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15 + Funny Short Comedy Drama Script in Hindi Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Funny Short Comedy Drama Script in Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप एकदम नीचे की लिंक से Funny Short Comedy Drama Script in Hindi Pdf Download कर सकते हैं।

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Comedy Script in Hindi / कॉमेडी स्क्रिप्ट इन हिंदी 

 

 

 

रिसर्चर अपने मित्र से – मैंने एक चॉकलेट बनायी है।

 

मित्र – तो क्या हुआ? इसमें कुछ नयी बात ?

 

रिसर्चर – इस चॉकलेट को खाने से बीवी के टेंशन से मुक्ति मिल जायेगी।

 

मित्र – वह भला कैसे? ( आश्चर्य और ख़ुशी से )

 

रिसर्चर – इस चॉकलेट को खाने के बाद बीवी की हर कड़वी बात मीठी ही लगेगी, लेकिन एक शर्त है….इस चॉकलेट को बीवी के हाथ से ही खाना है।

 

 

मित्र – क्या बात कर रहे हो ? वॉव….ग्रेट, तो अब…..

 

रिसर्चर – सोच रहा हूँ, ट्राय किस पर करूँ।

 

मित्र – अबे यार, तेरा यह दोस्त कब काम आएगा।

 

रिसर्चर बड़े ध्यान से अपने मित्र को ऊपर से नीचे देखते हुए – अबे तू किसकी बीवी है…कहीं तू वो वाला….

 

मित्र – अबे नहीं यार…मेरी बीवी है न

 

रिसर्चर – हाँ, तब ठीक

 

अगले दिन

 

रिसर्चर – अबे यार, तेरा चेहरा क्यों सुजा है।

 

मित्र – तेरी वजह से कमीने…कैसी चॉकलेट बनायी है ?

 

रिसर्चर – क्या हुआ?

 

मित्र – जब मैं घर गया और बीवी को यह दिया तो वह मुझे खिलाने की जगह खुद खा गयी और फिर….

 

यह सुनते ही रिसर्चर के हाव – भाव बदल जाते हैं….

 

रिसर्चर- भाई आगे का किस्सा मत बता….यह चॉकलेट केवल आदमियों के लिये थी….औरतो के लिये नहीं।

 

 

 

short comedy script in Hindi / शार्ट कॉमेडी स्क्रिप्ट इन हिंदी

 

 

 

( तीन दोस्त खड़े होकर बातें कर रहे हैं। )

 

 

Role 1- उनका चौथा दोस्त, नये कपडे, नये जूते पहने उनकी तरफ आ रहा था।

 

Role 2- ( तीनो दोस्तों में से एक ) अबे तेरे पास तो पार्टी मनाने के पैसे नहीं थे, यह जूते, कपडे खहां से खरीदा बे।

 

Role 1 – दुकान से

 

Role 2 – अबे घोंचू, वो तो हमें भी पता है दूकान से लिये…लेकिन तेरे बाप की दूकान तो है नहीं, तो यह बता बेटा पैसा कहाँ से आया तेरे पास?

 

 

Role 1- तीनो को बुलाकर प्लान बताता है।

 

 

फ़्लैशबैक 

 

 

Role 1 अंधे का भेष बनाकर एक भीड़भाड़ वाली दूकान में जाता है और वहाँ जल्दी – जल्दी कपडे मांगता है। कपड़ा लेने के बाद ड्रेसिंग रूम में जाता है और धीरे से वहाँ से खिसक  जाता है और फिर तेजी से वहाँ से भाग जाता है।

 

 

Role 3 – यार मस्त आइडिया है, चल हम भी ट्राई करते हैं।

 

Role 1- अभी रहने दो…दूसरे दिन जाना।

 

Role 2- क्यों बे…तूने तो कपडे ले लिये, अभी हमें रोक रहा है।

 

Role 1 – चल, लेकिन मैं दूर ही रहूंगा।

 

 

सभी आपस में डिसाइड करते हैं की एक – एक करके जायेंगे।

 

दूकान में Role 2 ( तीनो में से पहला दोस्त ) जाता है।

 

दुकानदार – क्या चाहिये?

