Hindi Story Pdf Free Download / हिंदी स्टोरी Pdf Free Download

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Hindi Story Pdf Free हिंदी स्टोरी Pdf Free Download

 

 

 

 

 

 

1- झूठी ख्याति

 

2- सबसे बड़ा धन 

 

3- अहंकार

 

4- बदमाश बंदर 

 

5- नसीब 

 

6- संगठन की शक्ति 

 

7- सीरियल की लत

 

8- वंश बेल 

 

9- सच्चा साथी

 

10- लकड़हारा

 

11- ईमानदारी का फल 

 

12- सच्ची दोस्ती 

 

13- जीवन की सच्ची ख़ुशी

 

14- बुरा सोचने का फल 

 

15- गलती का एहसास 

 

 

 

Panchatantra Stories in Hindi Pdf Free

 

 

101 Panchatantra Stories in Hindi Pdf Free Download

 

 

Bedtime Stories in Hindi PDF Free

 

 

1- विश्वास ही सबसे बड़ी भक्ति है। 

 

2- उपकार

 

3- सच्चाई की जीत 

 

4- परीलोक

 

5- कण-कण में भगवान

 

6- सच्चा विश्वास

 

7- कर्तव्य 

 

8- अवसर 

 

9- मित्रता

 

10- लकीर

 

 

 

बांके बिहारी की कहानी Hindi Stories Pdf

 

 

 

एक गांव में एक किसान रहता था। वह बहुत मेहनत करता था। लेकिन लक्ष्मी की उसके ऊपर कृपा नहीं होती थी। वह किसान एक दिन एक महात्मा के पास जाकर अपनी परेशानी बताने लगा।

 

 

 

 

महात्मा जी बहुत कोमल स्वभाव के थे। वह किसान की बात सुनकर द्रवित हो गए। महात्मा जी किसान से बोले, “मैं तुम्हारी कठिनाइयों का निवारण तो नहीं कर पाऊंगा लेकिन मैं तुम्हे बांके बिहारी के पास ले जाऊंगा। तुम उन्हें अपनी कठिनाइया बता देना वह तुम्हारी सहायता अवश्य ही करेंगे क्योंकि जो भी उनके पास जाता है कभी खाली हाथ वापस नहीं आता है।”

 

 

 

 

महात्मा जी बांके बिहारी के भक्त थे। वह किसान को लेकर बांके बिहारी के मंदिर में गए। किसान वहां जाकर बांके बिहारी को अलपक निहारता ही रह गया। तभी बांके बिहारी के बिश्राम का समय हो गया था।

 

 

 

 

मुख्य पुजारी ने बांके बिहारी के भवन का दरवाजा बंद कर दिया था। लेकिन किसान तो बांके बिहारी की सुंदरता पर रीझ गया था। वह रुककर भवन का दरवाजा खुलने की राह देखने लगा।

 

 

 

 

कुछ समय के बाद मुख्य पुजारी ने दरवाजा खोला तब किसान काफी देर तक बांके बिहारी को निहारता रहा। अब किसान अपने घर लौट कर आ गया था।

 

 

 

 

किसान की हालत धीरे-धीरे अच्छी होने लगी थी। एक दिन किसान के गांव का एक आदमी बांके बिहारी का दर्शन करने जा रहा था।

 

 

 

 

तब वह किसान उस आदमी को 500 रुपये देते हुए बोला, “भाई तुम इस पैसे से बांके बिहारी के लिए पोशाक बनवाकर हमारी तरफ से अर्पित कर देना और उनके भोग लगाने का भी प्रबंध कर देना।”

 

 

 

 

वह आदमी बांके बिहारी के दर्शन के लिए चला गया। बांके बिहारी मंदिर पहुंचकर उस आदमी ने किसान द्वारा दिए पैसे से एक गुलाबी रंग की पोशाक बनवाकर बांके बिहारी को समर्पित किया और भोग लगाने का प्रबंध भी किया।

 

 

 

 

लेकिन इस कार्य में उसके अपने भी 280 रुपये खर्च हो गए थे। उस गुलाबी पोशाक में बांके बिहारी की सुंदरता बहुत ही भव्य लग रही थी।

 

 

 

 

उसी दिन रात में बांके बिहारी ने किसान को स्वप्न में दर्शन दिया और बोले, “तुमने हमारे लिए जो गुलाबी रंग की पोशाक अर्पण करवाई थी उसे मैंने स्वीकार किया है और तुम्हारे द्वारा अर्पित भोग भी मैंने स्वीकार कर लिया है। लेकिन तुमने जिस आदमी से हमारे लिए यह सब कुछ करवाया है उसके 280 रुपये ज्यादा लग गए है। तुम उस व्यक्ति को वह पैसे अवश्य ही लौटा देना।”

 

 

 

 

दूसरे दिन वह आदमी लौटकर आया तब किसान उसे 280 रुपये देने लगा। तब उस आदमी ने पूछा, “किस लिए यह पैसे मुझे दे रहे हो ?”

