Durga Chalisa Pdf / Durga Saptshati Pdf Hindi

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Durga Chalisa Pdf / Durga Saptshati Pdf Hindi

 

 

दुर्गा सप्तशती फ्री डाउनलोड

 

दुर्गा चालीसा फ्री डाउनलोड

 

 

 

 

प्रत्येक वस्तु भगवान की उपस्थिति से परिपूर्ण – भगवान अर्जुन से कह रहे है कि मैं प्रत्येक लोक में प्रवेश करता हूँ और मेरी शक्ति से सारे लोक अपनी कक्षा में स्थित रहते है। मैं चन्द्रमा बनकर समस्त वनस्पतियो को जीवन रस प्रदान करता हूँ।

 

 

 

उपरोक्त शब्दों का तात्पर्य – वैदिक मंत्रो में कहा गया है कि भगवान के कारण ही सूर्य से ज्योति प्रकट होकर सारे संसार को प्रकाशमान करती है। अर्थात भगवान के कारण ही सूर्य चमकता है और सारे लोक लगातार घूमते रहते है।

 

 

 

 

यदि ऐसा भगवान के कारण न हो तो सारे लोको को वायु में धूल-धूसरित होने में देर नहीं लगेगी। अर्थात वायु में धूल के समान विखर कर सारे लोक नष्ट हो जायेंगे और भगवान के कारण ही चन्द्रमा सारे वनस्पतियो का पोषण करने में समर्थ है।

 

 

 

 

चन्द्रमा के प्रभाव के कारण ही सभी सब्जियों में स्वाद मिलता है। चन्द्रमा के प्रकाश के बिना न तो सब्जियों का पोषण हो सकता है न तो उन सब्जियों में कोई स्वाद रहेगा अर्थात सब्जियों में पौष्टिकता समाप्त होकर नीरस हो जाएगी।

 

 

 

 

ऐसा ज्ञात है कि सारे लोक केवल भगवान की शक्ति से वायु में तैर रहे है। ब्रह्मसंहिता में ऐसी विवेचना की गई है कि भगवान प्रत्येक अणु प्रत्येक लोक तथा प्रत्येक जीव के भीतर प्रवेश करते है।

 

 

 

 

उसमे कहा गया है कि – परमेश्वर का एक अंश परमात्मा लोको में, ब्रह्माण्ड में, जीव में तथा एक छोटे से छोटे अणु में भी प्रवेश करता है।

 

 

 

 

अतः उनके प्रवेश करने प्रत्येक वस्तु का ठीक प्रकार से अवलोकन होता है। जैसे शरीर में जब आत्मा का संचार रहता है तो जीवित मनुष्य पानी में तैर सकता है।

 

 

 

 

लेकिन जीवित स्फुलिंग के इस देह से निकलते ही शरीर मृत हो जाता है और पानी में डूब जाता है। निःसंदेह सड़ जाने के पश्चात् शरीर तिनके की भांति या अन्य वस्तुओ की भांति तैरता है लेकिन मरने के तुरंत बाद पानी में डूब जाता है। इसी प्रकार से यह सारे लोक शून्य में तैर रहे है और यह सब उनमे भगवान की परम शक्ति के प्रवेश के कारण है।

 

 

 

 

वास्तव में सारा मानव समाज ही भगवान की कृपा से काम करता है। सुख में रहते हुए भोजन का आनंद प्राप्त करता है अन्यथा मनुष्य के जीवित रहने की आशा नहीं रहती, रसात्मकः शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

 

 

 

प्रत्येक वस्तु चन्द्रमा के प्रभाव से परमेश्वर के द्वारा ही स्वादिष्ट बनती है। उनकी शक्ति असीमित होने से ही प्रत्येक लोक को उसी तरह थामे रहती है जिस प्रकार धूल को मुट्ठी।

 

 

 

 

मुट्ठी में बंद रहने के कारण ही धूल के गिरने की संभावना नहीं रहती है लेकिन ज्यों ही धूल को वायु में फेक दिया जाता है वह नीचे गिर जाती है।

 

 

 

 

 

उनके (भगवान के) बल तथा शक्ति से ही सारी चर तथा अचर वस्तुए अपने-अपने स्थानों पर टिकी हुई है। इसी प्रकार से जो सारे लोक वायु में तैर रहे है वास्तव में वह सब भगवान के विराट रूप के मुट्ठी में स्थित है।

 

 

 

 

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