 

Role 2 – अंडा चाहिए।

 

दुकानदार – अंडा चाहिये तो बाजू वाली दूकान में जाओ। यहाँ पर अंडा नहीं कपड़ा मिलता है।

 

 

Role 2 – अरे कपड़ा ही चाहिये रे बाबा, अंडा चाहिये होता तो अंडा वाली दूकान में जाता न।

 

 

दुकानदार – आपको कैसे पता, ई कपड़ा की दूकान है?

 

 

Role 2- ( समझदारी से ) यहां अंडे की खुशबु नहीं आ रही है न, इसलिये।

 

 

दूकानदार – कौन सा कपड़ा दिखाऊं ?

 

 

Role 2- वह पीले रंग का।

 

 

दुकानदार – ( गुस्से में ) तुझे कैसे पता, वह पीले रंग का है। नकली अंधा बनता है। मेरे को एक अंधा आज उल्लू बनाया, अभी तू भी।

 

 

( दे….दनादन पिटाई )

 

 

कपडे वगैरह ठीक करके Role 2 मित्रों के पास पहुंचा।

 

Role 3 – क्या हुआ, कपडे कहाँ हैं ?

 

Role 2 – तेरे पीछे, पिट गया बे।

 

Role 1 – बेटा, दाम तो कुछ ना कुछ देना ही होता है। तूने तो दाम भी दिये और कपडे भी ना मिले।

 

तीनो दोस्त- मतलब?

 

Role 1- अबे पिटा तो मैं भी था….यह कपडे भीड़ में पिटाई के वक्त भागकर बचाये थे।

 

तीनो दोस्त एकसाथ – तो पहले क्यों नहीं बताया बे।

 

Role 1- क्योंकि हर फ्रेंड कमीना होता है।

 

 

दूसरी स्क्रिप्ट और कहानियां नीचे से डाउनलोड करें।

 

 

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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

वहां उन्होंने वैदिक और लौकिक आचार का यथार्थ रीति से पालन करके भगवान शिव के दिए हुए आभूषणों से शिवा को अलंकृत किया। सखियों और ब्राह्मण की पत्नियों ने पहले पार्वती को स्नान करवाया फिर सब प्रकार से वस्त्राभूषणों द्वारा विभूषित करके उनकी आरती उतारी।

 

 

 

तीनो लोको की जननी महाशैल पुत्री सुंदरी शिवा दिव्य वस्त्राभूषणों  होकर मन ही मन भगवान शिव का ध्यान करती हुई वही बैठी। उस समय उनकी बड़ी शोभा हो रही थी। उस अवसर पर दोनों पक्षों में महान आनंददायक उत्सव होने लगा। ब्राह्मणो को शास्त्रोक्त रीति से नाना प्रकार का दान दिया गया।

 

 

 

अन्य लोगो को भी वहां भांति-भांति के बहुत से द्रव्य बांटे गए। विशेष उत्सव के साथ गीत और बाद्य आदि के द्वारा लोगो का मनोरंजन किया गया। तदनन्तर मैं ब्रह्मा भगवान विष्णु इंद्र आदि देवता तथा मुनि ये सब के सब बड़ी प्रसन्नता के साथ सानंद उत्सव मनाते हुए भक्ति भाव से शिव को प्रणाम कर शिव के चरणारबिंदो के चिंतन पूर्वक हिमालय की आज्ञा ले अपने-अपने स्थान पर चले गए।

 

 

 

इसके बाद गर्ग ने कन्यादान का समय जान हिमाचल से श्रीशंकर तथा बारातियो को बुलाने के लिए कहा। फिर तो बाजे बजने लगे। हिमाचल के मंत्रियों ने जाकर वर और बारातियो से शीघ्र पधारने के लिए प्रार्थना की। वे बोले – कन्यादान के लिए उचित समय आ गया है अतः आप लोग शीघ्र मंडप में पधारे।

