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Firangi Novel Pdf / फिरंगी उपन्यास Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Firangi Novel Pdf देने जा रहे हैं और आप यहां से Firangi Novel Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Vicky Anand Hindi Novel Pdf download कर सकते हैं।

 

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Firangi Novel Pdf / फिरंगी उपन्यास Pdf 

 

 

 

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Firangi Novel Pdf
फिरंगी उपन्यास Pdf Download
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3 din सुरेंद्र मोहन पाठक pdf download
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अनहोनी राज भारती pdf download
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

वह कहने लगा पराग भइया! कार्तिक की शादी तो बहुत अच्छे ढंग से हो जाएगी लेकिन लेकिन क्या विरजू बताओ? पराग व्यग्र होकर बोला – आपके पास रुपयों की कमी तो है नहीं आप इस घर को अच्छी तरीके से बनवा दीजिए तो कार्तिक की शादी होने में देर नहीं लगेगी क्योंकि इस आधुनिक युग में लोग ऊपरी चमक ही देखते है चाहे आदमी भीतर से खोखला क्यों न हो?

 

 

 

लोग इस विकास की दौड़ में पीतल की चमक देखकर उसे सोना समझने की भूल कर बैठते है लेकिन आप तो 24 कैरेट के सोना है अगर इस घर का जीर्णोद्धार करवा देंगे तो वह सोने के ऊपर सुहागा हो जायेगा और कार्तिक की शादी में होने तनिक भी देर नहीं लगेगी।

 

 

 

विरजू ने यथार्थ का वर्णन कर दिया था। पराग बोले – लेकिन विरजू, कार्तिक को ऐसी जीवन संगिनी चाहिए जो संस्कारवान हो आधुनिक होते हुए भी अपने घर के संस्कार को संभालने में निपुण हो जो अपने घर की मर्यादा और सीमा को अखंडित बनाये रखे।

 

 

 

लेकिन पराग भइया! मैं एक बात आपसे कहूं। पराग बोले – निःसंकोच कहो विरजू। विरजू बोला – अगर कोई व्यक्ति अपनी लड़की का जीवन साथी बनाने से पहले कार्तिक को लेकर आपके सामने यही प्रश्न कर दे तब आप क्या करेंगे? पराग इस प्रश्न का उत्तर पहले से ही तैयार करके बैठे थे।

 

 

 

उन्होंने कहा – विरजू! मुझे यहां आये हुए 17 दिन हो गए है मैं 20वे दिन कलकत्ता जाने वाला था लेकिन तुमने मुझे कलकत्ता जाने से रोक दिया अब मैं तुम्हे अपनी जगह कलकत्ता में कार्तिक के पास भेजूंगा तुम वहां जाकर स्वयं ही अपनी आँखों से देख लेना।

 

 

 

विरजू बोला – पराग भइया! आप बुरा मत समझिये हमारी जनर में तीन चार लोग है जो आपकी तरह ही संस्कारवादी और सिद्धांतवादी है। वह लोग भी अपने संस्कार और सिद्धांत से कोई समझौता नहीं करते है। उन लोगो के लिए पैसे से ज्यादा मूल्य उनके सिद्धांत और संस्कार का है।

 

 

 

इसी तरह बात करते हुए रात को आठ बज गए इसी बीच विरजू की चार साल की लड़की चुनमुन वहां आ गयी और बोली – बापू आज गाय से दूध नहीं निकालेंगे क्या? विरजू ने ध्यान दिया तो उसकी गाय रंभा रही थी अपने बछड़े को दूध पिलाने के लिए।

 

 

 

पंद्रह मिनट के बाद विरजू आया और पराग तथा केतकी को अपने घर लिवा ले गया भोजन करने के लिए। पराग जब से आये हुए है कलकत्ता से उसी दिन से ही विरजू अपने घर पर ही उनके भोजन की व्यवस्था करता आया है और पराग भी जाते समय उसे निराश नहीं करते उनके लिए 5 या10 हजार देना कोई बड़ी बात नहीं थी।

 

 

 

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