RatRating 25 + Hindi Suspense Novels Pdf Free / हिंदी सस्पेंस थ्रिलर नोवेल्स पीडीएफ फ्री

25 + Hindi Suspense Novels Pdf Free / हिंदी सस्पेंस थ्रिलर नोवेल्स पीडीएफ फ्री

Hindi Suspense Novels PDF मित्रों इस पोस्ट में हिंदी नॉवेल्स के बारे बताया गया है।  आप नीचे की लिंक से हिंदी सस्पेंस उपन्यास डाउनलोड कर सकते हैं।

 

 

 

Hindi Suspense Novels PDF Free Download

 

 

 

 

 

 

1- Suspense Novel Hindi Rakt Mandal / रक्त मंडल नावेल फ्री डाउनलोड

 

2- अद्भूत हिंदी सस्पेंस थ्रिलर नावेल 

 

3- Suspense Novel in Hindi Free Download / अण्डमान के पिशाच नावेल

 

4- Best Suspense Novel Hindi / जहन्नुम की अप्सरा इब्ने सैफई

 

5-  R Wing Part – 2 नोवेल्स

 

6- R-Wing भाग 1 हिंदी नोवेल्स फ्री डाउनलोड

 

7- Karn Ki Atmkatha By Manu Sharma / कर्ण की आत्मकथा फ्री डाउनलोड

 

8- Ravan Aryavrat Ka Shatru Novel Free Download / रावण आर्याव्रत का शत्रु

 

9- Sita Mithila Ki Yoddha By Amish Tripathi / सीता मिथिला की योद्धा

 

11- विषकन्या 

 

 

 

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1- Case No. 56

 

2- साज़िश (Hindi Edition)

 

3- Ek Rahasya ka Khulasa – A Secret Revealed (Hindi) (Hindi Edition)

 

4- Hadse ki Raat (Thriller Novel) (Hindi Edition)

 

5- Railgadi Ka Bhoot रेलगाड़ी का भूत 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए 

 

 

 

यह तीन अक्षर का शब्द “नायक” इतना ऊर्जावान है कि इसके सामने बड़ी से बड़ी हुकूमतें कांपती है। जो कुशल नेतृत्व करता है उसी को दुनिया याद रखती है, कुशल नेतृत्व करना आसान नहीं है। नायक बनने के लिए अपने समाज की भलाई को देश की भलाई को सर्वोपरि रखना पड़ता है।

 

 

 

 

 

जैसे – अमर नायक महाराणा प्रताप,  कुशल नायक चंद्रशेखर आजाद ऐसे न जाने कितने है, जिनका यह देश सदैव ऋणी सहेगा।

 

 

 

 

 

बिपिन के नेतृत्व में ग्रामीणों का हुजूम तहसील प्रांगण में उमड़ता जा रहा था। तहसील प्रांगण में तिल रखने भर की जगह नहीं थी। तहसीलदार और नायब तहसीलदार के पसीने छूट रहे थे। जनता को कंट्रोल करना सिपाहियों के बस में नहीं था।

 

 

 

 

 

जनता की बस एक ही आवाज थी। लेखपाल की घूसखोरी  और बिजली विभाग की सीना जोरी नहीं चलेगी। हर बार ही लेखपाल की बोहनी करनी पड़ती थी, खेत की नकल मांगने पर और बिजली विभाग तो एकदम तानाशाह है हिटलर के जैसा बर्ताव रखता है।

 

 

 

 

 

इन लोगों से जनता बहुत ही परेशान थी। बिजली विभाग जो मन में आया वही बिल भेज देते है, जिससे जनता परेशान हो जाती है। बहुत बड़ा बिल साधारण जनता के लिए भरना संभव नहीं था। इस कारण से विपुल उनकी अगुवाई कर रहा था।

 

 

 

 

 

भावार्थ- अपने अधिकार और वर्तमान के प्रति जागते रहने से ही सफलता मिलती है।

 

 

 

 

 

कलाकार हिंदी कहानी 

 

 

Hindi Suspense Novels Pdf
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रमेश एक छोटे से शहर में रहता था। शहर के कुछ ही दूरी पर पहाड़ था। वहां कोई भी आता जाता नहीं था। एक दिन रमेश घूमते हुए उस पहाड़ की तरफ गया।

 

 

 

 

वह जगह उसे बहुत अच्छी लगी। वह अच्छे-अच्छे पत्थरो को देखकर उसमे से मूर्ति बनाने लगा। धीरे-धीरे उसकी कला देखने के लिए अन्य लोग भी आने लगे।

 

 

 

 

कुछ ही दिन में वहां बहुत सारे लोग उन मूर्तियों को देखने आने लगे। कुछ लोग उसकी कलाकारी को देखकर उसे पैसे भी देते थे।

 

 

 

 

धीरे-धीरे उसके पास बहुत पैसा इकट्ठा हो गया जिससे उसने एक धर्मस्थल का निर्माण करवा दिया और उसमे अपने द्वारा बनाए हुए मूर्तियों के रख दिया। लेकिन वह गरीब और असहाय लोगो की मदद नहीं करता था।

 

 

 

 

 

