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काली तंत्र बुक Pdf / Kali Tantra Book Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Kali Tantra Book Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Kali Tantra Book Pdf download कर सकते हैं और आप यहां से Karmbhumi Upanyas Pdf कर सकते हैं।

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Kali Tantra Book Pdf

 

 

पुस्तक का नाम  Kali Tantra Book Pdf
पुस्तक के लेखक  राजेश दीक्षित 
भाषा  हिंदी 
साइज  42 Mb 
पृष्ठ  198 
फॉर्मेट  Pdf 
श्रेणी  तंत्र मंत्र 

 

 

काली तंत्र बुक Pdf Download

 

 

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Kali Tantra Book Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

महात्मा गौतम बुद्ध ने संसार में व्याप्त न सिर्फ दुखों के बारे में बताया बल्कि दुख उत्पन्न होने के कई कारण भी बताए। इसके अलावा भगवान गौतम बुद्ध ने दुखों से छुटकारा दिलाने के मार्ग को भी बताया है। आपको बता दें कि इसके लिए बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग को उपयुक्त बताया है।

 

 

 

सम्यक वाणी
सत्य एवं मृदु वाणी। दुखों से निजात पाने के लिए महात्मा बुद्ध ने सम्यक वाणी का भी वर्णन किया है। बुद्ध की माने तो सत्य और मधुर बोलने से इंसान को सुख की अनुभूति होती है और दुख उसके आस-पास भी नहीं भटकता है।

सम्यक कर्म
सत्कर्म, दान, दया, सदाचार, अहिंसा इत्यादि। दया, करूणा का भाव रखना और दान-पुण्य और अच्छे कर्मों से भी मनुष्य दुखों से दूर रहता है।

सम्यक आजीवन
जीवन यापन का सदाचार पूर्ण एवं उचित मार्ग। गौतम बुद्ध ने सम्यक आजीव को भी जीवन यापन का उचित मार्ग बताया है।

सम्यक व्यायाम
विवेकपूर्ण प्रयत्न। महात्मा बुद्ध ने दुखों को दूर करने के लिए सम्यक व्यायाम करने को भी कहा। उनका कहना था कि किसी काम को करने के लिए अगर विवेकपूर्ण प्रयास किए जाएं तो सफलता जरूर अर्जित होती है और मानव दुखों से दूर रहता है।

सम्यक स्मृति
अपने कर्मो के प्रति विवेकपूर्ण ढंग से सजग रहने कि शिक्षा देता है।
महात्मा बुद्ध ने मानव जीवन के दुखों को दूर करने के लिए अपने कर्मों के प्रति विवेकपूर्ण ढंग से सजग रहने की भी शिक्षा दी है।

सम्यक समाधि
चित कि एकाग्रता। महात्मा बुद्ध ने मानव जीवन में एकाग्रता के महत्वों को भी बताया है उन्होंने कहा सम्यक समाधि लेने से मनुष्य दुखों से दूर रहता है।
इसके अलावा गौतम बुद्ध ने निर्वाण प्राप्ति को सरल बनाने के लिए निम्न दस शीलों पर बल दिया।

अहिंसा,


सत्य,


अस्तेय (चोरी न करना),


अपरिग्रह (किसी प्रकार कि संपत्ति न रखना),


मध सेवन न करना,


असमय भोजन न करना,


सुखप्रद बिस्तर पर नहीं सोना,


धन संचय न करना,


स्त्रियो से दूर रहना,


नृत्य गान आदि से दूर रहना।


इसके साथ ही भगवान बुद्ध ने जीवों पर दया करने का भी उपदेश दिया और हवन, पशुबलि जैसे आडम्बरों की जमकर निंदा की है।

बौद्ध धर्म सभी जातियों और पंथों के लिए खुला है। उसमें हर आदमी का स्वागत है। ब्राह्मण हो या चांडाल, पापी हो या पुण्यात्मा, गृहस्थ हो या ब्रह्मचारी सबके लिए उनका दरवाजा खुला है। उनके धर्म में जात-पाँत, ऊँच-नीच का कोई भेद-भाव नहीं है।

महात्मा गौतम बुद्ध ने अपने उपदेशों से न सिर्फ कई लोगों की जिंदगी को सफल बनाया बल्कि लोगों की सोच भी विकसित की। इसके साथ ही लोगों में करुणा और दया का भाव भी पैदा करने में अपनी अहम भूमिका निभाई।

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