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20 + Jay Shankar Prasad All Books Hindi / जय शंकर प्रसाद बुक्स PDF फ्री

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Jay Shankar Prasad All Books मित्रों इस पोस्ट में जयशंकर प्रसाद की किताबें दी गयी हैं।  आप नीचे की लिंक से जयशंकर प्रसाद की किताबें डाउनलोड कर सकते हैं।

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Jay Shankar Prasad All Books Hindi

 

 

 

 

 

 

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 Jay Shankar Prasad All Books
अजातशत्रु Pdf Download
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 Jay Shankar Prasad All Books Hindi
कंकाल नावेल Pdf Download
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1- Giitikaa गीतिका जयशंकर प्रसाद की बुक

 

2- Pratidhwani प्रतिध्वनि

 

4- Chhaayaa छाया फ्री बुक डाउनलोड

 

5- Chota-Jadugar Written By Jayshankar Prasad

 

6- इरावती Erawati

 

7- Maharana-Ka Mahatwa महाराणा का महत्व

 

8- Aandhi आंधी

 

9- Aanksu आंसू

 

10- Kamaynee-Chinta कामायनी

 

12- Chandragupt-Mourya चन्द्रगुप्त मौर्या जयशंकर प्रसाद द्वारा लिखित

 

13-Skandgupt-Vikramaditya स्कंदगुप्त विक्रमादित्य

 

14- Kavya-Aur Kala काव्य और कला

 

15- Prasad-Granthawali प्रसाद ग्रंथावली

 

16- Indrajal इंद्रजाल

 

17- Akash-Deep आकाश दीप

 

18 – Janmejay-Ka Nagyagya जन्मेजय का नागयज्ञ

 

19- Apurva-Pustaken अपूर्व पुस्तकें

 

20- Ekanki Roopak एकांकी रूपक

 

 

 

Jayshankar Prasad Short Biography in Hindi 

 

 

हिंदी के साहित्य श्रृजन में “जयशंकर प्रसाद” का नाम को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। “जयशंकर प्रसाद” हिंदी साहित्य जगत में अपने ‘महाकाव्य’ ‘कामायनी’ के द्वारा अवलोकित हुए है। इनका यह ‘महाकाव्य कामायनी’ एक जाज्वल्य मान कृति है।

 

 

 

 

 

यह रचना सर्वोच्चता के साथ-साथ हिन्दी का प्रतिनिधित्व करने वाला ‘महाकाव्य’ है। ‘प्रसाद’ जी की इस अंतिम काव्य रचना का प्रकाशन 1936 में हो गया था। इसमें मानव जीवन के आदि से और मानव के वर्तमान जीवन के मनोवैज्ञानिक और संस्कृत इतिहास की झलक मिलती है।

 

 

 

 

 

इस ‘महाकाव्य का श्रृजन’ चिंता से प्रारंभ होकर आनंद तक 15 सर्गो में वर्णित है। इसमें ‘प्रत्यभिज्ञा’ दर्शन के साथ ही अरविन्द दर्शन और गांधी वादी दर्शन का भी समावेश है।

 

 

 

 

 

कामायनी कला की दृष्टि से सर्वोत्तम कृति है। इसमें सौंदर्य, लज्जा, श्रद्धा का मानव रूप अवतरण हिंदी साहित्य की विशेष व अनमोल निधि है। रचनाकार ने इस कथानक के पात्र का प्रादुर्भाव अपनी लेखनी से अविस्मरणीय बनाकर भव्यता प्रदान की है।

 

 

 

Kamayani in Hindi PDF Free Download

 

 

 

मित्रों इस पोस्ट में Kamayani Book के बारे में बताया गया है।  आप Kamayani PDF यहां से फ्री डाउनलोड कर सकते हैं।

 

 

 

 

हिंदी के साहित्य श्रृजन में “जयशंकर प्रसाद” का नाम को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। “जयशंकर प्रसाद” हिंदी साहित्य जगत में अपने ‘महाकाव्य’ ‘कामायनी’ के द्वारा अवलोकित हुए है। इनका यह ‘महाकाव्य कामायनी’ एक जाज्वल्य मान कृति है।

 

 

 

 

 

यह रचना सर्वोच्चता के साथ-साथ हिन्दी का प्रतिनिधित्व करने वाला ‘महाकाव्य’ है। ‘प्रसाद’ जी की इस अंतिम काव्य रचना का प्रकाशन 1936 में हो गया था। इसमें मानव जीवन के आदि से और मानव के वर्तमान जीवन के मनोवैज्ञानिक और संस्कृत इतिहास की झलक मिलती है।

 

 

 

 

 