 

 

 

तब किसान बोला, “हमे बांके बिहारी ने दर्शन देकर कहा मैं तुम्हे 280 रुपये लौटा दूँ। बांके बिहारी जी गुलाबी रंग की पोशाक पहने हुए थे।”

 

 

 

 

तब उस आदमी को विश्वास हो गया कि बांके बिहारी ने किसान को दर्शन दिए है क्योंकि वह आदमी वही गुलाबी पोशाक बांके बिहारी को अर्पण कर आया था। किसान की ऐसी भक्ति देखकर वह आदमी किसान के सामने नतमस्तक हो गया था।

 

 

 

गधा बेचना है Story in Hindi Pdf

 

 

 

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एक रामू नाम का कुम्हार था। उसके पास दो गधे थे। वह उन गधो से मिट्टी लादकर ले आता था और बर्तन बनाकर बाजार में बेच देता था। उस मिट्टी के बर्तन से जो आय हो जाती उसी में अपना गुजारा करता था।

 

 

 

 

रामू का एक गधा बहुत कामचोर था। वह रामू का बहुत नुकसान करता था। कभी मिट्टी लादते समय उछल जाता कभी बर्तन लेकर जाते समय मिट्टी के बर्तनो को गिरा देता था।

 

 

 

 

जिससे रामू के बर्तन टूट जाते थे और उसे बहुत हानि उठानी पड़ती थी। इसलिए रामू उससे कोई काम नहीं लेता था और चिढ़कर गधे को मारता था।

 

 

 

 

गधा मार खा कर भी खुश था क्योंकि उसे काम नहीं करना पड़ता था और कम ही सही खाना भी मिल जाता था। एक दिन रामू अपने घर के सामने एक बोर्ड लिखकर टांग दिया।

 

 

 

 

उसपर लिखा था ‘गधा बेचना है।’ एक दिन खुशीराम नामक धोबी अपने गधो पर कपड़ा लादकर जा रहा था तो उसकी निगाह उस बोर्ड के ऊपर पड़ी जिसपर लिखा था ‘गधा बेचना है।’

 

 

 

 

खुशीराम ने रामू को आवाज लगाई। रामू आवाज सुनकर बाहर आया और पूछने लगा, “क्या बात है ?”

 

 

 

खुशीराम बोला, “हमे एक गधे की आवश्यकता है क्या तुम अपने गधे को बेचोगे ?”

 

 

 

रामू बोला, “अवश्य ही बेचूंगा लेकिन सोच लो तुम चाहे जो भी पैसे दोगे मैं ले लूंगा। लेकिन बेचने के बाद मैं इस गधे को वापस नहीं लूंगा क्योंकि यह गधा आलसी है।”

 

 

 

 

खुशीराम ने कम कीमत देकर रामू के गधे को खरीद लिया। सोचा कि उसे सुधारकर फायदे में आ जाऊंगा। उधर रामू आलसी गधे को बेचकर खुश था कि उसकी मुसीबत टल गई।

 

 

 

 

खुशीराम अपने गधे के बीच नए गधे को बांध दिया था। रात में खुशीराम की नींद खुल गई तो देखा सभी गधे तो आपस में बात कर रहे है।

 

 

 

 

आलसी गधा बोला, “मैं अपने मालिक के पास कुछ भी नहीं करता था लेकिन मुझे खाने के लिए घास अवश्य ही मिलती थी और साथ में डंडा भी।”

 

 

 

 

खुशीराम का गधा बोला, “तब यहां क्यों मरने के लिए आ गया। यहां तो मेहनत भी करनी पड़ती है खाना भी ढंग से नहीं मिलता और साथ में डंडा भी खाना पड़ता है।”

 

 

 

 

आलसी गधा बोला, “तुम्हारे मालिक ने हमारे मालिक को पूरा पैसा भी नहीं दिया है।”

