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Gambhir Rogo Ki Chikitsa Pdf / गंभीर रोगों की चिकित्सा Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Gambhir Rogo Ki Chikitsa Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Gambhir Rogo Ki Chikitsa Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  रोगी स्वयं चिकित्सक Pdf Download कर सकते हैं।

 

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Gambhir Rogo Ki Chikitsa Pdf / गंभीर रोगों की चिकित्सा पीडीएफ

 

 

 

पुस्तक का नाम गंभीर रोगों की चिकित्सा
पुस्तक के लेखक राजिव दीक्षित 
पुस्तक की भाषा हिंदी 
श्रेणी चिकित्सा, स्वास्थ्य 
फॉर्मेट Pdf
साइज 4 Mb
कुल पृष्ठ 10

 

 

 

गंभीर रोगों की चिकित्सा Pdf Download

 

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Gambhir Rogo Ki Chikitsa Pdf
Gambhir Rogo Ki Chikitsa Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

त्रिकूट पर्वत पर लंका बसी हुई है। वहां स्वभाव से ही निडर रावण रहता है। वहां अशोक नाम का एक उपवन है जहां सीता जी रहती है। इस समय भी वह सोच में मग्न बैठी है।

 

 

 

 

28- दोहा का अर्थ-

 

 

 

 

मैं उन्हें देख रहा हूँ तुम नहीं देख सकते क्योंकि गीध की दृष्टि अपार होती है। क्या करू? मैं बूढ़ा हो गया नहीं तो मैं तुम्हारी अवश्य ही कुछ सहायता करता।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

 

जो सौ योजन समुद्र लाँघ सकेगा और बुद्धिनिधान होगा वही श्री राम जी कार्य कर सकेगा। निराश होकर घबराओ मत मुझे देखकर मन में धीरज रखो। देखो श्री राम जी कृपा से देखते ही देखते मेरा शरीर कैसा हो गया।

 

 

 

 

बिना पंख के मैं बेहाल था। पंख उगने से सुंदर हो गया। पापी भी जिनका नाम स्मरण करके अत्यंत अपार भवसागर से तर जाते है। तुम उनके दूत हो, अतः कायरता छोड़कर श्री राम जी को हृदय में धारण करके उपाय करो।

 

 

 

 

काकभुशुण्डि जी कहते है – हे गरुड़ जी! इस प्रकार कहकर गीध जब परलोक सिधार  गया। तब उन वानरों के मन में अत्यंत विस्मय हुआ। सब किसी ने अपने-अपने बल की थाह लगाई और अपने बल को परखा।

 

 

 

 

लेकिन समुद्र के पार जाने में सभी ने संदेह प्रकट किया। ऋक्ष राज जांबवान कहने लगे – मैं अब बूढ़ा हो गया। शरीर में अब पहले वाले बल का लेश भी नहीं रहा। जब खरारी वामन अवतार धारण किए थे। तब मैं तरुण था और मुझमे बहुत बल था।

 

 

 

 

29- दोहा का अर्थ-

 

 

 

बलि को बांधते समय प्रभु इतने बढ़ गए थे कि उसका वर्णन नहीं हो सकता। किन्तु मैंने दो घरी में ही दौड़कर उस शरीर को सात बार प्रदक्षिणाएँ कर ली थी।

 

 

 

 

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