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Dehati Pustak Bhandar Books Pdf / देहाती पुस्तक भंडार बुक्स Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Dehati Pustak Bhandar Books Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Dehati Pustak Bhandar Books Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  गोरखनाथ शाबर मंत्र Pdf पढ़ सकते हैं।

 

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Dehati Pustak Bhandar Books Pdf / देहाती पुस्तक भंडार बुक्स पीडीएफ

 

 

 

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Gorakhnath Shabar Mantra Pdf
गोरखनाथ शाबर मंत्र Pdf Download
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सिर्फ पढ़ने के लिए

 

 

 

 

सुंदर मुनि मंडली के बीच में सीता जी और श्री राम जी ऐसे सुशोभित लग रहे है मानो ज्ञान की सभा में साक्षात् भक्ति और सच्चिदानंद शरीर धारण करके विराजमान है।

 

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- छोटे भाई शत्रुघ्न और निषाद राज के साथ भरत जी मन प्रेम में मग्न हो रहा है। हर्ष-शोक, सुख-दुःख आदि सब भूल गए। हे नाथ! रक्षा कीजिए, हे गुसाई! रक्षा कीजिए, ऐसा कहते हुए वह पृथ्वी पर गिर पड़े।

 

 

 

 

2- प्रेम भरे वचन से लक्ष्मण जी ने पहचान लिया और अपने मन में जान लिया कि भरत जी प्रणाम कर रहे है। उनका मुख श्री राम जी की तरफ था और भरत जी पीछे थे, इसलिए देखा नहीं। अब इस ओर तो भाई भरत का सरस प्रेम और उधर श्री राम जी स्वामी की सेवा की प्रबल विवशता।

 

 

 

3- न तो क्षर भर ऐसा सेवा छोड़कर मिलते बनता है और न प्रेम वश उपेक्षा करते ही बनता है। कोई श्रेष्ठ कवि ही इस लक्ष्मण के चित्त की दुविधा का वर्णन कर सकता है। वह सेवा को ही विशेष महत्वपूर्ण समझकर उसमे ही लगे रहे मानो चढ़ी हुई पतंग को खिलाडी खींच रहा हो।

 

 

 

 

4- लक्ष्मण जी ने प्रेम के साथ पृथ्वी पर मस्तक टेकते हुए कहा – हे रघुनाथ जी! भरत जी प्रणाम कर रहे है। यह सुनते ही रघुनाथ जी प्रेम में अधीर हो उठे। कही वस्त्र गिरा, कही कुछ गिरा।

 

 

 

 

240- दोहा का अर्थ-

 

 

 

 

कृपा निधान श्री राम जी ने उनको जबरदस्ती उठाकर हृदय से लगा लिया। भरत जी और श्री राम जी के मिलने की रीति को देखकर सब लोग अपनी सुधि भूल गए।

 

 

 

चौपाई का अर्थ-

 

 

 

1- मिलन की रीति और प्रीति कैसे बखानी जाय? यह तो कवि कुल के लिए कर्म, मन, वाणी तीनो से अगम है। दोनों भाई मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार को भुलाकर परम प्रेम से पूर्ण हो रहे है।

 

 

 

 

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