Freedom Fighters Of India With Name List in Hindi Pdf

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Freedom Fighters Of India With Name List in Hindi Pdf / स्वतंत्रता सेनानी नेम लिस्ट Pdf

 

 

 

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महात्मा गांधी
कुंवर सिंह
विनायक दामोदर सावरकर
दादाभाई नौरोजी
तात्या टोपे
के एम मुंशी
जवाहरलाल नेहरू
अशफाकला खान
सरदार वल्लभभाई पटेल
लाला लाजपत राय
राम प्रसाद बिस्मिल
बाल गंगाधर तिलक
रानी लक्ष्मीबाई
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चितरंजन दास
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भगत सिंह
लाल बहादुर शास्त्री
नाना साहेब
चंद्रशेखर आजाद
सी राजगोपालाचारी
अब्दुल हफीज मोहब्बत बरकतउल्ला
सुभाष चंद्र बोस

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

 

अपनी वाणी को पवित्र करने के लिए ही तुलसी श्री राम जी का यश कहा। श्री राम जी का चरित्र तो अपार समुद्र है, कोई भी कवि उसका पार नहीं पाया है? जो लोग यज्ञोपवीत और विवाह के मंगलमय उत्सव का वर्णन आदर के साथ सुनकर गायेंगे, वह लोग श्री जानकी जी और श्री राम जी कृपा से सदा सुख पाएंगे।

 

 

 

361- सोरठा का अर्थ-

 

 

 

श्री सीता जी और श्री रघुनाथ जी के विवाह प्रसंग को जो लोग प्रेम पूर्वक गायेंगे और सुनेंगे, उनके लिए सदा उत्साह ही उत्साह आनंद है क्योंकि श्री राम जी का यश मंगल का धाम है।

 

 

 

 

तब सुअवसर जानकर जनक जी ने सीता जी को बुला भेजा। सब सुंदर और चतुर सखियां उन्हें लिवा कर आई।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- रूप और गुणों की खान जगत जननी जानकी जी की शोभा वर्णन नहीं हो सकता है। उनके लिए काव्य की सभी उपमाये तुच्छ लगती है क्योंकि स्त्रियों में अनुराग रखने वाली उपमा होती है। उन्हें भगवान की शक्ति स्वरूपा जानकी जी के लिए प्रयुक्त करना उचित नहीं है।

 

 

 

 

2- सीता जी के वर्णन में उन्ही उपमाओ को देकर कौन कुकवि और अपयश का भागी बने, यदि किसी स्त्री के साथ ही सीता जी की तुलना की जाय तो ऐसी सुंदर युवती जगत में कहां है जिसकी उपमा उन्हें दी जाय।

 

 

 

 

3- देवताओ की स्त्रियों को देखा जाय तो वह सुंदर और दिव्य है। तो भी उनमे सरस्वती जी तो बहुत बोलने वाली है, पार्वती तो अर्धांगिनी है अर्थात अर्ध नारी नतेश्वर के रूप में उनका आधा ही शरीर स्त्री का है। शेष आधा अंग पुरुष शिव जी का है।

 

 

 

कामदेव की स्त्री रति, अपने पति को बिना शरीर का (अनंग) जानकर बहुत दुखी रहती है। समुद्र से उत्पन्न हुए विष और वरुनी जैसे प्रिय भाई है, तो उन लक्ष्मी के समान तो जानकी जी को कैसे कहा जाय।

 

 

 

 

4- जिन लक्ष्मी जी का बात ऊपर कही गई है। वह तो समुद्र के खारे पानी से निकली थी। समुद्र को मथने के लिए भगवान ने अति कर्कश पीठ वाले कच्छप का रूप धारण किया था और महान वासुकी की रस्सी बनाई गयी थी और मथानी का कार्य मंदराचल पर्वत ने उसे सारे देवताओ और दैत्यों के साथ मिलकर किया था।

 

 

 

 

जिन लक्ष्मी को अनुपम शोभा की खान और अतिसय सुंदर रूप को धारण करने वाली कहते है। उन्हें प्रकट करने में कठोर और स्वाभाविक रूप से असुंदर उपकरण का प्रयोग हुआ था।

 

 

 

 

इन उपकरणों से प्रकट हुई लक्ष्मी श्री जानकी जी की समता को कैसे पा सकती है। यदि – छवि रूपी अमृत का समुद्र हो, परम रूपमय कच्छप हो, शोभा रूप ही रस्सी हो, श्रृंगार रस पर्वत हो और उस छवि के समुद्र को स्वयं कामदेव अपने ही कर कमल से मथे।

 

 

 

 

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