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Ibne Safi Novels in Hindi Pdf / जासूसी दुनिया नॉवेल Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Ibne Safi Novels in Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Ibne Safi Novels in Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Nirmala Novel Premchand Pdf कर सकते हैं।

 

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Ibne Safi Novels in Hindi Pdf Download

 

 

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कुए का राज नॉवेल यहां से डाउनलोड करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

 

क्या पता फिर मनुष्य जीवन और इतना सुनहरा अवसर ईश्वर प्रदान करेंगे या नहीं। इतना ही नहीं अगर आपके बच्चे हमारा व्यापार संभालना चाहेंगे तो मैं उन्हें पूरा सौप दूंगा। अब फैसला आपको करना है। रघु सोच रहा था कि वह आज प्रताप को क्या उपाधि प्रदान करे उसे शब्द ही नहीं मिल रहे थे।

 

 

 

 

प्रताप बोला एक बात आपको और बताता हूँ – अगर वह पंद्रह हजार रुपये आप नहीं खर्च कर पाए तो वह भी आपका होगा दूसरे महीने में आपको फिर उतनी ही रकम मिलेगी आप उत्तर दो रघु भाई ‘हां या ना’ सिर्फ दो शब्दों में, मैं जानता हूँ कि गांव में ज्यादातर आदमी ईमानदार ही होते है बेईमानो का प्रतिशत कम ही रहता है और आप तो हमारे बचपन के दोस्त हो।

 

 

 

रघुराज, प्रताप, निशा, विपिन, सरिता, कोमल के साथ ही कंचन यह लोग आपस में बातें कर रहे थे। रघु बोला – प्रताप क्या तुम्हे गांव की याद आती है क्योंकि अब तुम बड़े आदमी हो गए हो। प्रताप बोला – मैं कितना भी बड़ा क्यों न हो जाऊं हमे गांव की याद हमेशा आती है।

 

 

 

 

अपने ही गांव की नहीं अगल-बगल के गांव की याद भी आती है और गांव की याद ही हमे यहां तक खींच लायी है। अच्छा यह बताओ प्रताप – तुम्हारी पारिवारिक जिंदगी कैसी है। रघु पूछ बैठा – कुछ देर चुप रहने के पश्चात सब मिलाकर ठीक है।

 

 

 

हमारी धर्मपत्नी ने हमारा साथ छोड़ दिया। एक बेटी थी निशा मैं तो अपने कर्तव्य को पूरा कर चुका लेकिन ईश्वर ने अपना कर्तव्य नहीं पूरा किया। लेकिन हमारा परिवार बहुत ही बड़ा है। 125 आदमियों का परिवार है हमारा – क्या मतलब प्रताप?

 

 

 

 

जरा सरल भाषा में समझाओ हम लोग देहात के रहने वाले सरल भाषा ही समझते है। तो आप सरल भाषा में समझिए – हमारी पत्नी भगवान के यहां चली गयी मैं अकेला हो गया पिता जी का कपड़ा प्रेस करने का व्यवसाय था उसे भगवान ने इतना बड़ा कर दिया कि उसमे 125 आदमी काम करते है।

 

 

 

 

वही सब हमारे सुख-दुःख के साथी रहते है। एक लड़की थी निशा वह पढ़ लिखकर डा. बन गयी सरकारी अस्पताल में। लड़कियां तो हमेशा माँ बाप के साथ रहती नहीं सो उसे भी अपने घर जाना पड़ा जो आपके सामने आज बैठी है वही निशा है।

 

 

 

 

यहां भगवान ने उसके साथ भी इंसाफ नहीं किया। एक रिटायर्ड फौजी ऑफिसर की पत्नी है लेकिन इन दोनों के अलावा उनका कोई नहीं है। लेकिन यह छोटी सी बच्ची और यह औरत। कोमल की तरफ इशारा करते हुए रघु ने पूछा था।

 

 

 

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