 

 

 

 

खुशीराम का गधा बोला, “ठीक है तुम्हे कल ही यहां का माहौल पता लग जाएगा।”

 

 

 

 

दूसरे दिन खुशीराम ने आलसी गधे को काम पर लगा दिया। लेकिन आलसी गधे ने खुशीराम का अपने स्वभाव के अनुसार कपड़ो के गट्ठर को पानी में गिरा दिया।

 

 

 

 

अब तो खुशीराम ने उस आलसी गधे को खूब मारा और रामू के पास आलसी गधे को वापस कर दिया और बिना पैसे लिए ही वापस चला गया।

 

 

 

 

अब आलसी गधे ने अपनी आदत को बदल दिया था और खूब मन लगाकर रामू के साथ काम करता था। आलसी गधे की बदली हुई आदत देखकर रामू हैरान भी था और खुश भी।

 

 

 

 

हैरान इसलिए कि गधा सुधर गया था और खुश इसलिए कि भले कम ही सही पैसे लौटाने की नौबत नहीं आई थी।

 

 

 

 

बाल गणेश और चंद्रमा की कहानी Hindi Kahani Pdf

 

 

 

एक बार गणेश जी अपने वाहन मूषक पर सवार होकर एक पात्र में लड्डू लिए हुए जा रहे थे तभी सामने से एक सांप आ गया था। मूषक उस सांप को देखकर डर गया।

 

 

 

 

वह खुद को बचाते हुए जाने लगा। खुद को सुरक्षित करने के प्रयास में गिर गया और उसके ऊपर सवार गणेश जी अपने प्रिय भोजन लड्डू के साथ ही गिर पड़े।

 

 

 

 

गणेश जी का सारा लड्डू जमीन पर बिखर गया था। रात्रि का समय था। चंद्रमा अपने पूरे सौंदर्य के साथ ही आकाश में विचरण कर रहा था।

 

 

 

 

उसने देखा गणेश जी अपने वाहन मूषक के साथ जमीन पर गिरे हुए लड्डू उठाने का प्रयास कर रहे है। यह देखकर चंद्र देव ने व्यंगबाण छोड़ दिया।

 

 

 

 

चंद्र देव कहने लगे, “इतने मोटे गणेश जी और साथ में लड्डू का भार बेचारा मूषक इतना भार कैसे उठाएगा ?”

 

 

 

 

यह कह चंद्र देव हंसने लगे और गणेश जी का उपहास करने लगे। चंद्र देव पुनः अपनी सुंदरता का बखान करने लगे। देखो हमारी चांदनी कितनी शीतल और सुंदर है और हमारे रूप का तो कोई भी मुकाबला नहीं कर सकता है।

 

 

 

 

इतना कहकर चंद्र देव गणेश जी को लक्षित करके हंसने लगे। अपना उपहास करता देखकर गणेश जी ने चंद्र देव को श्राप दे दिया, “जाओ तुम्हारा रंग काला हो जाएगा और तुम्हारी तरफ जो कोई भी देखेगा वह शापित हो जाएगा।”

 

 

 

 

इतना कहते ही चंद्र देव का बदन काला पड़ गया और उनकी चांदनी एकदम नीरस हो गई। जिस कारण से रात्रि भी काली हो गई थी।

 

 

 

अपनी यह दशा देखकर चंद्र देव दौड़कर गणेश जी के पास आया और उनसे अपनी भूल के लिए क्षमा याचना करने लगा। तभी मूषक बोला, “गणेश जी इसमें हमारी भी तो गलती है। हमारी गलती से आप और मैं दोनों गिर पड़े थे। आप चंद्र देव को क्षमा कर दीजिए।”

 

 

 

तभी चंद्र देव ने गणेश जी से कहा, “आप तो प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता है। इसलिए आप हमे क्षमा कर दीजिए।”

 

 

 

गणेश जी मूषक की बात सुनकर बोले, “हमारा श्राप निष्फल तो नहीं हो सकता है थोड़ा कम अवश्य हो जाएगा।”

 

 

 

गणेश जी ने चंद्र देव से कहा, “अपने दिए हुए श्राप को वापस नहीं कर सकता हूँ। मैं उसे कम अवश्य कर दूंगा।”

 

 

 

