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Fantasy Novels In Hindi Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Fantasy Novels In Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Fantasy Novels In Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से Akram Allahabadi Novels Hindi Pdf कर सकते हैं।

 

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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

लेकिन सबसे ज्यादा इस बात से दोनों खुश थे कि सुधीर की बराबरी जिला स्तर पर कोई भी नहीं कर सका था। नरेश और विवेक दोनों ही जल्दी से घर पहुंचकर यह बात सुधीर और रजनी को बताना चाहते थे। दोनों घर पहुंचकर सुधीर और रजनी को परीक्षाफल दिखा दिया।

 

 

 

 

पूरे गांव के लोग रघुराज के घर आकर उन्हें बधाई देने लगे लेकिन महान क्रिकेटर बनने वाले उदंड लड़को का भविष्य अंधकारमय हो गया था। उन्हें जीप चलाना था या फिर कही कम्पनी में नौकरी करनी थी।

 

 

 

 

दीपक को अपना पेठे का व्यवसाय करते हुए एक महीना हो गया था। अब उसके साथ पांच लोग और जुड़ गए थे। वह उनके लिए भी ठेलागाड़ी के साथ ही पेठा भी उपलब्ध कराता था। दीपक ने अपने साथियो से पहले ही कह दिया था कि कोई भी नशा करने वाला आदमी उसके साथ नहीं रहेगा क्योंकि वह स्वयं नशा करने का परिणाम भुगत लिया था।

 

 

 

 

दीपक अपने हाथगाड़ी के साथ ही आज सरोज क्लिनिक के सामने खड़ा था। वहां भी आने जाने वालो से उसका धंधा चल रहा था। डा. निशा भारती के साथ उनके दो बच्चे सरिता और रोशन भी आये हुए थे जो अपने हम उम्र बच्चो के साथ ही बाहर खेल रहे थे।

 

 

 

 

उसमे से एक बालक जाकर दीपक के ठेले के पास जाकर खड़ा हो गया। उस बालक के साथ रोशन भी वहां आ गया था। दीपक ने बिना कुछ कहे उन्हें एक किलो पेठा देते हुए कहा कि आप लोग सभी आपस में बांटकर खा लेना। रोशन के साथ वह गरीब बालक भी खुश होते हुए चला गया।

 

 

 

 

यह सब डा. निशा भारती अपने क्लिनिक से देख रही थी। उन्होंने सोचा था कि क्लिनिक बंद करते समय इसका पैसा दे दूंगी। रात्रि के नौ बजकर तीस मिनट हो चुके थे सिर्फ दस बजने में आधा घंटा बाकी था। सड़क भी धीरे-धीरे खाली होने लगी थी और सरोज क्लिनिक में भी कोई मरीज नहीं था।

 

 

 

 

तभी दीपक डा. निशा भारती के सामने पहुंचा। उसे देखकर निशा भारती चौंक गयी थी और उन्होने दीपक को पहचान लिया था फिर बोली दीपक तुम इस समय यहां कैसे? दीपक बोला दीदी आपका कर्ज उतारने आया हूँ और वह पंद्रह हजार रुपये देने लगा।

 

 

 

 

डा. भारती बोली यह कैसा कर्ज है जो तुम मुझे दे रहे हो। दीपक बोला दीदी आपने हमे व्यवसाय करने के लिए पांच हजार रुपये दिए थे और अस्पताल में भी आपने पांच हजार रुपये हमारे ऊपर खर्च किए थे यह सब वही पैसा है। तभी निशा भारती की निगाह ठेले पर गयी तो वहां कोई नहीं था तो वह बोल पड़ी क्या यह ठेला तुम्हारा है?

 

 

 

 

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