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James Hadley Chase Novels in Hindi Pdf

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मित्रों इस पोस्ट में James Hadley Chase Novels in Hindi Pdf दिया गया है। आप नीचे की लिंक से James Hadley Chase Novels in Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Utkarsh Shrivastav Novel in Hindi Pdf कर सकते हैं।

 

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James Hadley Chase Novels in Hindi Pdf Download

 

 

 

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James Hadley Chase Novels in Hindi Pdf
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James Hadley Chase Novels in Hindi Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

 

हरी सभी विद्वानों को अपने गले में पहने हुए कीमती आभूषण उतारकर इनाम स्वरुप प्रदान करने लगे। वह जितने भी आभूषण इनाम स्वरुप प्रदान करते थे उतने ही उनके गले के आभूषण अक्षय रूप से बढ़ते चले जाते थे। यह रहस्य कोई नहीं जान सका जबकि इसका कारण भी वह मटके वाली अदृश्य परी ही थी।

 

 

 

 

सभासदो और नागरिको के बैठने के पश्चात् राजा का चाटुकार दीनू सबके समक्ष बोला – महाराज हरी को हमारे महाराज जयंत की तरफ से संबोधित किया जाता है कि हमारे महाराज का अपने पूरे परिवार के साथ भोजन का निमंत्रण स्वीकार करे अथवा महाराज जयंत को उनके परिवार के साथ अपने यहां भोजन का निमत्रण प्रदान करे।

 

 

 

 

इसके साथ ही एक शर्त है। निमंत्रण में किसी भी वस्तु की आपूर्ति नहीं होने पर निमंत्रक को पराजय स्वीकार करनी होगी और उसके पूरे परिवार तथा राज्य पर विजेता का अधिकार होगा। सभा में उपस्थित कई गण मान्य लोगो को समझ आ गया था कि दीनू राजा की आज्ञा से हरी को अपने से तुच्छ साबित करना चाहता है।

 

 

 

 

उन्हें इस बात का जरा भी दुःख नहीं था लेकिन राजाज्ञा के खिलाफ कौन बोल सकता था? दीनू की बात से राज सभा में काना फूसी होने लगी। कई लोग कह रहे थे कि अब तो हरी को राजा का गुलाम बनना पड़ेगा लेकिन भाग्य को तो कुछ और ही मंजूर था।

 

 

 

 

भाग्य तो दीनू की चाटुकारिता का अंत करना चाहता था। इसलिए ही उसने हरी के मुख से कहलवा दिया – महाराज जयंत और उनके राज्य की सभी जनता को मैं अपने यहां हरिवंश पुर में भोजन करने का निमंत्रण देता हूँ आपकी शर्त भी हमे मंजूर है।

 

 

 

 

आप लोग कल ही पधार कर हमे सेवा का मौका प्रदान करे। सभा में मौन व्याप्त हो गया। दीनू की हालत उस उल्लू की तरह हो गयी जो सूरज की रोशनी देखकर छिप जाता है। दीनू सोच रहा था कि हरी इस शर्त से पलायन करने के लिए व्यग्र हो जायेंगे।

 

 

 

 

लेकिन यहां तो दूसरे दिन ही भोजन करने की चुनौती निमंत्रण के रूप में प्राप्त हो गयी थी। हरी दरबार से बाहर निकले वहां सुनहरा रथ उनका इंतजार कर रहा था। दूसरे दिन सुबह से ही दीनू पूर्ण उत्साह के साथ राजा जयंत के राज्य में ढिंढोरा पिटवा दिया।

 

 

 

 

सभी राजनिवासियो को राजा के साथ हरिवंश पुर में भोज का निमंत्रण है और सबको साथ लेकर दोपहर में ही प्रस्थान करना है। दीनू का विचार था कि दोपहर में ही पहुँच जाने पर हरी असंख्य आदमियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर पाएंगे और इस प्रकार से पहले प्रयास में ही उनका अपमान हो जायेगा।

 

 

 

 

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