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Kalchakra ke Rakshak Pdf / कालचक्र के रक्षक Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Kalchakra ke Rakshak Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Kalchakra ke Rakshak Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से 5 + Mystery Novels in Hindi Pdf free download कर सकते हैं।

 

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Kalchakra Ke Rakshak Pdf Free Download

 

 

 

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Kalchakra ke Rakshak Pdf
कालचक्र के रक्षक Pdf Download
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

लेकिन मैं आपके पास एक बहुत जरूरी कार्य से आया हूँ और आशा करता हूँ कि वह कार्य हो जायेगा। डा. निशा भारती ने कहा निःसंकोच कहो दीपक तुम्हारा कार्य अवश्य होगा। दीपक कहने लगा दीदी आगरा से आठ किलोमीटर पूर्व बेलवा गांव में बालककिशन नाम का एक आदमी रहता है।

 

 

 

उसककी  लड़की की शादी एक महीना बाद होने वाली है। उसके पास रुपये की पूरी व्यवस्था नहीं है इसलिए वह अपनी सड़क के किनारे की दस बिस्वा जमीन दो लाख में बेच रहा है फिर भी उसे रुपये शादी के लिए कम पड़ रहे है। वह जमीन हम लोग मिलकर लेने वाले है।

 

 

 

वहां पेठा बनाने का कार्य किया जायेगा और सभी लोगो के रहने की व्यवस्था भी हो जाएगी। निशा भारती बोली तब आखिर तुम्हे क्या परेशानी है। दीपक बोला परेशानी हमे नहीं बालकिशन को है और हम चाहते है कि सरोज सेवा केंद्र के माध्यम उसे कुछ सहायता प्राप्त हो जाय तो उत्तम रहेगा।

 

 

 

निशा भारती ने कहा तुम्हारा विचार तो ठीक है लेकिन इस समय रात्रि के दस बज गए है। तुम हमसे कल सुबह दस बजे घर आकर मिलो और वह चलने की तैयारी करने लगी।

 

 

 

दीपक बोला आज सरिता और रोशन नहीं आये है क्या? निशा भारती ने  कहा वह दोनों आधा घंटा पहले ही चले गए ही। यह पेठा उनके लिए ही लाया था। आप लेती जाइये। दीपक ने निशा भारती को पेठा देते हुए कहा फिर निशा भारती और दीपक दोनों अपने घर के लिए चल दिए।

 

 

 

सुधीर दसवीं कक्षा में जिले का प्रथम आने वाला पहला विद्यार्थी था। रजनी भी बारहवीं प्रथम श्रेणी से पास कर चुकी थी। सुधीर का ध्यान पढ़ाई के साथ ही खिलौना बनाने वाली मशीन पर लगा हुआ था। नरेश और विवेक दोनों बी. एस. सी करने की तैयारी में थे।

 

 

 

उनका उद्देश्य डा. बनना था और गरीब असहाय की सहायता करना था क्योंकि पैसे के अभाव में कितने ही असहाय दवाओं से वंचित हो जाते थे उन दोनों ने अपना कार्य आदर्श डा. निशा भारती को मान लिया था जो बिना स्वार्थ के ही गरीब दुखियो की सेवा करती थी।

 

 

 

नरेश, विवेक जैसे कई युवको को आगे बढ़ने के लिए सरोज सेवा केंद्र एक मजबूत स्तंभ था। सरोज सेवा केंद्र के द्वारा प्रतिवर्ष गरीब बालिकाओ और असहाय लोगो के लिए सहायता की जाती थी। इस केंद्र की इतनी ख्याति फ़ैल चुकी थी कि कई संपन्न व्यक्ति गुप्त रूप से सरोज सेवा केंद्र को दान में लाखो रुपये देते थे।

 

 

 

जिससे असहाय लोगो के लिए सहायता करना और सुलभ हो गया था। लेकिन अब रघुराज के ऊपर भी उम्र के निशान अपनी छाप छोड़ने लगे थे लेकिन उनके उत्साह में कोई कमी न थी। रघुराज के लड़के अभी पढ़ाई में व्यस्त थे इसलिए रघु उनसे कुछ कह नहीं सकते थे।

 

 

 

सुधीर तो पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि वह अपना अलग व्यवसाय शुरू करेगा और विवेक तो डा. बनकर निशा भारती के जैसा समाज सेवा करना चाहता था। नरेश और रजनी तो राजीव प्रजापति के बच्चे थे उनके ऊपर रघुराज दबाव नहीं बनाना चाहता था।

 

 

 

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