Ek Yogi ki Atmakatha in Hindi PDF / योगी की आत्मकथा PDF

Ek Yogi ki Atmakatha in Hindi PDF मित्रों इस पोस्ट में Autobiography Of a Yogi PDF के बारे में बताया गया है।  आप यहां से Ek Yogi ki Atmakatha in Hindi PDF Download कर सकते हैं।

 

 

 

Ek Yogi ki Atmakatha in Hindi PDF योगी की आत्मकथा Free Download

 

 

 

 

 

 

 

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एक योगी की आत्मकथा फ्री डाउनलोड Paramhans Yogananda Books in Hindi

 

 

 

एक योगी की आत्मकथा को योगी कथामृत के नाम से जाना जाता है। यह एक बहुत ही अद्भुत पुस्तक है और इसकी जितनी प्रशंसा की जाये वह कम है। यह पुस्तक Paramhans Yogananda के बारे में है।

 

 

 

 

 

इस पुस्तक को पढ़ने के बाद आपके मन में आध्यात्म का तूफान उमड़ उठेगा। यह आत्मकथा परमहंस योगानंद के बारे में है और इसमें उन्होंने अपनी साधना के साथ ही साधना के समय जिस महान योगियों संतो से भेट हुई साक्षत्कार हुए उनके बारे में भी उस साक्षात्कार के बारे में भी विस्तृत वर्णन किया गया है।

 

 

 

Ek Yogi ki Atmakatha in Hindi PDF
ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ या योगी इन हिंदी Pdf

 

 

 

 

इसमें Kriya Yoga (क्रिया योग) के बारे में विस्तृत वर्णन है और इस पुस्तक में महावतार बाबाजी के बारे में बताया गया है और कहा जाता है कि महावतार बाबाजी की उम्र इस समय लगभग 5000 वर्ष है।

 

 

 

 

 

उन्हें कई सिद्ध पुरुषो और योगियों ने देखा है। श्यामचरण चहिरी, सद्गुरु सिद्धनाथ और परमहंस योगानंद को भी बाबाजी ने दर्शन दिए है।

 

 

 

 

इसी पुस्तक में गंधबाबा का भी वर्णन किया गया है। गंधबाबा एक ऐसे सिद्ध पुरुष थे और सूर्य विज्ञान के माध्यम से कोई भी वस्तु या गंध प्रकट कर देते थे जो कि एक चमत्कार सा लगता था।

 

 

 

 

 

स्टीव जॉब्स ने भी “योगी कथामृत” का कई बार पठन किया है इसलिये यह किताब बहुत ही अच्छी है और इसे पढ़ना चाहिए।

 

 

 

 

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एक जंगल में एक शेर रहता था। वह जब भी शकर करने के लिए जाता था तो सभी जानवर उससे डरकर भाग जाते थे। जिससे उसे शिकार नहीं मिलता था।

 

 

 

 

 

एक दिन एक लोमड़ी शेर के पास आई उसने शेर को एक आइडिया बताया। एक दिन उसने सभी जानवरों को एक जगह पर बुलाया।

 

 

 

 

 

सभी जानवर एक जगह पर आये तो शेर ने कहा, “आज से तुम लोग इस जगल का नया नियम मानोगे। गोरिल्ला ने डरते हुए पूछा, “नया नियम कौन सा है ? महाराज।” शेर ने गरजते हुए कहा, “अभी बताता हूँ।”

 

 

 

 

 

कुछ समय मौन रहने के बाद शेर ने कहा, “तुम लोगों में से प्रत्येक जानवर को एक-एक दिन हमारे पास आना पड़ेगा और मैं उनका भक्षण करूँगा। यह काम हिरण को करना होगा। वही हमारे पास रोज एक जानवर लेकर आएगा।”

 

 

 

 

 

अब शेर को आराम से शिकार मिल जाता था। वह सभी शिकार खा जाता था और हड्डियां लोमड़ी को दे देता था। लोमड़ी को यह अच्छा नहीं लगता था। वह नाराज होकर शेर का बात छोड़ दिया। एक बार शेर बारिश में भीग गया और बीमार हो गया था।

 

 

 

 

 

काफी दिन बाहर नहीं निकला तो हिरण उसे देखने के लिए गया और उसी दिन हिरण की बरी भी थी। शेर को बात-बात पर छींक आ रही थी। उसने हिरण की बात ना समझने के कारण उसे जाने के लिए कह दिया।

 

 

 

 

 

कुछ दिन बाद शेर ठीक होकर गुफा से बाहर आया देखा तो खरगोश सो रहा था। लेकिन खरगोश उसे देखकर भाग गया। लोमड़ी छुपकर देख रही थी और खुश हुई कि शेर को एक भी शिकार नहीं मिला।

 

 

 

 

 

 

दूसरे दिन शेर ने हिरण को देखा तो वह घास खा रहा था। शेर भी घास खाने लगा। हिरण ने शेर से पूछा, “अपने शिकार करना छोड़ दिया है क्या ?” शेर ने कहा, “मैं शाकाहारी बन गया हूँ।” हिरण उसका विश्वास कर लिया लेकिन शेर ने उसे धोखे से दबोच लिया और खा गया।

 

 

 

 

 

सीख – शत्रु के ऊपर कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए।

 

 

 

 

 

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