सबसे उत्तम तथा सुखद लग्न है। तब हिमालय और मेना ने विवेकपूर्वक धैर्य धारण करके शिवा के बैठने के लिए पालकी मंगवाई। ब्राह्मणो की पत्नियों ने शिवा को उसपर चढ़ाया और सबने मिलकर आशीर्वाद दिया।

 

 

 

पिता-माता और ब्राह्मणो ने भी अपनी शुभ कामना प्रकट की। मेना और हिमालय ने पार्वती को ऐसे-ऐसे सामान दिए जो महारानी के योग्य थे। नाना प्रकार के द्रव्यों की शुभ राशि भेट की जो दूसरों के लिए परम दुर्लभ थी। शिवा ने समस्त गुरुजनो को, माता-पिता को, पुरोहित और ब्राह्मणो को तथा भौजाइयों और दूसरी स्त्रियों को प्रणाम करके यात्रा की।

 

 

 

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