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Hamjad Sadhna Book Pdf / हमजाद साधना बुक पीडीएफ

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Hamjad Sadhna Book Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Hamjad Sadhna Book Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  साधना से सिद्धि Pdf भी पढ़ सकते हैं।

 

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Hamjad Sadhna Book Pdf / हमजाद साधना बुक Pdf 

 

 

 

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Hamjad Sadhna Book Pdf
हमजाद साधना बुक पीडीएफ डाउनलोड 
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

आप तो काल को मानो मेरे लिए बार-बार हांक लगाकर बुला रहे है। लक्ष्मण जी के कठोर वचन सुनते ही, परशुराम जी ने अपने  को सुधारकर अपने हाथ में लिया।

 

 

 

2- परशुराम जी फिर बोले – अब मुझे लोग दोष न दे। यह कडुवा बोलने वाला बालक मारे जाने के योग्य ही है। इसे बालक समझकर मैंने इसे बहुत बचाया, लेकिन अब यह मरने का ही उपाय कर रहा है। विश्वामित्र जी ने कहा – अपराध क्षमा कीजिए। बालक के गुण और दोष को साधु लोग नहीं गिनते।

 

 

 

3- परशुराम जी बोले! तीखी धार वाला कुठार, मैं दया रहित और क्रोधी यह गुरुद्रोही और अपराधी मेरे सामने है। 4- उत्तर दे रहा है, इतने पर भी मैं इसे बिना मारे छोड़ रहा हूँ, सो हे विश्वामित्र! केवल तुम्हारे शील और प्रेम के कारण से। नहीं तो इसे इस कठोर कुठार से काटकर थोड़े परिश्रम से ही गुरु के ऋण से मुक्त हो जाता।

 

 

 

275- दोहा का अर्थ-

 

 

 

विश्वामित्र जी हृदय में हंसकर कहते है – मुनि को तो सर्वत्र विजय मिलने के कारण हर जगह हरा हरा ही दीख रहा है, वह राम लक्ष्मण को भी साधारण क्षत्रिय ही समझने की भूल कर रहे है।

 

 

 

किन्तु यह तो लोहा से निर्मित है, ऊख के रस की बनी हुई खांड नहीं है। जो मुंह में रखते ही विलीन अर्थात गल जाएगी। मुनि अभी भी वेसमझ बने हुए है, इनके (राम-लक्ष्मण के) प्रभाव को नहीं समझ रहे है।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- लक्ष्मण जी ने कहा – हे मुनि! आपके शील को कौन नहीं जानता? वह संसार भर में प्रसिद्ध है। आपने तो अपने माता-पिता का अच्छी तरह से ऋण चुकाया, अब तो गुरु का ऋण रह गया है। जिसका आपको बहुत सोच हो रहा है।

 

 

 

2- उसे आपने हमारे ऊपर ही मढ़ दिया। बहुत दिन बीत गए, उसका ब्याज भी बहुत बढ़ गया होगा, अब किसी हिसाब करने वाले को बुला कर लाइए, मैं तुरंत ही थैली खोलकर दे दूंगा।

 

 

 

3- लक्ष्मण जी के कडुवे वचन सुनकर परशुराम जी ने अपना कुठार संभाला। सारी सभा हाय! हाय! करते हुए पुकार उठी। तभी लक्ष्मण ने कहा – हे भृगु श्रेष्ठ! आप मुझे फरसा दिखा रहे है? पर हे राजाओ के शत्रु! मैं आपको ब्राह्मण समझकर बचा रहा हूँ।

 

 

 

4- आपको अभी तक रणधीर बलवान नहीं मिले। हे ब्राह्मण देवता! आप घर में ही बड़े है। यह सुनकर सभी लोग ‘अनुचित है’ कहनेलगे। तब श्री राम ने इशारा करते हुए लक्ष्मण जी को रोक दिया।

 

 

 

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