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Jaisa Tum Sochte Ho Book Pdf Free / जैसा तुम सोचते हो Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Jaisa Tum Sochte Ho Book Pdf देने जा रहे हैं और आप नीचे की लिंक से Jaisa Tum Sochte Ho Book Pdf Free Download कर सकते हैं।

 

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Jaisa Tum Sochte Ho Book Pdf / जैसा तुम सोचते हो पीडीएफ 

 

 

जैसा तुम सोचते हो पीडीएफ डाउनलोड 

 

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Jaisa Tum Sochte Ho Book Pdf Free
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

ब्रह्मा के दिन में जीव का व्यक्त होना – जब ब्रह्मा के दिन का शुभारंभ होता है तब सारे जीव अव्यक्त अवस्था से व्यक्त होते है और जब ब्रह्मा की रात्रि आती है तब सारे जीव पुनः अव्यक्त में विलीन हो जाते है।

 

 

 

 

19- जीव का प्रकट तथा अप्रकट होना – यहां कृष्ण जी अर्जुन को समझाते हुए कहते है – जब ब्रह्मा का दिन आता है तो सारे जीव प्रकट होते है और ब्रह्मा की रात्रि होते ही असहायवत विलीन हो जाते है।

 

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – अल्पज्ञानी पुरुष जो भौतिक जगत में बने रहना चाहते है, उच्चतर लोको को प्राप्त कर सकते है, किन्तु उन्हें पुनः इस धरा लोक पर आना होता है।

 

 

 

 

किन्तु जो बुद्धिमान व्यक्ति कृष्ण भावनामृत स्वीकार करते है, वह इस मनुष्य जीवन का उपयोग भगवान की भक्ति करने में तथा हर कृष्ण मंत्र के कीर्तन में बिताते है, इस प्रकार वह इसी जीवन में कृष्ण लोक को प्राप्त होते है और वह पुनर्जन्म के चक्कर से मुक्त होकर सतत आनंद का अनुभव करते है।

 

 

 

 

अज्ञानी जीव ब्रह्मा का दिन होने पर इस जगत के उच्चतर तथा निम्नतर लोको में अपने कार्यो का प्रदर्शन करते है किन्तु ब्रह्मा की रात्रि होने पर विनष्ट हो जाते है।

 

 

 

 

भूत्वा-भूत्वा प्रलीयते – दिन के समय प्रकट होते है और रात्रि होने पर पुनः विनष्ट हो जाते है। अंततोगत्वा जब ब्रह्मा का जीवन समाप्त होता है तो उन सभी जीवो का संहार हो जाता है और वह करोडो वर्षो तक अप्रकट रहते है।

 

 

 

 

दिन में उन्हें भौतिक कार्यो के लिए नाना प्रकार के शरीर धारण करने होते है। किन्तु ब्रह्मा की रात्रि होते ही उनके शरीर विष्णु के शरीर में विलीन हो जाते है। अन्य कल्प में ब्रह्मा का पुनर्जन्म होने पर सारे जीव पुनः प्रकट होते है इस प्रकार वह भौतिक जगत के जादू से मोहित होते रहते है।

 

 

 

 

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