गणेश जी बोले, “जो व्यक्ति तुम्हे देखने के पश्चात् हमारी पूजा करेगा उसे श्राप का दुष्प्रभाव नहीं झेलना पड़ेगा। लेकिन याद रखना भविष्य में किसी का भी उपहास नहीं करना।”

 

 

 

गणेश जी ने चंद्र देव को चेतावनी देकर छोड़ दिया। फिर गणेश जी के आशीर्वाद से चंद्र देव अपने पहले स्वरूप में आ गए और चारो तरफ चांदनी की छटा निखर गई थी।

 

 

 

गौरी पुत्र गणेश Story Hindi Pdf

 

 

 

एक बार माता गौरी स्नान करने गई तब उन्होंने अपने पुत्र गणेश से कहा, “पुत्र गणेश मैं स्नान करने जा रही हूँ तुम द्वार के सामने रहकर देखना। बिना हमारी आज्ञा के कोई भी अंदर नही आने पावे।”

 

 

 

 

गणेश जी ने कहा, “जो आज्ञा माँ, आप निश्चिंत होकर स्नान करने के लिए जाइए।”

 

 

 

 

गणेश जी खुद द्वार पर आकर घर की रखवाली करने लगे। इतने में ही भगवान भूतभावन महादेव अपने वाहन नंदी के साथ वहां आ गए।

 

 

 

 

भगवान शंकर घर के अंदर प्रवेश करने लगे तो द्वार पर खड़े गणेश ने उन्हें रोक दिया। महादेव ने कहा, “यह घर मेरा है। तुम कौन हो बालक जो हमे अपने घर में जाने से रोक रहे हो ?”

 

 

 

 

बालक गणेश ने कहा, “मैं गौरी पुत्र गणेश हूँ और माता गौरी का आदेश है। कोई भी अंदर नहीं जा सकता है। मैं आपको रोकने के लिए विवश हूँ, कृपया आप थोड़ा इंतजार कर लीजिए।”

 

 

 

 

देवाधिदेव महादेव ने कहा, “यह घर मेरा है तो मैं क्यों रुकू भला ?”

 

 

 

 

गणेश और महादेव में विवाद इतना बढ़ गया कि महादेव ने क्रोध में आकर अपने अमोघ अस्त्र त्रिशूल से वार कर दिया। त्रिशूल के प्रहार से बालक गणेश का मस्तक कटकर भस्म हो गया।

 

 

 

 

तभी माता गौरी बाहर आ गई और अपने प्रिय पुत्र का बियोग नहीं सह पाई और क्रोध में भरकर बोली, “महादेव आपने यह अच्छा कार्य नहीं किया है। हमारे ही कहने पर गणेश यहां रहकर द्वार की रखवाली कर रहा था। आप हमारे पुत्र को जीवित कीजिए अन्यथा मैं सब कुछ जलाकर राख कर दूंगी। मैं अपने प्रिय पुत्र का बियोग सहन नहीं कर सकती हूँ।”

 

 

 

 

इतना कहकर गौरी अपने भयानक रूप में आ गई थी। महादेव ने कहा, “हमसे भूल हुई है, आप हमे क्षमा करे। मैं गणेश को पहले वाले रूप में जीवित नहीं कर सकता क्योंकि उसका सिर तो भस्म हो चुका है। मैं उसे दूसरे रूप में जीवन अवश्य दे सकता हूँ।”

 

 

 

 

“मुझे मेरा पुत्र जीवित अवस्था में चाहिए महदेव।” गौरी अपने भयानक रूप में गरजते हुए बोली तो सभी देवताओ की आत्मा तक कांप गई अन्य जीवो की तो बिसात ही क्या थी।

 

 

 

 

महादेव ने नंदी को आदेश दिया, “नंदी तुम जाओ जो भी जीव तुम्हे पहले मिले उसका मस्तक काटकर लाओ।”

 

 

 

 

नंदी गया उसे प्रथम एक हाथी का बच्चा मिला। उसने हाथी का सिर काटकर महादेव के सामने लाया। महादेव ने उस मस्तक को गणेश के धड़ से जोड़कर नया जीवन प्रदान किया।

 

 

 

 

अब भगवती गौरी का क्रोध शांत हो चुका था। महादेव ने भगवती गौरी को प्रसन्न करने के लिए गणेश को आशीर्वाद दिया। आज से गणेश की हर शुभ कार्य के पहले सबसे पहले पूजा होगी और तभी से गणेश जी प्रथम पूज्य हो गए।

 

 

 

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