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Kalbhairavashtak Pdf Hindi / कालभैरव अष्टकम Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Kalbhairavashtak Pdf Hindi देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Kalbhairavashtak Pdf Hindi download कर सकते हैं और आप यहां से Ravan Rachit Shiv Tandav Stotra Pdf कर सकते हैं।

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Kalbhairavashtak Pdf Hindi Download

 

 

 

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Nirjala Ekadashi Vrat Katha Pdf Download यहां से करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

अपनी प्रिया शुभांगी मेना को देखकर गिरिराज हिमवान बड़ी प्रसन्नता का अनुभव करने लगे। गर्भ में जगदंबा के आ जाने से वे महान तेज से सम्पन्न हो गयी थी। मुने! उस अवसर में विष्णु आदि देवता और मुनियो ने वहां आकर गर्भ में निवास करने वाली शिवा देवी की स्तुति की और तदनन्तर महेश्वरी की नाना प्रकार से स्तुति करके प्रसन्नचित्त हुए वे सब देवता अपने-अपने धाम को चले गए।

 

 

 

जब नवां महीना बीत गया और दसवां भी पूरा हो चला तब जगदंबा कालिका ने समय पूर्ण होने पर गर्भस्थ शिशु की जो गति होती है उसी को धारण किया। उस अवसर पर आद्याशक्ति सती साध्वी शिवा पहले मेना के सामने अपने ही रूप से प्रकट हुई।

 

 

 

बसंत ऋतु में चैत्र मास की नवमी तिथि को मृगशिरा नक्षत्र में आधी रात के समय चन्द्रमण्डल से आकाशगंगा की भांति मेनका के उदर से देवी शिवा का अपने ही स्वरुप में प्रादुर्भाव हुआ। उस समय सम्पूर्ण संसार में प्रसन्नता छा गयी। अनुकूल हवा चलने लगी। जो सुंदर सुगंधित एवं गंभीर थी।

 

 

 

उस समय जल की वर्षा के साथ फूलो की वृष्टि हुई। विष्णु आदि सब देवता वहां आये। सबने सुखी होकर प्रसन्नता के साथ जगदंबा के दर्शन किए और शिवलोक में निवास करने वाली दिव्यरूपा महामाया शिवकामिनी मंगलमयी कालिका माता का स्तवन किया।

 

 

 

नारद! जब देवता लोग स्तुति करके चले गए तब मेनका उस समय प्रकट हु नील कमल दल के समान कान्ति वाली श्यामवर्णा देवी को देखकर अतिशय आनंद का अनुभव करने लगी। देवी के उस दिव्य रूप का दर्शन करके गिरिप्रिया मेना को ज्ञान प्राप्त हो गया।

 

 

 

वे उन्हें परमेश्वरि समझकर अत्यंत हर्ष से उल्लसित हो उठी और संतोष पूर्वक बोली – जगदंबे! महेश्वरी! आपने बड़ी कृपा की जो मेरे सामने प्रकट हुई। अंबिके! आपकी बड़ी शोभा हो रही है। शिवे! आप सम्पूर्ण शक्तियों में आद्याशक्ति तथा तीनो लोको की जननी है।

 

 

 

देवी! आप भगवान शिव को सदा ही प्रिय है तथा सम्पूर्ण देवताओ से प्रशंसित पराशक्ति है। महेश्वरी! आप कृपा करे और इसी रूप से मेरे ध्यान में स्थित हो जाए। साथ ही मेरी पुत्री के अनुरूप प्रत्यक्ष दर्शनीय रूप धारण करे। ब्रह्मा जी कहते है – नारद! पर्वत पत्नी मेना की यह बात सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुई शिवा देवी ने उस गिरि प्रिया को इस प्रकार उत्तर दिया।

 

 

 

मेना! तुमने पहले तत्परता पूर्वक मेरी बड़ी सेवा की थी। उस समय तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हो मैं वर देने के लिए तुम्हारे निकट आयी। वर मांगो मेरी इस वाणी को सुनकर तुमने जो वर माँगा वह इस प्रकार है – महादेवी! आप मेरी पुत्री हो जाय और देवताओ का हित साधन करे।

 

 

 

 

तब मैंने तथास्तु कहकर तुम्हे सादर यह वर दे दिया और मैं अपने धाम को चली गयी। गिरिकामिनी! उस वर के अनुसार समय पाकर आज मैं तुम्हारी पुत्री हुई हूँ। आज मैंने जो दिव्य रूप का दर्शन कराया है उसका उद्देश्य इतना ही है कि तुम्हे मेरे स्वरुप का स्मरण हो जाय।

 

 

 

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