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Gupt Sadhana Tantra Pdf / गुप्त साधना तंत्र Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Gupt Sadhana Tantra Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Gupt Sadhana Tantra Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  कृत्या तंत्र Pdf Download कर सकते हैं।

 

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Gupta Sadhana Tantra Pdf / गुप्त साधना तंत्र पीडीएफ 

 

 

 

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Gupt Sadhana Tantra Pdf
Gupt Sadhana Tantra book pdf free Download in Hindi
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

तब राजा ने अपने पुरोहित शतानन्द जी से कहा – अब देर करने का क्या कारण है। तब शतानन्द जी ने मंत्रियों को बुलाया, वह सब मंगल का सामान सजाकर ले आये।

 

 

 

2- शंख, नगाड़े, ढोल अनेक प्रकार के बाजा बजने लगे तथा मंगल कलश और शुभ शकुन की वस्तुए दधि, दूर्वा आदि सजाई गई, सुहागिन स्त्रियों के गाने के साथ ब्राह्मणो द्वारा पवित्र वेद ध्वनि होने लगी।

 

 

 

3- इस प्रकार आदर के साथ ही सब लोग बारात को लेने के लिए जनवासे पर गए। अवधपति और दशरथ जी का समाज देखकर, उन्हें देवराज इंद्र का वैभव बहुत ही तुच्छ लगने लगा।

 

 

 

 

4- उन्हें आकर विनती करते हुए कहा – अब समय हो गया है अब पधारिये। यह सुनते ही नगाड़ा बजने लगे। गुरु वशिष्ठ जी से पूछकर और सब कुल रीति करके राजा दशरथ जी मुनि और साधु समाज के साथ चले।

 

 

 

313- दोहा का अर्थ-

 

 

 

अवध नरेश दशरथ जी का भाग्य और वैभव को देखकर और अपना जन्म व्यर्थ जानकर, ब्रह्मा जी के साथ ही अन्य देवता भी हजारो मुख से उसकी सराहना करने लगे।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- देवता का समूह सुंदर मंगल का सुअवसर जानकर बाजा बजाते हुए फूलो की बरसात कर रहे है। शिव जी, ब्रह्मा जी आदि देव वृन्द समूह बनाकर विमान जा चढ़े।

 

 

 

 

2- और प्रेम से पुलकित शरीर के साथ हृदय में उत्साह भरकर श्री राम जी का विवाह देखने चले जनकपुर को देखकर देवता इतना मुग्ध हो गए कि उन्हें अपना-अपना लोक तुच्छ लगने लगा।

 

 

 

3- नाना प्रकार की अलौकिक रचनाओं के साथ विचित्र मंडप को देखकर वह सब देवतागण चकित हो रहे है। नगर के सभी स्त्री-पुरुष रूप के भंडार, सुघर, श्रेष्ठ, धर्मात्मा शुशील सुजान है।

 

 

 

4- उन्हें देखकर देवता तथा देवांगनाएँ ऐसे प्रभा हीन हो गए मानो चन्द्रमा के उजियाले में तारागण फीके पड़ गए हो। ब्रह्मा जी को बहुत विशेष आश्चर्य हुआ क्योंकि उन्हें अपनी रचना कही दिखाई नहीं दे रही थी।

 

 

 

श्री राम जी ने मुनि को दंडवत किया, विप्र श्रेष्ठ मुनि ने उन्हें आशीर्वाद दिया। श्री राम जी की छवि देखकर मुनि के नेत्र शीतल हो गए। सम्मान पूर्वक मुनि उन्हें आश्रम में ले आये।

 

 

 

 

2- श्रेष्ठ मुनि वाल्मीकि जी ने प्राणप्रिय अतिथियों को पाकर उनके लिए मधुर कंद, मूल और फल मंगवाए। श्री सीता जी, लक्ष्मण जी और रामचंद्र जी ने उन फलो को खाया। तब मुनि ने उनको विश्राम करने के लिए सुंदर स्थान बतला दिए।

 

 

 

 

3- मुनि श्री राम जी के पास बैठे है और उनकी मंगलमूर्ति को देखकर वाल्मीकि जी के मन में बड़ा भारी आनंद हो रहा है। तब रघुनाथ जी कमल सदृश हाथो को जोड़कर, कानो को सुख देने वाले मधुर वचन बोले।

 

 

 

 

4- हे मुनिनाथ! आप त्रिकालदर्शी है। सम्पूर्ण विश्व आपकी हथेली पर रखे हुए बेर के समान है। प्रभु श्री राम जी ऐसा कहकर फिर जिस प्रकार रानी कैकेयी ने वनवास दिया वह सब कथा विस्तार से सुनाई।

 

 

 

 

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