 

 

 

तदनन्तर भगवान शिव को सुंदर वस्त्राभूषण से सुसज्जित करके वृषभ की पीठ पर बिठाया गया और जय बोलते हुए सब लोग चले। भगवान शंकर को आगे करके बाजे बजाते और कौतुक करते हुए सब बाराती हिमालय के घर को गए। हिमाचल के भेजे हुए ब्राह्मण तथा श्रेष्ठ पर्वत कौतुहल पूर्वक शंभु के आगे-आगे चलते थे।

 

 

 

भगवान के मस्तक पर बहुत बड़ा छत्र तना हुआ था। सब ओर से उन्हें चंवर डुलाया जाता था तथा वे महेश्वर चंदोवे के नीचे होकर चलते थे। मैं विष्णु इंद्र और लोकपाल आगे रहकर उत्तम शोभा से सुशोभित हो रहे थे। उस महान उत्सव के समय शंख, भेरी पटह आनक और गोमुख आदि बाजे बारंबार बज रहे थे।

 

 

 

इन सबके साथ जगत के एकमात्र जीवन बंधु भगवान शिव परमेश्वरोचित तेज से सम्पन्न हो यात्रा कर रहे थे। उस समय समस्त देवेश्वर उनकी सेवा में उपस्थित हो बड़े हर्षोल्लास के साथ उनपर फूलो की वर्षा करते थे। इस प्रकार पूजित और बहुत सी स्तुतियों द्वारा प्रशंसित हो परमेश्वर शिव ने यज्ञमंडप में प्रवेश किया।

 

 

 

वहां श्रेष्ठ पर्वतो ने शिव को वृषभ से उतारा और महान उत्सव के साथ प्रेम पूर्वक उन्हें घर के भीतर ले गये। हिमालय ने भी घर में आये हुए देवताओ सहित महेश्वर को विधि पूर्वक भक्ति भाव से प्रणाम करके उनकी आरती उतारी। फिर महान उत्सव पूर्वक अपने भाग्य की सराहना करते हुए उन्होंने अन्यय समस्त देवताओ और मुनियो को प्रणाम करके उन सबका समादर किया।

 

 

 

श्री विष्णु सहित महेश्वर कको तथा मुख्य-मुख्य देवताओ को पाद्य अर्घ्य देकर हिमालय उन्हें अपने भवन के भीतर ले गए और आंगन में रत्नमय सिंहासनो के ऊपर मुझको विष्णु को शंकर जी को तथा अन्य विशिष्ट व्यक्तियों को बिठाया। उस समय  मेना ने अपनी सखियो ब्राह्मण पत्नियों तथा अन्य पुरन्धियों के साथ आकर सानंद आरती उतारी।

 

 

 

कर्मकांड के ज्ञाता पुरोहित महात्मा शंकर के लिए मधुपर्क पूजन आदि जो-जो आवश्यक कृत्य थे उन सबको सहर्ष सम्पन्न किया। फिर मेरे कहने से पुरोहित ने प्रस्ताव के अनुरूप उत्तम मंगलमय कार्य आरंभ किया। इसके बाद हिमालय ने अंतर्वेदी में जहां समस्त आभूषणों से विभूषित उनकी कृशांगी कन्या वेदी के ऊपर विराजमान थी वहां मेरे और श्री विष्णु के साथ महादेव जी को ले गए।

 

 

 

तदनन्तर बृहस्पति आदि विद्वान बड़े उत्साह से सम्पन्न हो कन्या दानोचित लग्न की प्रतीक्षा करने लगे। गर्ग ने पुण्याहवाचन करते हुए पार्वती जी की अंजलि में चावल भरे और शिव जी के ऊपर अक्षत छोड़ा। परम उदार सुमुखि पार्वती ने दही अक्षत कुश और जल से वहां रुद्रदेव का पूजन किया।

 

 

 

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