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Gram Shri Kavita Pdf / ग्राम श्री कविता pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Gram Shri Kavita Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Gram Shri Kavita Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Madhushala Poem Pdf Free Download कर सकते हैं।

 

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Gram Shri Kavita Pdf Download

 

 

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Gram Shri Kavita Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

सुखिया तो रघुराज को इस तरह देख रहा था जैसे उसके सामने रघुराज नहीं साक्षात् भगवान ही मनुष्य रूप में खड़े है। वह रघुराज से बोला मैं आपका यह उपकार कैसे चुकाऊंगा? रघुराज ने कहा समय आने दो मैं तुम्हे स्वयं ही बताऊंगा कि इस उपकार की भरपाई कैसे करना है।

 

 

 

 

यह पांच हजार रुपया रख लो पंकज और अपने परिवार की देखभाल अच्छे से करना। इतना कहते हुए रघुराज सोनकर अपने घर चले गए। गंगापुर से एक आदमी रघुराज सोनकर से मिलने के लिए आया उसका नाम सुदेश था। रघुराज ने उसकी कुशल क्षेम पूछने लगा।

 

 

 

 

तभी कंचन पानी और बिस्किट लाकर रख दिया। सुदेश को रघुराज ने जलपान के लिए कहा तो सुदेश पानी पीने लगा कुछ देर बाद कंचन ने चाय लाकर रख दिया और सुदेश चाय पीने लगे। रघु ने सुदेश से पूछा किस कारण से आना हुआ है।

 

 

 

 

सुदेश बोला लड़की की शादी करनी है क्या कुछ सहायता मिल सकेगी? कितना रुपया आपको चाहिए और कब? तीस हजार रुपया हो जाय तो हमे राहत मिल जाएगी। रघुराज ने उसे रुपया दे दिया तो सुदेश खुश होकर अपने घर चला गया दस दिन बाद उसकी लड़की की शादी थी।

 

 

 

 

तभी नरेश बोला जिला के प्रथम स्थान की सूची देखो विवेक ने जिला के प्रथम स्थान वाली सूची देखा तो वहां सिर्फ एक ही रोल नंबर था जो रजनी का था। सुधीर नरेश और विवेक की बातें सुन रहा था और धीरे से उठकर रजनी के घर चला गया।

 

 

 

 

वहां जाकर बोला दीदी आपने तो कमाल ही कर दिया क्या हुआ सुधीर? रजनी बोली। सुधीर कहने लगा आज आपका परीक्षाफल आ गया है और आपने तो पूरे जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया है आपके आस-पास भी कोई नहीं है। विवेक और नरेश भैया अख़बार लेकर इधर ही आ रहे है खुद ही देख लेना।

 

 

 

 

तभी विवेक और नरेश दोनों वहां आ गए और रजनी उनसे अख़बार लेकर अपना रोल नंबर देखने लगी उसे पूर्ण संतोष हुआ क्योंकि उसकी मेहनत सफल हो गयी थी। वह सुधीर को देखने लगी लेकिन सुधीर जा चुका था।

 

 

 

 

रघुराज सोनकर जो सरोज सेवा केंद्र के व्यवस्थापक थे उनका गंगापुर और विंदकी के अलावा पूरे क्षेत्र में खूब नाम हो रहा था। सभी लोग उन्हें बहुत ही इज्जत से देखते थे और इसकी शुरुवात तो श्री हनुमान जी के मंदिर से हो गयी थी। हनुमान मंदिर पर आने वाले श्रद्धालुओं को निःशुल्क चाय तथा अल्पाहार देने का कार्य दिनेश नामक व्यक्ति को सौप दिया गया था।

 

 

वह मंदिर पर आने वाले श्रद्धालुओं की खूब सेवा करता था जिसका फल उसे शाम तक अवश्य ही मिल जाता था। हनुमान जी की कृपा से यह चर्चा बहुत दूर तक फ़ैल गयी थी। माघ-पूस का महीना शुरू हो गया था। इस महीने में भात के मैदानी इलाको में ठंडी का पकोप बढ़ जाता है।

 

 

 

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