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Gorakh Tantra Pdf / गोरख तंत्र Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Gorakh Tantra Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Gorakh Tantra Pdf download कर सकते हैं और आप यहां से Cheiro Ank vigyan Pdf कर सकते हैं।

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कालचक्र के रक्षक Pdf Download
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Note- इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी पीडीएफ बुक, पीडीएफ फ़ाइल से इस वेबसाइट के मालिक का कोई संबंध नहीं है और ना ही इसे हमारे सर्वर पर अपलोड किया गया है।

 

 

 

यह मात्र पाठको की सहायता के लिये इंटरनेट पर मौजूद ओपन सोर्स से लिया गया है। अगर किसी को इस वेबसाइट पर दिये गए किसी भी Pdf Books से कोई भी परेशानी हो तो हमें [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं, हम तुरंत ही उस पोस्ट को अपनी वेबसाइट से हटा देंगे।

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये

 

 

1. डॉ राजेंद्र के पिता का क्या नाम था?

उत्तर – डॉ राजेंद्र के पिता का नाम महादेव सहाय था।

 

2. डॉ राजेंद्र प्रसाद की माता का क्या नाम था?

उत्तर – डॉ राजेंद्र प्रसाद की माता का नाम कमलेश्वरी देवी था।

 

3. राजेंद्र प्रसाद की शिक्षा कब और कहां से हुई?

उत्तर – डॉ राजेंद्र प्रसाद की पढ़ाई फारसी और उर्दू से शुरू हुई थी और यह अंग्रेजी हिंदी उर्दू फारसी और बंगाली भाषा और साहित्य पूरी तरह जानते थे। इन्होंने 5 वर्ष की उम्र में फारसी और उर्दू की शिक्षा मौलवी साहब से ली इसके बाद वे प्रारंभिक शिक्षा के लिए छपरा जिले के एक स्कूल में गए।

 

 

 

राजेंद्र प्रसाद का विवाह और समय के अनुसार बाल्यावस्था में ही 13 वर्ष की उम्र में राजवंशी देवी से हो गया। विवाह के बाद भी इन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी राजेंद्र बाबू का वैवाहिक जीवन बहुत ही सुख ई राज जिला स्कूल छपरा से 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा दी और प्रवेश परीक्षा में उन्होंने प्रथम स्थान हासिल किया।

 

 

 

उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसीडेंसी कॉलेज 1902 में दाखिला लिया 1915 में उन्होंने स्वर्ण पदक के साथ विधि पर स्नातक की परीक्षा पास की बाद में लॉ के क्षेत्र में ही उन्होंने डॉक्टर की उपाधि हासिल की। भारतीय स्वतंत्र आंदोलन में उनका पदार्पण वकील के रूप में अपने करियर की शुरुआत करते ही हो गया था। राजेंद्र बाबू महात्मा गांधी की निष्ठा समर्पण एवं साथ से बहुत प्रभावित हुए।

 

 

 

4. डॉ राजेंद्र प्रसाद कब से कब तक राष्ट्रपति बन कर रहे?

उत्तर – भारत के स्वतंत्र होने के बाद संविधान लागू होने पर उन्होंने देश के पहले राष्ट्रपति का पद संभाला राष्ट्रपति के तौर पर उन्होंने कभी भी अपने संवैधानिक अधिकारों में प्रधानमंत्री या कांग्रेस को दखल अंदाजी का मौका नहीं दिया और हमेशा स्वतंत्र रूप से कार्य करते रहे ।

 

 

 

भारतीय संविधान के लागू होने से 1 दिन पहले 25 जनवरी को इनकी बहन भगवती देवी का निधन हो गया। लेकिन वह भारतीय गणराज्य की स्थापना के बाद ही वे दाह संस्कार लेने गए उन्होंने 12 वर्षों तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने के बाद 1962 में अपने अवकाश की घोषणा की।

 

 

 

अवकाश लेने के बाद ही उन्होंने भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। सन1962 में अवकाश प्राप्त करने पर राष्ट्र ने उन्हें भारत रत्न सर्वश्रेष्ठ उपाधि से सम्मानित किया। यह उस पुत्र के लिए कृतज्ञ का प्रतीक था जिसने अपनी आत्मा की आवाज सुनकर आधी शताब्दी तक अपनी मातृभूमि की सेवा की थी।

 

 

 

राजेंद्र बाबू की वेशभूषा बड़ा ही साधारण थी उनके चेहरे की लकीरें देख कर पता नहीं लगता था कि वह इतने प्रतिभा संपन्न और उच्च व्यक्तित्व वाले सज्जन है देखने में भी सामान्य किसान से लगते थे।

 

 

 

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