अचानक एक दिन रमेश की तबीयत खराब हो गई। उसने बहुत सारे डाक्टरों को दिखाया लेकिन वह ठीक नहीं हुआ। अब वह भगवान से कहने लगा, “हे, भगवान मैं हमेशा ही आपकी सेवा करता था आपकी अच्छी-अच्छी प्रतिमा बनाता था लेकिन आपने मुझे इस हाल में छोड़ दिया। मेरा क्या कसूर था।”

 

 

 

 

एक दिन रात्रि के समय भगवान ने उसे दर्शन दिया और कहा, “तुम मुझे किस लिए कोस रहे हो। यह सब तुम्हारे बुरे कर्मो का फल है। याद करो तुमने गरीब बेसहारो को कैसे भगा दिया था।”

 

 

 

 

इतना कहकर भगवान वहां से चले गए और उसकी नींद टूट गई और वह अपने द्वारा किए गए बुरे कर्मो को सोचकर बहुत निराश हो गया था। अब आँखे खुल चुकी थी। वह गरीब बेसहारो की सहायता करने लगा।

 

 

 

किस्मत के दो पहलू

 

 

 

एक बार एक साधु नगर के चौराहे पर बैठकर आने जाने वालो से अपनी मदद की गुहार लगा रहा था, लेकिन उसकी बात के ऊपर कोई ध्यान नहीं दे रहा था।

 

 

 

 

साधु के पास कुछ लोग खड़े हो गए थे और कुछ लोग पैसे भी दे रहे थे, लेकिन साधु संतुष्ट नहीं था। वह सभी से कह रहा था किस्मत के दो पहलू है एक मैं और एक तुम।

 

 

 

 

लेकिन साधु की यह बात किसी के समझ में नहीं आई। उधर से राजा की सवारी आने वाली थी। सभी लोग एक किनारे हट गए लेकिन साधु अपने स्थान पर ही जमा हुआ था।

 

 

 

 

साधु कहता जा रहा था किस्मत के दो पहलू है एक मैं और एक तुम। तभी राजा की सवारी वहां आ गई। उन्होंने साधु के द्वारा कही बात को गौर से सुन लिया था।

 

 

 

 

 

राजा ने सिपाहियों को आदेश दिया कि साधु महाराज को इज्जत के साथ दरबार में ले आओ। सिपाहियों ने साधु महाराज को इज्जत के साथ दरबार में लेकर गए।

 

 

 

 

अब राजा ने साधु से उसके द्वारा कही गई बात का अर्थ बताने के लिए कहा। तब साधु ने कहा, “राजन, किस्मत के दो पहलू अवश्य होते है। एक राजा के रूप में आप है और दूसरा मैं रंक के रूप में आपके सामने हूँ।”

 

 

 

 

साधु की बात से राजा बहुत खुश हुआ और उसे और भी सार गर्भित बातें बताने के लिए कहने लगा। साधु बोला, “राजन, इस समय हमारे बत्तीस नौकर हमे छोड़कर चले गए है।आपके जैसे हमारी भी पांच पटरानियां थी जो इस समय वृद्ध हो चुकी है। जिस तरह से आप सुंदर महल के मालिक है उसी तरह मैं भी एक सुंदर महल का मालिक था लेकिन अब वह महल जर्जर हो गया है और कभी भी गिर सकता है। हमारी तपस्या की ताकत इतनी है कि समुद्र भी हमे रास्ता प्रदान करता है। मैं समुद्र में ऐसी जगह आपको दिखा सकता हूँ जहां ढेर सारे हीरे जवाहरात है। अगर आप चाहे तो स्वयं ही देख सकते है।”

 

 

 

 

 

दरबार में उपस्थित किसी को भी यह बात समझ में नहीं आई। राजा साधु की बात का रहस्य समझ गया था। उसने साधु को दस अशर्फिया देने का आदेश दिया।

 

 

 

 

साधु ने कहा, “क्या आपके राज्य में भयंकर अकाल पड़ा था जो आप हमे केवल दस अशर्फी ही दे रहे है ?”

 

 

 

 

तब राजा ने साधु को एक सौ अशर्फिया देने का आदेश दिया। साधु ने एक सौ अशर्फियों के देखते ही खुश होकर बोला, “राजन, आपके राज्य में यह सौभाग्य का संकेत है।”

 

 

 

 

साधु राज दरबार से चला गया। तब राजा का मंत्री कहने लगा, “राजन, आपने उस साधु को इतनी अशर्फिया क्यों दे दिए ?”

 

 

 

 

राजा ने मंत्री से कहा, “मैं तुम सभी को साधु की बात का अर्थ समझाता हूँ। वह साधु भी कभी यौवन से पूर्ण था। जो उसका खूबसूरत महल था वृद्धावस्था के साथ ही उसका वह महल जीर्ण हो गया है। दूसरा उसके बत्तीस नौकर चले गए यानी कि उसके सभी दांत टूट चुके है। उसकी पांच पटरानि उसकी पांच इन्द्रिया थी जो अब कर्म करने में समर्थ नहीं है। समुद्र से मतलब हमारा राज्य है जहां साधु संतो की भरपूर सेवा होती है।”

 

 

 

 

राजा की बात सुनकर सभी दरबारी चुप हो गए। राजा ने उस साधु को बुलाकर अपना प्रधान सलाहकार बना लिया था।

 

 

 

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