Durga Chalisa PDF Hindi Free Download / दुर्गा चालीसा Pdf डाउनलोड

Durga Chalisa PDF Hindi मित्रों इस पोस्ट में Durga Chalisa in Hindi PDF के बारे में बताया गया है।  आप यहां से दुर्गा चालीसा फ्री डाउनलोड Durga Chalisa Download कर सकते हैं।

 

 

 

Durga Chalisa PDF Hindi Free दुर्गा चालीसा Pdf डाउनलोड 

 

 

 

 

 

 

 

नवरात्रि का दिन हिन्दू धर्म में बहुत ही पवित्र और उच्च स्थान रखता है। नवरात्रि में दुर्गा पाठ के उपरांत दुर्गा चालीसा का पाठ आरती सहित करने पर भक्तों की अभिलाषा माँ भगवती पूर्ण करती है ऐसी सर्वमान्य मान्यता है।

 

 

 

 

 

दुर्गा चालीसा और दुर्गा आरती के बिना माँ भगवती की पूजा पूर्ण नहीं होती है। इसके पाठ से शत्रु से मुक्ति, इच्छा पूर्ति के साथ ही शांति का अनुभव होता है। ऐसा लगता है, जैसे माता दुर्गा साक्षात् उसके हर कष्ट मिटाने के लिए उद्यत है, ऐसा कई भक्तों का स्वयं अनुभव है।

 

 

 

 

 

इस पाठ से और भी अनेक फायदे है। जैसे – 1. आप अपने शरीर में आध्यात्मिक ओज को जागृत कर सकते है।

 

 

2. लोग अपने परिवार की खुशहाली और उन्नति के लिए दुर्गा चालीसा का पाठ करते है और उन्हें सफलता भी मिलती है।

 

 

3. हर प्रकार के दुश्मनों को हराने की क्षमता का विकास होता है। यथा – अज्ञान रूपी शत्रु, क्लेश रूपी शत्रु, सांसारिक शत्रु इत्यादि।

 

 

 

4. माँ दुर्गा का आशीर्वाद श्रद्धा रूप से अपने भक्तों को अवश्य ही प्रदान करती है। यथा – ज्ञान, सम्बृद्धि, भक्ति और धन धान्य का आशीर्वाद।

 

 

 

5. अगर किसी भक्त की सामाजिक स्थित ख़राब हो गयी है तो वह भगवती की कृपा से उसे दुबारा प्राप्त  हो सकती है।

 

 

 

6. किसी भी प्रकार की नकारात्मक बातों का प्रभाव मनुष्य के ऊपर नहीं पड़ता क्योंकि वह दुर्गा चालीसा के प्रभाव से भगवती के आशीर्वाद द्वारा संरक्षित हो जाता है।

 

 

 

7. दुर्गा चालीसा का पाठ मन की शांति को स्थिरता प्रदान करता है। यह कथन पूर्ण सत्य है, क्योंकि प्राचीन काल से ही ऋषि मुनियों ने अपनी शान्ति के लिए दुर्गा चालीसा को अपनाया था और आज के इस समयाभाव युग में यह दुर्गा चालीसा मानव के लिए अधिकाधिक सर्व सुलभ है।

 

 

 

8. दुर्गा चालीसा का पाठ किसी भी शुभ अवसर पर मानव को आध्यात्मिक, भौतिक और भावनात्मक ख़ुशी प्रदान करती है।

 

 

 

9. दुर्गा चालीसा का पाठ नित्य ही किया जा सकता है। लेकिन इसमें भी स्वच्छता और शुद्धता की अनिवर्यता होती है। लेकिन दुर्गा चालीसा का मानसिक पाठ करने के लिए कोई बंधन नहीं है, क्योंकि आत्मा तो किसी भी अवस्था में शुद्ध से शुद्धतम रहता है।

 

 

 

Durga Chalisa Lyrics in Hindi / Durga Chalisa Lyrics Pdf

 

 

मित्रों हम यहां पर आपको दुर्गा चालीसा इन हिंदी देने जा रहे हैं। आप नीचे से दुर्गा चालीसा पढ़ सकते हैं। 

 

 

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥

शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥

रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥

तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥

अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥

प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा॥

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥

क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा॥

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥

मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥

श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥

केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥

कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै॥

सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥

नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुंलोक में डंका बाजत॥

शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे॥

महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥

रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥

परी गाढ़ संतन पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥

अमरपुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥

प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥

शंकर आचारज तप कीनो।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥

शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥

शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥

मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥

आशा तृष्णा निपट सतावें।
रिपू मुरख मौही डरपावे॥

शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥

करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।

जब लगि जिऊं दया फल पाऊं ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥

दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥

देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥

 

