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Crime investigation book in Hindi Pdf Download

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Crime investigation book in Hindi Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Crime investigation book in Hindi Pdf Download कर सकते हैं और आप यहां से  यार जादूगर pdf download कर सकते हैं।

 

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Crime investigation book in Hindi Pdf Download

 

 

 

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Crime investigation book in Hindi Pdf
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सिर्फ पढ़ने के लिये 

 

 

 

रजनी बिना विलंब किए रामनगर की बांस फोड़वा बस्ती में पहुँच गयी। वहां देखा कई परिवार अपने इस धंधे में लगे हुए थे।

 

 

 

रजनी वहां एक उम्रदराज व्यक्ति से बात करने लगी। वह बोली चाचा इस कार्य में आपको रोज कितनी आमद हो जाती है। वह बुजुर्ग बोला बेटी यह तो हम लोग दूसरे के लिए बना रहे है तीन दिन बाद यह बनाया हुआ सामान यहां से चला जाएगा और हमे रोज पांच सौ रुपये के हिसाब से पैसा मिलता है।

 

 

 

रजनी बोली चाचा आपको बारह महीने के लिए पर्याप्त काम मिलता है क्या? वह बुजुर्ग बोला इसी बात का तो रोना है हमे पर्याप्त काम नहीं मिलता है। रजनी बोली चाचा क्या हरा बांस रहने पर सामान तैयार होता है? वह बुजुर्ग आदमी बोला नहीं बेटी अधपका और सूखे बांस से भी सामान तैयार होता है।

 

 

 

रजनी उस बुजुर्ग की बातो से संतुष्ट होते हुए बोली हम आपसे दस दिन बाद मिलेंगे। रजनी अब अपने गांव बिंदकी आ गयी थी। दूसरे दिन वह रघुराज सोनकर से मिली थी और इस कार्य की लिए सहयोग करने के लिए कहा। रघुराज सोनकर ने बंगलोर प्रताप भारती को फोन पर सारी बात कह दिया।

 

 

 

प्रताप भारती ने रजनी के लिए पांच लाख रुपये का सहयोग करने के लिए कहा दिया। रजनी अब सुधीर से मिलने के लिए उसके घर आ गयी थी। सुधीर अपने परीक्षा की तैयारी मे व्यस्त था। थोड़ा सा समय में रजनी उसे सारी स्थिति कहकर अपने घर चली आयी।

 

 

 

रजनी मजदूरों की सहायता से बांस इकट्ठा करने लगी। तीन सामान बनाने वाले कारीगर को ढूंढ लायी और बांस से कुर्सी मेज इत्यादि जरूरत का सामान तैयार होने लगा। लोग कौतुहल से देखते थे। तैयार माल को रजनी ट्रैक्टर पर लादकर बाजार ले जाती।

 

 

 

दो आदमी सामान बेचने के लिए रख दिया जितना सामान तैयार होता था वह बाजार में लोग फौरन खरीद लेते थे। इस सारे कार्य में बहुत मेहनत हो रही थी लेकिन इसका भविष्य उज्वल था। सुधीर की परीक्षा हो चुकी थी। वह रजनी को इतना मेहनत करते देखकर परीक्षा के परिणाम की परवाह किए बगैर ही उसके साथ जुड़ गया।

 

 

 

अब तो रजनी का व्यापार बहुत तीव्र गति से बढ़ने लगा। सुधीर और रजनी ने एक बड़ा सा खाली प्लाट खरीद लिया था और उसमे ही कम्पनी को बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया था। सुधीर और रजनी दोनों एक महीने के बाद रामनगर पहुंचे और उस बुजुर्ग प्यारेलाल सेव पंद्रह कारीगर के लिए कहा।

 

 

 

बुजुर्ग प्यारेलाल ने मेहनताना पूछा तो रजनी ने उसे बताया कि आपको सात सौ रुपये प्रतिदिन मिलेगा बारह महीने भी आपको आजीविका मिलती रहेगी। सुधीर और रजनी दोनों पंद्रह कारीगर लेकर बिंदकी आ गए थे और इनका व्यवसाय अच्छे ढंग से प्रगति कर रहा था।

 

 

 

सुधीर ने इस कम्पनी को ‘रजनी हस्तकला केंद्र’ नाम दिया था। यहां के बने हुए सामान की कई शहरों में बहुत ही मांग थी।

 

 

 

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