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Jhootha Sach Novel Pdf / झूठा सच उपन्यास Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Jhootha Sach Novel Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Jhootha Sach Novel Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  हादसे की रात Novel Pdf Download कर सकते हैं।

 

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Jhootha Sach Novel Pdf / झूठा सच’ उपन्यास pdf 

 

 

पुस्तक का नाम Jhootha Sach Novel Pdf
पुस्तक के लेखक यशपाल शर्मा 
भाषा हिंदी 
श्रेणी उपन्यास 
फॉर्मेट Pdf
पृष्ठ 611
साइज 

 

 

 

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Jhootha Sach Novel Pdf
झूठा सच उपन्यास Pdf Download
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Jhootha Sach Novel Pdf
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jhooth Sach Novel Pdf
झूठ सच उपन्यास Pdf Download
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पराग अपने गांव जाना चाहते थे। उन्हें अपना पुराना पुश्तैनी घर नए ढंग से बनवाने का विचार था। रात्रि को कार्तिक जब दुकान और कम्पनी से लौटकर आया तब पराग ने उससे कहा – कि हम अपने गांव कीरतपुर जा रहे है। वहां हम पुरखो का पुराना घर नए ढंग से बनवाने की सोच रहे है।

 

 

 

उसी दौरान दो चार लोगो से मुलाकात भी हो जाएगी। कार्तिक बोला – उस मकान में कोई रहने वाला तो है नहीं आप उसमे पैसा क्यों लगाना चाहते है? पराग बोले – तुम अभी नवयुवक हो दूसरी बात कि तुम एक व्यापारी हो इसलिए तुम्हे मकान में पैसा लगाना उचित नहीं लगता है।

 

 

 

जबकि वह हम लोगो के पुरखो की निशानी है उसके साथ बहुत सी यादे जुडी हुई है। हम लोग उस यादो को अपने जीवित रहते हुए सहेज कर रखना चाहते है। दूसरी बात कोई भी व्यक्ति कही से भी थका हारा आता है तो उसे अपने घर में ही संतुष्टि प्राप्त होती है।

 

 

 

अगर व्यापारिक तौर पर देखोगे तब भी वह फायदे का सौदा है। उसे बनवाने में पचास लाख रूपये लगेंगे लेकिन दस-पंद्रह साल में हमे दोगुना प्राप्त हो जायेगा। कार्तिक बोला – लेकिन पिताजी हम अपने व्यापार में पचास लाख रुपया लगा दे तो हमे दो साल में ही उससे दोगुना प्राप्त हो जाएगा।

 

 

 

पराग बोले – व्यापारिक ढंग से तुम्हारा नजरिया सही है लेकिन सामाजिक ढंग से बिलकुल गलत है क्योंकि देहात और समाज में ऐसे बहादुर आदमियों की कोई भी कमी नहीं है जो सबके सामने ही कह देंगे कि अगर इनके पास पैसा है तो तो अपना मकान क्यों नहीं बनवाते है?

 

 

 

शहर में कौन देखने जाता है वहां तो सभी लोग रुपया कमाते है। तब उन्हें तुम क्या जवाब दोगे? अगर गांव देहात में तुम्हारी अचल सम्पत्ति तो वहां जाने पर सभी लोग तुम्हारे सामने नत रहेंगे भले ऊपरी तौर पर ही सही लेकिन यहां शहर में तुम्हारे पास दस करोड़ की सम्पत्ति क्यों न हो  यहां तुम्हारे सामने कोई भी नत नहीं होगा? क्योंकि शहर में अगर तुम दस हो तो तुम्हारे आस-पास में ही कोई बीस कोई तीस करोड़ का मालिक है?

 

 

 

 

जबकि गांव में पचास लाख का मकान बनवाने पर वहां तक पहुंचने में किसी को भी कम से कम सीस साल अवश्य ही लगेंगे। कार्तिक बोला – आप मकान बनवाना चाहते है तो बनवाइए हमे आपसे बहस नहीं करना है मैं दुकान और कम्पनी की तरफ जा रहा हूँ।

 

 

 

पराग बोले – हमारी एक बात और सुन लो यदि कोई भी व्यक्ति सक्षम रहते हुए भी अपनी सम्पत्ति की तरफ से लापरवाह रहता है तो उसके सम्पत्ति के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लग जाता है क्योंकि शहर हो या गांव समाज के लोग एक-एक इंच करते हुए दूसरे की सम्पत्ति खुद में समाहित कर लेते है।

 

 

 

पराग का इतना लंबा भाषण सुनने के बाद कार्तिक बोला – आप सीधे तौर पर क्यों नहीं कहते है कि मुझे गांव का मकान बनवाना है? इतना समय खर्च करने की क्या जरूरत थी? पराग बोले – तुम एक व्यापारी हो, मैंने भी व्यापार किया है।

 

 

 

व्यापारी होते हुए भी हमने पारिवारिक मूल्य और धरोहर के ऊपर ध्यान रखते हुए अपने व्यापार को बढ़ाया है। हमारे नहीं रहने पर तुम्हे हमारी बातो का मूल्य अच्छी तरह से समझ में आएगा। कार्तिक दुकान और कम्पनी की तरफ चला गया। पराग अपने गांव जाने की तैयारी करने लगे।

 

 

 

पराग के साथ ही केतकी भी गांव जाने के लिए तैयार थी। कार्तिक आज जल्दी आ गया था क्योंकि उसे अपने माता-पिता को गांव छोड़ने के लिए स्टेशन जाना था। पराग और केतकी शयनयान एस 9 में यात्रा कर रहे थे। रेलगाड़ी वर्धमान और आसन सोल के बीच से गुजरती जा रही थी।

 

 

 

तभी एक भिखारन लड़की उनके पास आकर बीस रुपये के लिए याचना करने लगी। पराग उसे बीस रुपये देते हुए गौर से देखने लगे तो वह भिखारन लड़की बोली क्या देख रहे है बाबा? पराग ने बिना किसी लाग-लपेट के के कहा – तुम भिखारी नहीं लग रही हो इसलिए ही मैं तुम्हारे चेहरे की तरफ देखकर सच्चाई जानने का प्रयास कर रहा हूँ।

 

 

 

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