 

 

Durga Chalisa Lyrics PDF in Hindi PDF दुर्गा चालीसा लिरिक्स फ्री डाउनलोड 

 

 

 

आपने दुर्गा चालीसा हिंदी ( Durga Chalisa Hindi ) पढ़ लिया होगा। आप नीचे की लिंक से दुर्गा चालीसा Pdf Free Download कर सकते हैं।

 

 

 

दुर्गा चालीसा पीडीएफ फ्री डाउनलोड  Durga Chalisa Pdf Gita Press

 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

श्री कृष्ण कहते है, हे अर्जुन ! मैं समस्त जीवो के हृदयो में स्थित परमात्मा हूँ और मैं ही समस्त जीवो का आदि, मध्य तथा अंत हूँ।

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – सर्वप्रथम कृष्ण अर्जुन को बताते है कि वह अपने मूल विस्तार के कारण ही समग्र दृश्य जगत की आत्मा है।

 

 

 

 

भौतिक शृष्टि के पूर्व भगवान अपने मूल विस्तार के द्वारा पुरुष अवतार धारण करते है और उन्ही से सब कुछ आरम्भ होता है। भौतिक जगत का तब तक विकास असंभव है जब तक परमात्मा कृष्ण का भौतिक जगत में प्रवेश नहीं हो जाता है।

 

 

 

 

जैसा कि सुबल उपनिषद में कहा गया है – प्रकृत्यादी सर्वभूतान्तर्यामी सर्वशेषी च नारायणः। परमात्मा रूप में भगवान समस्त प्रकटी भूत ब्रह्माण्ड में विद्यमान है।

 

 

 

 

इस श्लोक में अर्जुन को गुडाकेश कहकर संबोधित किया गया है। जिसका अर्थ है, “निद्रा रूपी अंधकार को जीतने वाला।” जो लोग अज्ञान रूपी अंधकार में सोये हुए है।

 

 

 

 

उनके लिए यह समझ पाना संभव नहीं है कि भगवान किन-किन विधियों से इस लोक में तथा बैकुंठ लोक में प्रकट होते है। चूँकि अर्जुन ऐसे अंधकार से ऊपर है।

 

 

 

 

अतः कृष्ण के द्वारा अर्जुन के लिए इस प्रकार का (गुडाकेश) सम्बोधन महत्वपूर्ण है। अतः भगवान अर्जुन को अपना विविध ऐश्वर्य बताने के लिए तैयार हो जाते है।

 

 

 

 

इस शृष्टि का कारण महत्तत्त्व नहीं होता, वास्तव में महाविष्णु ही संपूर्ण भौतिक शक्ति या महत्तत्व में प्रवेश करते है, अतः वह महत्तत्व की आत्मा है।

 

 

 

 

बिना आध्यात्मिक स्फुलिंग के शरीर विकसित नहीं हो सकता है। हमे ज्ञात है कि जीव का शरीर आत्मा के स्फुलिंग के उपस्थित के कारण ही विद्यमान रहता है।

 

 

 

 

जब महाविष्णु इन प्रकटीभूत ब्रह्मांडो में प्रवेश करते है तो वह प्रत्येक जीव में पुनः परमात्मा के रूप में प्रकट होते है। वह सभी लौकिक तथा अलौकिक जगत की आत्मा है और आत्मा के बिना जीवन, जगत संभव है?

 

 

 

 

श्रीमद्भागवत में तीनो पुरुष अवतारों का वर्णन हुआ है। सात्वत तंत्र में भी इसका वर्णन मिलता है – विष्णोस्तु त्रीणि रूपाणि पुरुषाख्यान्याथो विदुः – भगवान इस लोक में अपने तीन स्वरूपों को प्रकट करते है। – 1. कारणोदक शायी विष्णु 2. गर्भोदकशायी विष्णु 3. क्षीरोदकशायी विष्णु। ब्रह्म संहिता में (5,46) महाविष्णु या कारणोदकशायी विष्णु का वर्णन मिलता है। यः कारणार्णवजले भजति स्म योगनिद्राम – सर्व कारणों के कारण भगवान कृष्ण ही महाविष्णु के रूप में  कारणार्णव में शयन करते है अतः भगवान ही इस ब्रह्माण्ड के आदि कारण, पालक तथा समस्त शक्ति के अवसान है।

 

 

 

 

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