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5 + Gulshan Nanda novels in Hindi Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Gulshan Nanda novels in Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Gulshan Nanda novels in Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से 10 + Horror Novels in Hindi Pdf कर सकते हैं।

 

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Gulshan Nanda novels in Hindi Pdf Download

 

 

 

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बदनाम उपन्यास Pdf यहां से डाउनलोड करे।
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Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

सूरज बोले – हमने तो निर्णय कर लिया अब दोनों बच्चो को आप मौका दीजिए ताकी वह एक दूसरे को समझ सके क्योंकि यह उन लोगो के भविष्य से जुड़ा हुआ सवाल है। सूरज और केशरी की उपस्थिति में ही कार्तिक और आभा को एक दूसरे को समझने के लिए मौका दिया गया।

 

 

 

 

आभा से बात करते हुए कार्तिक बोला – हमे ऐसा समाज नहीं पसंद है जो सामाजिक और पवित्र रिश्तो को कपड़े की तरह बदलने का प्रयास करता है। आभा बोली – मैं आपके इन विचारो से सहमत हूँ और इस विचार का सम्मान करती हूँ।

 

 

 

 

आभा बोली – हमारा विचार यह है कि कोई भी कार्य सामाजिक हो या आर्थिक हो या फिर पारिवारिक हो उसे भली प्रकार समझने के बाद ही कोई निर्णय करना चाहिए तब रिश्ते में दरार पड़ने की संभावना कम से कमतर हो जाती है। पारिवारिक स्थिति को स्पष्ट करिये।

 

 

 

 

आभा बोली – कार्तिक जी आप जितने भोले बनने की कोशिश करते है उससे कही ज्यादा ही चालाक है। कार्तिक ने पूछ लिया – इसका क्या अर्थ है? इसका यही अर्थ है कि आप दुकान और कम्पनी के रूप में इतने बड़े व्यापार के मुखिया है और सबको भली प्रकार से संभालने में सक्षम है।

 

 

 

 

कार्तिक बोला – इतना सक्षम होने पर भी मुझे एक पंजाब के युवक से धोखा मिल गया। दूसरे शब्दों में कह सकता हूँ कि मुझे उस पंजाब के युवक को समझने के लिए समय नहीं मिल सका क्योंकि हमे गांव में अपना मकान देखने के लिए आना पड़ा।

 

 

 

 

आभा बोली – उस पंजाबी युवक का नाम क्या था? कार्तिक बोला – उसका नाम शायद राजिंदर था। आभा से बात करते हुए कार्तिक को ऐसा लगता था कि रचना उसके सामने बैठकर बात कर रही है। उसे रचना और आभा में हर प्रकार से समानता दिख रही थी।

 

 

 

 

राजिंदर का नाम सुनते ही आभा ने चौंकने का अभिनय किया और यही उससे गलती हो गयी और उस गलती को कार्तिक भांप गया और बोला – क्या आप राजिंदर को जानती है? आपका उससे क्या संबंध है? क्या आप स्वयं तो राजिंदर नहीं बनी हुई थी?

 

 

 

 

कार्तिक के इन प्रश्नो से आभा परेशान हो गयी। लेकिन उसने संयम का परिचय देते हुए कार्तिक से स्पष्ट कर देना ही उचित समझा इसका परिणाम चाहे कुछ भी क्यों हो? आभा प्रतिकूल और अनुकूल दोनों परिणाम के लिए तैयार थी और कार्तिक से बोली – मैं खुद ही राजिंदर बनी थी क्योंकि मैं भी आप की तरह किसी के ऊपर आंख मूंदकर विश्वास नहीं कर सकती हूँ?

 

 

 

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