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हवन सामग्री की लिस्ट pdf / Havan Samagri List Pdf Hindi

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Havan Samagri List Pdf Hindi देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Havan Samagri List Pdf Hindi download कर सकते हैं और आप यहां से शरद पूर्णिमा व्रत कथा Pdf कर सकते हैं।

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Havan Samagri List Pdf Hindi

 

पुस्तक का नाम  Havan Samagri List Pdf Hindi
फॉर्मेट  Pdf 
भाषा  हिंदी 
साइज  0.67 Mb 
पृष्ठ 
श्रेणी 

 

 

 

हवन सामग्री की लिस्ट pdf Download

 

 

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Havan Samagri List Pdf Hindi
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

इस अवसर पर महान कौतुक प्रदर्शन करने वाले स्वामिकार्तिक ने तुरंत ही वीरबाहु द्वारा कहलाकर उस युद्ध को रोक दिया। तब स्वामी की आज्ञा से वीरभद्र उस समय युद्ध से हट गए। यह देखकर असुर सेनापति महावीर तारक कुपति हो उठा।

 

 

 

वह युद्ध कुशल तथा नाना प्रकार अस्त्रों का जानकर था अतः देवताओ को ललकार-ललकारकर उनपर वार करने लगा। उस समय बलवानो में श्रेष्ठ असुरराज तारक ने ऐसा महान कर्म किया कि सारे देवता मिलकर भी उसका सामना न कर सके।

 

 

 

उन भयभीत देवताओ को यों पिटते हुए देखकर भगवान अच्युत को क्रोध हो आया और वे शीघ्र ही युद्ध करने के लिए तैयार हो गए। उन भगवान श्री हरि ने अपने आयुध सुदर्शन को लेकर युद्ध स्थल में महादैत्य तारक पर आक्रमण किये। मुने! तदनन्तर सबके देखते-देखते श्री हरि और तारकासुर में अत्यंत भयंकर एवं रोमांचकारी महायुद्ध छिड़ गया।

 

 

 

इसी बीच अच्युत ने कुपित होकर महान सिंहनाद किया और धधकती हुई ज्वालाओ के से प्रकाश वाले अपने चक्र को उठाया। फिर तो श्री हरि ने उसी चक्र से दैत्यराज तारक पर प्रहार किया। उसकी चोट से अत्यंत व्यथित होकर वह असुर धरती पर गिर पड़ा।

 

 

 

परन्तु वह असुर नायक तारकक अत्यंत बलवान था अतः तुरंत ही उठकर उस दैत्यराज ने अपनी शक्ति से चक्र के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। मुने! भगवान विष्णु और तारकासुर दोनों बलवान थे और दोनों में अगाध बल था अतः युद्धस्थल में वे परस्पर जूझने लगे।

 

 

 

 

तब ब्रह्मा जी ने कहा – शंकरसुवन स्वामी कार्तिक! तुम तो देवाधिदेव हो। पार्वती सुत! विष्णु और तारकासुर का यह व्यर्थ युद्ध शोभा नहीं दे रहा है क्योंकि विष्णु के हाथो इस तारक की मृत्यु नहीं होगी। यह मुझसे वरदान पाकर अत्यंत बलवान हो गया है। .यह मैं बिलकुल सत्य बात कह रहा हूँ।

 

 

 

पार्वती नंदन! तुम्हारे अतिरिक्त इस पापी को मारने वाला दूसरा कोई नहीं है इसलिए महाप्रभो! तुम्हे मेरे कथनानुसार ही करना चाहिए। परंतप! तुम शीघ्र ही उस दैत्य का वध करने के लिए तैयार हो जाओ क्योंकि पार्वती पुत्र! तारक का संहार करने के निमित्त ही तुम शंकर से उत्पन्न हुए हो।

 

 

 

ब्रह्मा जी कहते है – मुने! यों मेरा कथन सुनकर शंकर नंदन कुमार कार्तिकेय ठठाकर हंस पड़े और प्रसन्नता पूर्वक बोले – तथास्तु ऐसा ही होगा। तब महान ऐश्वर्यशाली शंकर सुवन कुमार तारकासुर के वध का निश्चय करके विमान से उतर पड़े और पैदल हो गए।

 

 

 

जिस समय महाबली शिवपुत्र कुमार अपनी अत्यंत चमकीली शक्ति को जो लपटों से दमकती हुई एक बड़ी उल्का सी जान पड़ती थी हाथ में लेकर पैदल ही दौड़ रहे थे उस समय उनकी अद्भुत शोभा हो रही थी। उनके मन में तनिक भी व्याकुलता नहीं थी।

 

 

 

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