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50 + Dharmik Pustake Pdf / 50 + धार्मिक पुस्तके Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Dharmik Pustake Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Dharmik Pustake Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  वराहमिहिर बृहत्संहिता pdf  भी पढ़ सकते हैं।

 

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Dharmik Pustake Pdf / धार्मिक पुस्तके पीडीएफ

 

 

 

1-  ऋग्वेद इन हिंदी Pdf

 

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50 + Dharmik Pustake Pdf
50 + Dharmik Pustake Pdf
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2- बृहस्पति स्तोत्र Pdf

 

3- सुंदर कांड इन हिंदी Pdf

 

4-  विनय पत्रिका Pdf

 

5-  रामायण पीडीएफ इन हिंदी फ्री

 

6-  सम्पूर्ण महाभारत हिंदी में Pdf

 

7- 20 + Gita Press Gorakhpur Books In Hindi Pdf Free Download

 

8-  वाल्मीकि रामायण फ्री डाउनलोड

 

9- हनुमान बाहुक Pdf in Hindi

 

10-  हनुमान चालीसा लिरिक्स हिंदी पीडीएफ

 

11- बजरंग बाण पीडीऍफ़ फ्री

 

 

 

 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

3, 4- वन की मनोहरता वर्णन नहीं की जा सकती है। मानो पृथ्वी जनक की पहुनाई (स्वागत) कर रही हो। तब जनकपुर वासी सब लोग नहाकर, श्री राम जी, जनक जी और मुनि से आज्ञा लेकर सुंदर, वृक्षों को देख-देखकर प्रेम से पूर्ण होकर जहां-तहां उतरने लगे। पवित्र और अमृत के समान स्वादिष्ट अनेक प्रकार के पत्ते, फल, मूल और कंद।

 

 

 

 

279- दोहा का अर्थ-

 

 

 

श्री राम जी के गुरु वशिष्ठ जी ने सबके पास अधिक संख्या में भेज दिए। तब वह पितर देवता और अतिथि की पूजा करके फलाहार करने लगे।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- इस प्रकार चार दिन बीत गए, श्री राम जी को देखकर सभी नर-नारी सुखी है। दोनों समाज के मन में ऐसी इच्छा है कि सीता राम जी के बिना लौटना अच्छा नहीं है।

 

 

 

 

2- श्री सीता राम जी के साथ वन में रहना अनेको देवलोक के निवास के समान ही सुखदायक है। श्री लक्ष्मण जी, श्री राम जी और श्री जानकी जी को छोड़कर जिसको घर अच्छा लगे तो समझो विधाता उसके विपरीत है।

 

 

 

 

3- जब दैव सबके अनुकूल हो, तभी श्री राम जी के पास वन में निवास हो सकता है। मंदाकिनी जी में तीनो समय स्नान तथा मंगल की माला समूह रूप श्री राम जी का दर्शन।

 

 

 

 

4- श्री राम जी का पर्वत कामदनाथ, वन और तपस्वियों के स्थानों में घूमना और अमृत के समान ही कंद, मूल, फल का भोजन करना चौदह वर्ष तो सुख के साथ ही पल के समान ही व्यतीत हो जायेंगे और कब बीत गए पता ही न चलेगा।

 

 

 

 

280- दोहा का अर्थ-

 

 

 

सब लोग कह रहे है कि हम इस सुख के योग्य नहीं है। हमारे ऐसे भाग्य कहां? दोनों समानो का श्री राम जी चरणों में सहज स्वभाव से ही प्रेम है।

 

 

 

 

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