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गोपी गीत पाठ Pdf / Gopi Geet Path Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Gopi Geet Path Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Gopi Geet Path Pdf download कर सकते हैं और आप यहां से Namami Shamishan Pdf Hindi कर सकते हैं।

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Gopi Geet Path Pdf

 

 

पुस्तक का नाम  Gopi Geet Path Pdf
पुस्तक के लेखक  स्वमी करपात्रीजी महाराज 
भाषा  हिंदी 
श्रेणी  धर्म 
फॉर्मेट  Pdf 
साइज  28 Mb 
पृष्ठ  550 

 

 

 

गोपी गीत पाठ Pdf Download

 

 

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Gopi Geet Path Pdf Download यहां से करे।
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विश्वामित्र एक मनुष्य जिसने देवता बनने का साहस किया Pdf Download
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चापलूसी लिपस्टिक हिंदी कॉमिक्स यहां से डाउनलोड करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

राजा शुद्धोधन ने सिद्धार्थ का मन शिक्षा में लगाया, जिसके चलते सिद्धार्थ ने विश्वामित्र से शिक्षा ग्रहण की थी। यही नहीं गौतम बुद्ध को वेद, उपनिषदों के साथ युद्ध कौशल में भी निपुण बनाया गया। सिद्धार्थ को बचपन से ही घुड़सवारी का शौक था वहीं धनु-बाण और रथ हांकने वाला एक सारथी में कोई दूसरा मुकाबला नहीं कर सकता था।

 

 

 

वहीं 16 साल की उम्र में उनके पिता ने सिद्धार्थ की शादी राजकुमारी यशोधरा से कर दी। जिससे उन्हें एक बेटे पैदा हुआ, जिसका नाम राहुल रखा गया। गौतम बुद्ध का मन ग्रहस्थ जीवन में लगाने के लिए उनके पिता ने उन्हें सभी तरह की सुख-सुविधाएं उपलब्ध करवाईं। यहां तक कि सिद्धार्थ के पिता ने अपने बेटे के भोग-विलास का भी भरपूर बंदोबस्त किए था।

राजा शुद्दोधनने अपने बेटे सिद्धार्थ के लिए 3 ऋतुओं के हिसाब से 3 महल भी बनाए थे। जिसमें नाच-गान और ऐशो आराम की सभी व्यवस्थाएं मौजूद थी लेकिन ये चीजें भी सिद्धार्थ को अपनी तरफ आर्कषित नहीं कर सकी। क्योंकि सिद्धार्थ को इन आडम्बरों से दूर रहना ही पसंद था।

इसलिए वे इस पर कोई खास ध्यान नहीं देते थे। वहीं एक बार जब महात्मा बुद्ध दुनिया को देखने के लिए सैर करने निकले तो उन्हें एक बूढ़ा दरिद्र बीमार मिला जिसे देखकर सिद्धार्थ का मन विचलित हो गया और वे उसके कष्ट के बारे में सोचते रहे।

इस तरह दयालु प्रवृत्ति होने की वजह से उनका मन संसारिक मोह-माया से भर गया। वहीं एक बार भ्रमण के दौरान ही सिद्धार्थ ने एक संन्यासी को देखा, जिसके चेहरे पर संतोष दिखाई दिया, जिसे देखकर राजकुमार सिद्धार्थ काफी प्रभावित हुए और उन्हें सुख की अनुभूति हुई।

वहीं इसके बाद उन्होंने अपने परिवारिक जीवन से दूर जाने और अपनी पत्नी और अपने बच्चे का त्याग करने का फैसला लिया और तपस्वी बनने का फैसला लिया। जिसके बाद वे जंगल की तरफ चले गए। गौतम बुद्ध सिद्धार्थ ने जब घर छोड़ा था तब उनकी आयु महज 29 साल थी।

इसके बाद उन्होंने जगह-जगह ज्ञानियों से ज्ञान लिया और तप के मार्ग की महत्ता को जानने की कोशिश की। इसके साथ ही उन्होनें आसन लगाना भी सीखा और साधना शुरु की। सबसे पहले वो वर्तमान बिहार के राजगीर स्थान पर जाकर मार्गो पर भिक्षा मांगकर अपना तपस्वी जीवन शुरू किया।

वहीं इस दौरान राजा बिम्बिसार ने गौतम बुद्ध सिद्धार्थ को पहचान लिया और उनके उपदेश सुनकर उन्हें सिंहासन पर बैठने का प्रस्ताव दिया लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसके अलावा कुछ समय के लिए वे आंतरिक शांति की खोज में वो पूरे देश के घूमकर साधू संतो से मिलने लगे।

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