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Dale Carnegie Books in Hindi PDF Free / लोक व्यवहार Pdf Download

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Dale Carnegie Books in Hindi Free मित्रों इस पोस्ट Dale Carnegie Books in Hindi  की किताबों के बारे में बताया गया है।  आप नीचे की लिंक से Dale Carnegie Book in Hindi खरीद सकते हैं।

 

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Dale Carnegie Books in Hindi PDF Free

 

 

 

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Dale Carnegie Books in Hindi
चिंता छोडो और सुख से जियो बुक फ्री डाउनलोड Chinta Chhodo Sukh se Jiyo Hindi Pdf
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 Lok Vyavahar Book in Hindi Pdf  लोक व्यवहार Pdf Download
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How to Win Friends and Influence People in Hindi Pdf
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Note- अगर किसी भी प्रकाशक को यहाँ दी गयी किसी भी लिंक से यदि कोई परेशानी हो तुरंत ही हमें [email protected] पर मेल करें। हम निश्चय ही उस लिंक को हटा लेंगे। हम कॉपीराइट के नियमों का पूर्ण सम्मान करते हैं। 

 

 

 

डेल कार्नेगी Books in Hindi PDF Download

 

 

 

डेल कार्नेगी की सभी किताबे बहुत ही प्रेरणादायक होती है। उनकी किताबो को पढ़ने के बाद एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। डेल कार्नेगी का जन्म 24 नवंबर 1888 को मैरीबिल्ल, मिसैरी में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था।

 

 

 

उन्होंने हमेशा ही सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया और उनकी किताबो में भी यह साफ दिखता है। कार्नेगी ने अब्राहम लिंकन की जीवनी सहित कई सारी किताबे लिखी जो कि बहुत ही प्रसिद्ध हुई। आइये उनकी किताबो के बारे में जानते है।

 

 

 

List Of Dale Carnegie Books Hindi And English 

 

 

 

1- हाउ टू विन फ्रैंड्स एंड इंफ्लूएंस प्यूपिल (How To Win Friends And Influonce People)

 

2- हाउ टू स्टाप वरिंग एंड स्टार्ट लिविंग (How To Stop Worrying And Start Living)

 

3- द किक एंड ईजी वे टू इफेक्टिव स्पीकिंग (The Quick And Easy Wey To Effective Speaking)

 

4- How To Win Friends And Influence People In The Digital Age 

 

5- द आर्ट ऑफ़ पब्लिक स्पीकिंग (The Art Of Public Speaking)

 

6- अच्छा बोलने की कला और कामयाबी।

 

7- चिंता छोडो और सुख से जियो (How To Stop Worrying Living)

 

8- अब्राहम लिंकन।

 

9- आप भी लीडर बन सकते है।

 

10- हाउ टू डेवलप सेल्फ कॉन्फिडेंस (How To Davelop Self Confidence)

 

11- How To Enjoy Your Life And Yor Job.

 

12- Lincoln The Unknown.

 

13- लोक व्यवहार (Lok Vyavhar)

 

 

 

Lok Vyavhar Book Review In Hindi 

 

 

 

इस पुस्तक में डेल कार्नेगी ने यह बताने की कोशिस की है कि अपने जैसा लोगो को कैसे ढाल सकते है। इसमें उन्होंने ऐतिहासिक आकड़ो, दुनिया के तमाम नेताओ के साथ ही अपने विचार भी साझा किए है। यहां हम आपको बता रहे है कि लोक व्यवहार (Lok Vyavhar Book) How To Win Friends And Influence People का हिंदी अनुवाद है।

 

 

 

आप भी लीडर बन सकते है किताब के बारे में 

 

 

 

यह डेल कार्नेगी की बहुत ही प्रसिद्ध किताब है। इसे पढ़ने के बाद आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा शक्ति का संचार होता है और किसी भी कार्य को आसानी से कर सकते है। अगर आप किसी कार्य में कठिनाई महसूस कर रहे है तो इस किताब को जरूर पढ़े।

 

 

 

चिंता छोडो और सुख से जियो किताब के बारे में 

 

 

 

यह प्रख्यात लेखक डेल कार्नेगी की बहुत ही प्रसिद्ध और प्रेरणादायी किताब है। इस किताब से लाखो लोग प्रेरित हो चुके है। इसमें तमाम नेताओ के विचारो को चित्रित किया गया है। जब आप इस किताब को पढ़ेंगे तो इसके महत्व को और भी अच्छे से समझ जायेंगे।

 

 

 

Hindi Kahani 

 

 

 

सिर्फ पढ़ने के लिए – गिरधर और गोपाल सगे भाई थे । गिरधर और गोपाल दोनों अलग हो चुके थे । गिरधर इस आशा में एक साहूकार से 80 रुपया उधार लेकर एक गाय खरीद लाया है क्योंकि उसे अपना जीवन स्तर थोड़ा ऊपर उठाने अभिलाषा है। उसे यह भी आशा हैं कि वह गाय का पालन-पोषण करके आत्मनिर्भर बन सकता है।

 

 

 

गिरधर ने सोचा मैं एक गाय का मालिक भी बन जाऊंगा और कर्ज भी चुका दूंगा। उसका भाई गोपाल अपने भाई को देखकर असहज महसूस करने लगा।

 

 

 

उसे लगा कि गिरधर उससे कहीं आगे निकल जायेगा। गिरधर और गोपाल का बंटवारे के समय ही कुछ लेन-देन बाकी था। जिसमें गिरधर ने गोपाल को 10 रुपये का धोखा दिया था।

 

 

 

इसी विवाद के फलस्वरूप ‘धन्नी’ गिरधर की और ‘मीरा’ गोपाल की पत्नी के बीच लड़ाई भी हो गयी और लाठी डंडे भी चल गए। यह देखकर गोपाल ने सोचा “न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी” उसने गिरधर की गाय को जहर दे दिया। गाय मर गयी।

 

 

 

अब गोपाल को पुलिस पकड़ने के लिए ढूंढने लगी। गोपाल पुलिस से बचने के लिए पलायन कर गया। अब गिरधर पूरे व्यवसाय के साथ गोपाल के ऊपर मुकदमा करने के लिए एक सेठ से कर्ज ले लिया और गोपाल को पकड़ने के लिए पुलिस को रिश्वत भी दिया। गिरधर का एक लड़का था, उसका नाम कुमार था।

 

 

 

वह एक आवारा किस्म का लड़का था।  दोनों ग्रामीणों के क्रोध से बचने के लिए शहर भाग जाते है। रीमा के मुद्दे को लेकर ग्राम पंचायत ने गिरधर को जुर्माना भरने का आदेश दिया। जुर्माना भरने के लिए गिरधर के पास पैसा नहीं था। इसलिए वह पुनः कर्ज लेता है।

 

 

 

उसके ऊपर कर्ज का भार और भी बढ़ जाता है। गोपाल को बंद करवाने के लिए गिरधर अपनी क्षमता से अधिक कार्य करता है, और अंत में मर जाता है।

 

 

 

उसका बेटा कुमार और रीमा शहर में निर्बाध्य जीवन जीने लगे,  लेकिन कुमार इतना भी कमा न सका कि वह अपने पिता के लिए हुए कर्ज का भुगतान कर सके।

 

 

 

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