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Hadse Ki Rat Novel Pdf / हादसे की रात Novel Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Hadse Ki Rat Novel Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Hadse Ki Rat Novel Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  विषकन्या उपन्यास Pdf Download कर सकते हैं।

 

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Hadse Ki Rat Novel Pdf Download

 

 

पुस्तक का नाम Hadse Ki Rat Novel Pdf
पुस्तक के लेखक अमित खान 
भाषा हिंदी 
श्रेणी क्राइम, थ्रिलर, रहस्य उपन्यास 
फॉर्मेट Pdf
साइज 30 Mb
पृष्ठ 245

 

 

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हादसे की रात उपन्यास फ्री डाउनलोड 
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हे सगुण और निर्गुण रूप! हे अनुपम रूप लावण्य युक्त! हे राजाओ के शिरोमणि! आपकी जय हो। आपने रावण आदि प्रबल, प्रचंड और निशाचरो को अपनी भुजाओ के बल से अंत कर दिया।

 

 

 

आपने मनुष्य अवतार लेकर संसार के भार को नष्ट करके अत्यंत कठोर दुखो को समाप्त कर डाला। हे दयालु! हे शरणागत की रक्षा करने वाले प्रभो! आपकी जय हो। मैं शक्ति सहित शक्तिमान आपको नमस्कार करता हूँ।

 

 

 

हे हरे! आपकी दुस्तर माया के वशीभूत होने के कारण देवता, राक्षस, नाग, मनुष्य और चर-अचर सभी काल कर्म और गुणों से उनके वशीभूत हुए दिन रात अनंत भव आगमन के मार्ग में भटक रहे है। हे नाथ! इनमे से आपने कृपा करके कृपा दृष्टि से देख लिया।

 

 

 

वह माया जनित तीनो प्रकार के दुःख से छूट गए। हे जन्म-मरण के श्रम को समाप्त करने में कुशल श्री राम जी! हमारी रक्षा कीजिए। हम आपको नमस्कार करते है। जिन्होंने मिथ्या ज्ञान के अभिमान में विशेष रूप से मतवाले होकर जन्म मृत्यु के भय को हरने वाली आपकी भक्ति का आदर नहीं किया।

 

 

 

हे हरि! उन्हें देव दुर्लभ पद को प्राप्त होने के बाद भी हम उस पद के नीचे गिरते देखते है। परन्तु जो सब आशा को छोड़कर आप पर विश्वास करके आपके दास होकर रहते है वह केवल आपका नाम जपकर ही बिना परिश्रम के ही भवसागर से तर जाते है। हे नाथ! ऐसे हम आपका स्मरण करते है।

 

 

 

जो चरण शिव जी और ब्रह्मा जी के द्वारा पूज्य है तथा जिन चरणों की कल्याणमयी रज का स्पर्श प्राप्त करके शिला बनी हुई गौतम ऋषि की पत्नी अहल्या तर गयी।

 

 

 

जिन चरणों के नख से मुनियो द्वारा वन्दित त्रैलोक्य को पवित्र करने वाली देवनदी गंगा जी निकली और ध्वजा, अंकुश और कमल इन चिन्हो से युक्त जिन चरणों मे वन में फिरते हुए कांटे चुभ जाने से घट्ठे पड़ गए है।

 

 

 

हे मुकुंद! हे राम! हे रमापति! हम आपको उन्ही दोनों चरण कमल को नित्य भजते रहते है। वेद शास्त्रों ने कहा है – जिसका मूल अव्यक्त प्रकृति है, जो प्रवाह रूप से अनादि है, जिसके चार त्वचाये, छह तने, पच्चीस शाखाये, अनेक पत्ते और बहुत से फूल, जिनमे कड़वे और मीठे दो प्रकार के फल लगे है, जिनपर एक ही बेल है।

 

 

 

जो उसी के आश्रित रहती है, जिसमे नित्य नए पत्ते और फूल निकलते रहते है, ऐसे संसार वृक्ष स्वरुप, विश्वरूप में प्रकट आपको हम नमस्कार करते है। ब्रह्म अजन्मा है, अद्वैत है, केवल अनुभव से जाना जाता है और से परे है जो इस प्रकार कहकर उस ब्रह्म का ध्यान करते है।

 

 

 

वह ऐसा कहा करे और जाना करे, किन्तु हे नाथ! हम तो नित्य ही आपका सगुण यश ही गाते है। हे करुणा के धाम प्रभो! हे सद्गुणों की खान! हे देव! हम यह वर मांगते है कि मन, वचन और कर्म से विकारो को त्यागकर आपके चरणों में ही प्रेम करे।

 

 

दोहा का अर्थ-

 

 

वेदो ने सबके देखते ही यह श्रेष्ठ विनती की और फिर वह अंतर्धान हो गए और ब्रह्मलोक को चले गये। काकभुशुण्डि जी कहते है – हे गरुण जी! सुनिए, तब वहां शिव जी आये जहां रघुवीर थे और गदगद वाणी से स्तुति करने लगे।

 

 

छंद का अर्थ-

 

 

हे राम! हे रमारमण, लक्ष्मीकांत! हे जन्म-मरण के संताप का नाश करने वाले! आपकी जय हो। आवागमन के भय से व्याकुली इस सेवक की रक्षा कीजिए। हे अवधपति! हे देवताओ के स्वामी! हे रमापति! हे विभो! मैं शरणागत आपसे यही मांगता हूँ कि हे प्रभो! मेरी रक्षा कीजिए।

 

 

 

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