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Cheiro Ank vigyan Pdf / कीरो अंक विज्ञान Pdf

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नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट में हम आपको Cheiro Ank vigyan Pdf देने जा रहे हैं, आप नीचे की लिंक से Cheiro Ank vigyan Pdf Download कर सकते हैं और यहां से कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा Pdf कर सकते हैं।

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Cheiro Ank vigyan Pdf

 

 

पुस्तक का नाम  Cheiro Ank vigyan Pdf
पुस्तक के लेखक  कीरो 
फॉर्मेट  Pdf 
भाषा  हिंदी 
साइज  3.5 Mb 
पृष्ठ  209 
श्रेणी  धार्मिक 

 

 

 

कीरो अंक विज्ञान Pdf Download

 

 

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Cheiro Ank vigyan Pdf
Cheiro Ank vigyan Pdf Download यहां से करे।
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कालचक्र के रक्षक Pdf Download यहां से करे।
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सिर्फ पढ़ने के लिये

 

 

इसलिए तुम्हे अपने पति भगवान शंकर की हमेशा सेवा करनी चाहिए। वे दीनदयालु सबके सेवनीय और सत्पुरुषों के आश्रय है। श्रुतियो और स्मृतियों में पतिव्रता धर्म को महान बताया गया है। इसको जैसा श्रेष्ठ बताया जाता है वैसा दूसरा धर्म नहीं है। यह निश्चयपूर्वक कहा जा सकता है।

 

 

 

पातिव्रत्य धर्म में तत्पर रहने वाली स्त्री अपने प्रिय पति के भोजन कर लेने पर ही भोजन करे। शिवे! जब पति खड़ा हो तब साध्वी स्त्री को भी खड़ी ही रहनी चाहिए। शुद्धबुद्धिवाली साध्वी स्त्री हर रोज अपने पति के सो जाने पर सोये और उसके जागने से पहले ही जग जाए।

 

 

 

वह छल-कपट छोड़कर सदा उसके लिए हितकर कार्य ही करे। शिवे! साध्वी स्त्री को चाहिए कि जब तक वस्त्राभूषणों से विभूषित न हो ले तब तक वह अपने को पति की नजर के सम्मुख न लाये। यदि पति किसी कार्य से परदेश गया हो तो उन दिनों उसे कदापि श्रृंगार नहीं करना चाहिए।

 

 

 

पतिव्रता स्त्री कभी पति का नाम न ले। पति के कड़वे वचन कहने पर भी वह बदले में कड़ी बात न कहे। पति के बुलाने पर घर के सारे कार्य छोड़कर तुरंत उसके पास चली जाय और हाथ जोड़ प्रेम से मस्तक झुकाकर पूछे – नाथ! किसलिए इस दासी को बुलाया है?

 

 

 

मुझे सेवा के लिए आदेश देकर अपनी कृपा से अनुगृहीत कीजिए। फिर पति जो आदेश दे उसका वह प्रसन्न हृदय से पालन करे। वह घर के दरवाजे पर देर तक खड़ी न रहे। दूसरे के घर न जाय। कोई गोपनीय बात जानकर हर एक के सामने उसे प्रकाशित न करे।

 

 

 

पति के बिना कहे ही उनके लिए पूजन सामग्री स्वयं जुटा दे तथा उनके हित साधन के यथोचित अवसर की प्रतीक्षा करती रहे। पति की आज्ञा लिए बिना कही तीर्थयात्रा के लिए भी न जाय। लोगो की भीड़ से भरी हुई सभा या मेले आदि के उत्सवों को देखना वह दूर से ही त्याग दे।

 

 

 

जिस नारी को तीर्थयात्रा का फल पाने की इच्छा हो उसे अपने पति का चरणोदक पीना चाहिए। उसके लिए उसी में सारे तीर्थ और क्षेत्र है इसमें संशय नहीं है। पतिव्रता नारी पति के उच्छिष्ट अन्न आदि को परम प्रिय भोजन मानकर ग्रहण करे और पति जो कुछ दे उसे महाप्रसाद मानकर शिरोधार्य करे।

 

 

 

देवता, पितर, अतिथि, सेवकवर्ग, गौ तथा भिक्षु समुदाय के लिए अन्न का भाग दिए बिना कदापि भोजन न करे। पतिव्रत धर्म में तत्पर रहने वाली गृहदेवी को चाहिए कि वह घर की सामग्री को सुरक्षित रखे। गृहकार्य में कुशल हो, हमेशा खुश रहे और खर्च की ओर से हाथ न बढ़ाये।

 

 

 

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