इस ‘महाकाव्य का श्रृजन’ चिंता से प्रारंभ होकर आनंद तक 15 सर्गो में वर्णित है। इसमें ‘प्रत्यभिज्ञा’ दर्शन के साथ ही अरविन्द दर्शन और गांधी वादी दर्शन का भी समावेश है।

 

 

 

 

 

कामायनी कला की दृष्टि से सर्वोत्तम कृति है। इसमें सौंदर्य, लज्जा, श्रद्धा का मानव रूप अवतरण हिंदी साहित्य की विशेष व अनमोल निधि है। रचनाकार ने इस कथानक के पात्र का प्रादुर्भाव अपनी लेखनी से अविस्मरणीय बनाकर भव्यता प्रदान की है।

 

 

 

Hindi Kahani 

 

 

 

रामपुर गांव से कुछ ही दूरी पर जंगल था। उस जंगल में बहुत सारे बंदर रहते थे। उन बंदरों में से एक बंदर बहुत शरारती था।

 

 

 

 

एक दिन जब सभी बंदर पेड़ के ऊपर उछल कूद कर रहे थे। तभी शरारती बंदर की नजर गांव की ओर गई। उसने सोचा, “कि हम लोग उन घरों में क्यों नहीं जाते। वहां हमें बहुत कुछ खाने को मिलेगा।”

 

 

 

 

 

दूसरे दिन वह अकेले ही पास के घरों में गया। सुबह का समय था। सभी किसान अपने खेतों में जा रहे थे। उन लोगों के जाने के बाद वह शरारती बंदर एक घर में गया। वहां उसे बहुत अच्छा- अच्छा खाने को मिला। वह बहुत खुश हुआ। उसने यह बात जाकर अपने साथियों को बताई।

 

 

 

 

 

दूसरे दिन सभी बंदर किसानों के जाने के बाद गांव में आये और सबके घरों से सारा खाना खा लिया, और बर्तन इधर उधर फेंक दिया।

 

 

 

 

 

अब यह उनका रोज का काम हो गया था। एक दिन की बात है सभी किसान चले गए थे। लेकिन पिंटू श्यामसुंदर का लड़का एक पेड़ के नीचे बैठा था। उसने उन बैनरों को आते देखा तो डरकर वह एक पसद के पीछे छुप गया।

 

 

 

 

 

जब सभी किसान खेत से घर आये तो उन लोगों ने देखा कि घर की हालत बहुत ही खराब थी। वह इसके बारे में एक दूसरे से बातें कर रहे थे। इसी बीच पिंटू वहां आया उन लोगों की बातों को सुनकर उसने कहा, “मुझे मालूम है। आपके घरों की यह हालत किसने की है ?” किसनों ने पूछा, “किसने की है ?”

 

 

 

 

 

पिंटू ने कहा, “आप लोगों के जाने के बाद जब मैं इस पेड़ के नीचे बैठा था। तो मैंने देखा कि पास के जगल से बहुत सारे बंदर आ गए। उन लोगों की डर से मैं पेड़ के पीछे छुप गया। सभी बंदर घरों में गए और खूब उछल कूद मचाई। आप लोगों के आने से पहले ही वह सभी बंदर चले गए।”

 

 

 

 

यह सब सुनते रामू ने कहा, “उन बंदरों को सबक सीखना होगा।” कुछ समय बाद श्यामसुंदर ने कहा, “मेरे पास एक सुझाव है।” रामू ने कहा, “क्या सुझाव है ?” श्यामसुंदर ने कहा, “तुम लोग कहीं से पतली मुंह का दो बर्तन लेकर आओ। हम लोग उसमे मूंगफली रख देंगे। जब बंदरों का सरदार इसे खाने आएगा तो हम उसे पकड़ लेंगे।”

 

 

 

 

 

 

दूसरे किसानों ने श्यामसुंदर को मूंगफली से भरा हुआ बर्तन दे दिया। श्यामसुंदर ने उसे पेड़ के नीचे रख दिया और सभी को पास के पेड़ों के पीछे छुपने को कह दिया। सभी बंदर रोज की तरह आये। शरारती बंदर सबसे पीछे था। अचानक से उस बंदर की नजर उस बर्तन पर गयी जिसमे मूंगफली रखा था।

 

 

 

 

 

बंदर ख़ुशी से उछल पड़ा और बर्तन की तरफ चला गया। उसने जैसे ही उसमे अपना हाथ मूंगफली निकालने के लिए डाला। उसका हाथ फंस गया।

 

 

 

 

उसने अपना हाथ निकालने की बहुत कोशिश  की लेकिन उसका हाथ नहीं निकला। वह परेशान हो गया। तभी सभी किसान वहां आ गए। सभी किसानों के डर से भाग गए। लेकिन उस शरारती बंदर को किसानों ने पकड़ लिया।

 

 

 

 

 

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